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ज्ञानेश कुमार का मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं करेंगे : वंचित बहुजन आघाड़ी का प्रदर्शन

प्रकाश आंबेडकर बोले—हम अपराधी नहीं बनना चाहते, अपना मताधिकार सुरक्षित रखना है

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 28 अक्टूबर। वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड. प्रकाश आंबेडकर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और फॉर्म-6 के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी पार्टी मुंबई में आंदोलन कर रही है। बुधवार दोपहर 12 बजे दादर पूर्व स्थित राजगृह में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर मनमानी का आरोप

प्रकाश आंबेडकर ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों के साथ मिलकर काम करने के बजाय कई फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी चोकलिंगम ने भी एसआईआर और फॉर्म-6 की प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयोग को पत्र लिखकर उचित मार्गदर्शन मांगा है।

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संसद के अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप

आंबेडकर ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने संसद की ओर से निर्धारित अधिकारों की सीमाओं का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण प्रतिवर्ष जनवरी में किया जाना चाहिए। वहीं, विशेष पुनरीक्षण की अनुमति किसी निर्वाचन क्षेत्र या उसके किसी हिस्से में शिकायत मिलने पर दी गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीमित क्षेत्र के लिए दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल पूरे महाराष्ट्र में एसआईआर लागू करने के लिए किया गया। उन्होंने इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि न्यायिक फैसले के जरिए जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के प्रावधानों के दायरे को बढ़ाकर चुनाव आयोग को राहत देने का प्रयास किया गया।

आंबेडकर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का अधिकार संसद के पास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में अपनी बात रखने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी रास्ते अपनाए जा रहे हैं।

मतदाता सूची से नाम हटाने पर जताई चिंता

आंबेडकर ने कहा कि वंचित बहुजन आघाड़ी ने पहले ही आशंका जताई थी कि महाराष्ट्र में करीब ढाई करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। अब भी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि कई जीवित लोगों को मतदाता सूची में मृत घोषित कर दिया गया है। ऐसे लोग चुनाव आयोग के सामने उपस्थित होकर अपने नाम दोबारा शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

फॉर्म-6 को लेकर उठाए सवाल

आंबेडकर ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने के बाद संबंधित लोगों को दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरने को कहा जा रहा है। उनके अनुसार, यह फॉर्म मुख्य रूप से पहली बार मतदाता बनने वाले और 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले लोगों के पंजीकरण के लिए है।

उन्होंने दावा किया कि इस फॉर्म में पहले मतदान नहीं करने से संबंधित घोषणा या शपथपत्र देना पड़ सकता है। ऐसे में पहले मतदान कर चुके व्यक्ति का नाम सूची से हटने के बाद यदि वह यह घोषणा करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के कारण मतदाता अनावश्यक कानूनी मुश्किलों में फंस सकते हैं।

‘हम अपराधी नहीं बनना चाहते’

प्रकाश आंबेडकर ने कहा, “हम अपराधी नहीं बनना चाहते। हम अपना मताधिकार सुरक्षित रखना चाहते हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की गलतियों के कारण आम नागरिकों को कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नाम दोबारा दर्ज कराने की प्रक्रिया में आने वाली मुश्किलों का राजनीतिक विरोधियों को फायदा मिल सकता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर प्रदर्शन

आंबेडकर ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर प्रदर्शन के जरिए पार्टी मतदाता सूची और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोगों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है और यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से गलतियों को समय रहते रोकने की मांग की।

हाईकोर्ट में याचिका का किया जिक्र

आंबेडकर ने कहा कि वंचित बहुजन आघाड़ी ने इस मामले में पहले भी याचिका दायर की थी और अन्य पक्षों से साथ आने की अपील की थी, लेकिन कोई आगे नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि मुंबई हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर उनकी पार्टी के अलावा कोई अन्य पक्ष नहीं लड़ रहा था और उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

उन्होंने कहा, “अगर उस समय सभी हमारे साथ आए होते, तो आज स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।” आंबेडकर ने मुंबईकरों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना है।

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