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अभिभाषण के दौरान हंगामा राज्यपाल ही नहीं, मां का भी अपमान : योगी आदित्यनाथ

न्यूज़म ब्यूरो

लखनऊ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान शुक्रवार को हुए हंगामे पर विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के आचरण से न केवल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख, बल्कि मातृ शक्ति का भी अपमान हुआ। उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष के आचरण को सनातन की परंपरा के विपरीत बताया।

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि माननीय राज्यपाल यहां पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आई थीं। उनका यह कार्यक्रम अचानक नहीं थोपा गया था, दलीय बैठकों में इसकी चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आप श्रेष्ठ कुल में पैदा हुए, ब्राह्मण हैं, वयोवृद्ध हैं और सदन में वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं, इसीलिए आपकी बात का बुरा नहीं माना जाता, लेकिन यह आचरण उचित नहीं है। आप अपने वक्तव्य में सनातन की बात कर रहे थे, लेकिन इसके अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन धर्म की परंपरा में मां की उम्र या अपनी उम्र से बड़ी महिला को मां के समान सम्मान देने का विधान है। इस बारे में महर्षि वेदव्यास ने हमें हजारों साल पहले बताया है। वह सनातन धर्म के सबसे बड़े व्याख्याकार हैं। उन्होंने वेदों को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ी को दिया। उनका कार्यकाल पांच हजार वर्ष पूर्व था, तब भारत में सबसे विकसित सभ्यता थी, तब भारत दुनिया को दिशा दिखा रहा था। महर्षि वेदव्यास जी ने कहा था.. ‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया।' यानी मां के समान कोई छाया नहीं है, मां के समान कोई सहारा नहीं है, मां के समान कोई रक्षक नहीं और मां के समान कोई प्रिय नहीं है।

 

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