न्यूज़म ब्यूरो
लखनऊ, 19 जनवरी। पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी चाहे जिस राजनीतिक दल से आते हों, उनका आचरण दलगत राजनीति से हटकर पूर्णतः न्यायपूर्ण एवं निष्पक्ष होना चाहिए और ऐसा दिखना भी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विधायिका के माध्यम से जनता की आकांक्षाएं और आवाज शासन तक पहुंचती हैं तथा उनका समाधान होता है। ऐसे में राज्यों में सदन की कार्यवाही का घटता समय सभी के लिए चिंताजनक है। श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही के लिए निश्चित एवं पर्याप्त समय सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि सदन जितना अधिक समय चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन और भी अधिक आवश्यक हो गया है। आज तकनीक के युग में जब चारों तरफ से सूचना का प्रवाह होता है, तब सदन की प्रामाणिकता बनाए रखना, हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाते हैं, आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाते हैं। इन सम्मेलनों से देशभर में नीतियों और कल्याणकारी उपायों में सामंजस्य स्थापित करने में भी सहायता मिलती है।

पीठासीन अधिकारियों के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि सदन में सभी सदस्यों, विशेषकर नए और युवा सदस्यों को पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि ये सदन जनता की समस्याओं को उठाने का सबसे प्रभावी मंच बने रहें।