सहकार क्षेत्र को मजबूत करना समय की जरूरत
मुंबई, 04 अक्टूबर। देश और महाराष्ट्र के विकास में सहकार क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में सहकार क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां हैं और इसे मजबूत बनाए रखना जरूरी है। यह बात महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने कही। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाळासाहेब थोरात ने महाराष्ट्र में सहकार आंदोलन के विकास में कांग्रेस नेताओं के योगदान को रेखांकित किया।
सहकार आंदोलन को बचाने की जरूरत
तिलक भवन में कांग्रेस के सहकार विभाग की ओर से आयोजित मेळावे में बोलते हुए हर्षवर्धन सपकाळ ने कहा कि स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सहकारिता के माध्यम से देश के विकास का सपना देखा था। वर्ष 1954 में उन्होंने शिक्षित युवाओं से राष्ट्र निर्माण के लिए सहकार क्षेत्र में काम करने का आह्वान किया था। इसके बाद देश में सहकारी संस्थाओं, चीनी मिलों, बैंकों, आवास संस्थाओं और पतसंस्थाओं का विस्तार हुआ।
सपकाळ ने आरोप लगाया कि वर्तमान में सहकार क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, सरकार की नीतियों में कॉरपोरेट क्षेत्र को अधिक महत्व मिलने से छोटे उद्योगों और सहकारी संस्थाओं के सामने कठिनाइयां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र को संरक्षित और मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
सहकारी बैंकों को मजबूत बनाने पर जोर
सपकाळ ने कहा कि कुछ सहकारी बैंक आर्थिक संकट में आए हैं और उनमें जमा लोगों की राशि वापस मिलेगी या नहीं, यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए व्यापक स्तर पर पहल की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि पतसंस्थाओं, सहकारी बैंकों और सहकार विभाग को सक्षम बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
यशवंतराव चव्हाण का महत्वपूर्ण योगदान : थोरात
वरिष्ठ नेता बाळासाहेब थोरात ने कहा कि महाराष्ट्र में सहकार आंदोलन को मजबूत बनाने में पूर्व मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका मानना था कि किसान केवल खेती तक सीमित न रहें, बल्कि उद्योग और व्यवसाय से भी जुड़ें तथा इसके लिए सहकारिता को माध्यम बनाया जाए।
थोरात के अनुसार, सहकारिता के माध्यम से राज्य में अनेक बैंक और वित्तीय संस्थाएं स्थापित हुईं, जिससे किसानों को साहूकारों के कर्ज के दबाव से राहत मिली। बाद में वसंतदादा पाटील ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
चीनी मिलों और सूत मिलों का विस्तार
थोरात ने कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में देश में हरित क्रांति की शुरुआत हुई। वर्ष 1970 से 1995 के बीच महाराष्ट्र में सहकारी क्षेत्र के माध्यम से चीनी मिलों और सूत मिलों का विस्तार हुआ। इसी दौर में श्वेत क्रांति को भी गति मिली। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों का विस्तार हुआ।
उन्होंने कहा कि आज सहकार क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां हैं, जिनका सामना करते हुए सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कांग्रेस द्वारा स्थापित सहकारिता के विचार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे उपस्थित
कार्यक्रम में कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ, वरिष्ठ नेता बाळासाहेब थोरात, सहकार विभाग प्रमुख शुभांगी शेरेकर, प्रदेश कांग्रेस वित्त विभाग प्रमुख विश्वास उटगी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।

