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हरियाणा प्रदेश में टीबी जांच को तेज़ किया जाए : स्वास्थ्य मंत्री

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चंडीगढ़, 8 जनवरी : हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आज स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना, चिकित्सा संसाधनों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा विभिन्न प्रमुख स्वास्थ्य परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करना रहा। इस बैठक में हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ मनोज कुमार, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ मनीष बंसल, डॉ कुलदीप सिंह, डॉ वीरेंद्र यादव सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

आरती सिंह राव ने बैठक के दौरान तपेदिक (टीबी) जांच से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप राज्य में टीबी जांच को तेज़ किया जाए। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री को जानकारी दी कि हरियाणा में टीबी के निदान हेतु प्रति वर्ष लगभग चार लाख व्यक्तियों की जांच करने की क्षमता है। जिला अस्पतालों में टीबी जांच के लिए पाथोडिटेक्ट मशीनों को खरीद/रीएजेंट रेंटल मॉडल के माध्यम से स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर संबंधित विक्रेताओं से प्रस्ताव मंगवाकर आगामी स्टेट हाई पॉवर परचेज कमेटी (एसएचपीपीसी) बैठक में विचार किया जाएगा। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर पर टीबी जांच के लिए ट्रूनैट मशीनें खरीदने का निर्णय लिया गया, जिसका एजेंडा भी अगली एसएचपीपीसी बैठक में रखा जाएगा।

 

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बैठक में सीटी स्कैन और एमआरआई सुविधाओं को पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित करने के विषय पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि ये सेवाएं राज्य के कई जिलों में पहले से संचालित हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए कि शीघ्र ही सभी जिला अस्पतालों में सीटी और एमआरआई सेवाएं शुरू की जाएं।

इसके अलावा, सभी जिला अस्पतालों में विभिन्न पैथोलॉजी जांचों को एक ही एजेंसी के माध्यम से संचालित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। बताया गया कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में यह मॉडल सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों में ट्रॉमा से संबंधित सेवाओं को और अधिक मजबूत करने पर भी जोर दिया गया, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बेहतर और त्वरित उपचार मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा उपकरणों की चल रही खरीद प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों की आवश्यकताओं के अनुरूप उपकरणों की खरीद में तेजी लाई जाए। साथ ही, सभी स्वास्थ्य संस्थानों में दवाइयों और उपभोग्य सामग्रियों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

बैठक में दवाओं के लिए नॉन-अवेलेबिलिटी सर्टिफिकेट (NAC) जारी करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को जमीनी स्तर की जरूरतों के अनुरूप और अधिक संवेदनशील बनाया जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने सभी अधिकारियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।

 

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