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कर नीति केवल राजस्व संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि निवेश-रोजगार व आर्थिक विकास की नीति भी है : रेखा शर्मा

न्यूज़म ब्यूरो 
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 : राज्यसभा में The Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने विधेयक का समर्थन किया और कहा कि कर व्यवस्था को केवल राजस्व संग्रह के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। कर नीति का सीधा संबंध देश में निवेश, रोजगार, विनिर्माण, उद्यमिता और आर्थिक विकास से है।
शर्मा ने अपने संबोधन की शुरुआत एक सरल सवाल से की कि कानून आखिर किसके लिए है? उन्होंने कहा कि कानून केवल वकीलों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर विशेषज्ञों के लिए नहीं, बल्कि उस सामान्य नागरिक के लिए भी होना चाहिए जो नौकरी करता है, छोटा या बड़ा व्यवसाय चलाता है, निवेश करता है, उद्योग स्थापित करता है और ईमानदारी से अपने करों का भुगतान करता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। सरकार का दृष्टिकोण अब नागरिक को संदेह की नजर से देखने के बजाय विश्वास करने, सुविधा प्रदान करने और विकास का भागीदार बनाने का है। कर सुधार भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं। शर्मा ने कहा कि पुराना Income-tax Act, 1961 तकनीकी रूप से ब्रिटिश काल का कानून नहीं था, लेकिन दशकों तक हमारी कर एवं प्रशासनिक व्यवस्था में एक पुरानी सोच की झलक दिखाई देती रही—जटिल प्रावधान, कठिन भाषा, अनेक शर्तें और करदाता तथा सरकार के बीच अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाएं।
उन्होंने कहा कि Income-tax Act, 2025, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ, कर व्यवस्था को आधुनिक और सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। वर्तमान Amendment Bill इसी सुधार यात्रा को आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—ईमानदार करदाता के लिए व्यवस्था को सरल बनाना, निवेशक के लिए निश्चितता बढ़ाना और भारत में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।
शर्मा ने कहा कि इस विधेयक में निवेश को आकर्षित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत में निवेश आता है तो केवल पूंजी नहीं आती, बल्कि उसके साथ उद्योग, उत्पादन, रोजगार, तकनीक और नए अवसर भी आते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशकों के लिए अनावश्यक जटिलताओं को कम करने और नियमों को अधिक तर्कसंगत बनाने से भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि निवेशक कितने कागज भर रहा है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पारदर्शी और वैध निवेश भारत आए, उद्योग स्थापित हों और रोजगार के अवसर पैदा हों।” इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए श्रीमती शर्मा ने कहा कि भारत के सामने वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने का एक ऐतिहासिक अवसर है।
उन्होंने कहा कि विधेयक में निर्दिष्ट परिस्थितियों में विदेशी कंपनियों द्वारा कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में कंपोनेंट रखने और भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के लिए उनकी आपूर्ति से संबंधित आय पर निर्धारित अवधि तक कर छूट का प्रावधान भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसका व्यापक उद्देश्य स्पष्ट है—कंपोनेंट भारत आएं, उत्पादन भारत में हो, निवेश भारत में हो और रोजगार हमारे युवाओं को मिले।
शर्मा ने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख डायमंड प्रोसेसिंग केंद्रों में शामिल है और भारतीय कारीगरों की कटिंग एवं पॉलिशिंग की क्षमता विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि विधेयक में Special Notified Zones में रफ डायमंड से संबंधित पात्र विदेशी कंपनियों को निर्धारित शर्तों के तहत कर संबंधी प्रोत्साहन देने का प्रावधान भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेड और वैल्यू चेन में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा, “हमारे कारीगरों की कुशलता भारत की ताकत है। इसलिए इस कौशल से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों और मूल्यवर्धन का अधिक से अधिक लाभ भी भारत को मिलना चाहिए।” इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निजी एवं संस्थागत निवेश की भूमिका का उल्लेख करते हुए श्रीमती शर्मा ने REITs और InvITs से जुड़े प्रावधानों को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में केवल सरकारी बजट ही नहीं, बल्कि निजी और सामान्य निवेशकों की भागीदारी भी आवश्यक है। विधेयक में Special Purpose Vehicle के नए टैक्स रिजीम में जाने की स्थिति में निर्दिष्ट डिविडेंड आय से संबंधित व्यवस्था को स्पष्ट और तर्कसंगत बनाने का प्रयास निवेशकों के लिए अधिक निश्चितता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि निवेशक के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज भरोसा और निश्चितता है। स्थिर नीतियां और स्पष्ट कर नियम भारत में दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करते हैं।
भारत की डिजिटल क्रांति और UPI की सफलता का उल्लेख करते हुए शर्मा ने कहा कि आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान तक डिजिटल भुगतान का व्यापक इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के साथ कानूनों का भी समय-समय पर आधुनिकीकरण आवश्यक है। विधेयक में Payment and Settlement Systems Act, 2007 से संबंधित प्रावधानों को अद्यतन करने का उद्देश्य डिजिटल भुगतान के लिए अधिक लचीला और भविष्य के अनुरूप कानूनी ढांचा तैयार करना है। उन्होंने कहा, “Digital India स्थिर नहीं रह सकता, इसलिए Digital India को समर्थन देने वाले कानून भी समय के साथ विकसित होने चाहिए।”
विपक्ष से पूछा—निवेश और रोजगार का विरोध क्यों?
अपने संबोधन के दौरान रेखा शर्मा ने विपक्ष से सवाल किया कि यदि भारत में निवेश नहीं आएगा तो नए रोजगार के अवसर कैसे पैदा होंगे, यदि विनिर्माण भारत में नहीं होगा तो हमारे युवाओं को रोजगार कहां से मिलेगा और यदि वैश्विक पूंजी दूसरे देशों एवं वित्तीय केंद्रों की ओर चली जाएगी तो उसका नुकसान किसे होगा?
उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। जब सरकार निवेश को आकर्षित करने, विनिर्माण को बढ़ावा देने और कर व्यवस्था को सरल बनाने के लिए कदम उठा रही है, तब सभी दलों को व्यापक राष्ट्रीय हित में इन सुधारों का मूल्यांकन करना चाहिए। शर्मा ने कहा कि इस विधेयक की भावना को तीन शब्दों में समझा जा सकता है Trust, Certainty and growth.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का दृष्टिकोण “Control First” से “Facilitate First” की ओर बढ़ा है। सरकार का उद्देश्य ईमानदार उद्यमी को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक विनिर्माण, निवेश, वित्त और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनना चाहता है। अपने संबोधन के समापन में शर्मा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप कानूनों और नीतियों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि देश को ऐसे कानून चाहिए जो सरल हों, निवेश को प्रोत्साहित करें, विनिर्माण को सक्षम बनाएं, तकनीकी बदलावों के अनुरूप हों और नागरिकों तथा सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि सुधार कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। रेखा शर्मा ने कहा कि Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 इसी निरंतर सुधार यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम है जटिलता से सरलता की ओर, अनिश्चितता से निश्चितता की ओर, नियंत्रण से विश्वास की ओर और भारत को केवल एक बाजार से वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में।
अंत में, रेखा शर्मा ने विधेयक का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया और कहा कि मजबूत आर्थिक सुधार, निवेश-अनुकूल वातावरण और रोजगार केंद्रित विकास ही विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने की मजबूत नींव हैं।

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