शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की
प्रतिनिधिमंडल ने SIT Probe के जरिए अमरजीत सिंह चावला मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 24 सितंबर | अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर SIT Investigation की मांग तेज हो गई है।
SAD (पुनर सुरजीत) ने CM भगवंत मान को मांग-पत्र सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की अपील की।
प्रतिनिधिमंडल ने महिला को भारत लाने, जेल में रहने और आनंदपुर साहिब पहुंचने की परिस्थितियों की जांच मांगी।
पार्टी ने कहा कि जांच से आरोपों और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आनी चाहिए।

SIT Probe की मांग को लेकर CM मान से मिले अकाली दल के नेता
शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज FIR और उसके बाद के घटनाक्रम की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की।
पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री को एक मांग-पत्र भी सौंपा। इसमें मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की गई। प्रतिनिधिमंडल ने जांच 15 दिनों के भीतर पूरी करने की मांग भी रखी। यह जानकारी 23 सितंबर को जारी किए गए पार्टी के बयान और संबंधित मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।
प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष करनैल सिंह पीर मोहम्मद, महासचिव दविंदर सिंह सोढ़ी और भूपिंदर सिंह शेखूपुर शामिल थे। इसके अलावा SGPC से जुड़े कुछ सदस्य भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे।
Amarjit Chawla Case में जांच के दायरे को बढ़ाने की मांग

Amarjit Chawla Case को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मामले की जांच केवल FIR तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पार्टी ने पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की भी पड़ताल करने की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, बहरीन से आई महिला को भारत किसने बुलाया और उसके यात्रा टिकटों की व्यवस्था किसने की, इसकी जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही महिला के भारत पहुंचने के बाद की घटनाओं को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है।
पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर 21 अगस्त को अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ FIR दर्ज की थी। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 64, 127(2) और 351(2) लगाई गई थीं। पुलिस जांच जारी होने की जानकारी सामने आई है। चावला ने आरोपों को निराधार बताया है।
SIT Investigation में 5 प्रमुख सवालों की जांच की मांग
SIT Investigation के लिए दिए गए मांग-पत्र में प्रतिनिधिमंडल ने कई बिंदुओं को जांच में शामिल करने की मांग की है। इनमें महिला के बहरीन से भारत आने से लेकर श्री आनंदपुर साहिब में ठहरने तक की परिस्थितियां शामिल हैं।
पार्टी ने यह भी पूछा कि नई दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद महिला को कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर नाभा जेल भेजे जाने की परिस्थितियां क्या थीं। प्रतिनिधिमंडल ने जेल में कथित VIP सुविधाओं और वहां कुछ लोगों से संभावित मुलाकात की भी जांच की मांग की है।
इसके अलावा महिला को जेल से रिहाई के बाद श्री आनंदपुर साहिब स्थित ‘भाई बचित्तर सिंह निवास’ तक कौन लेकर गया, वाहन किसका था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे, इसकी पड़ताल की मांग की गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने लगभग आठ महीनों के दौरान महिला के संपर्क में आए लोगों और SGPC की निगरानी में उसके रहने की परिस्थितियों की जांच की मांग भी रखी है।
Punjab Politics में मामले को लेकर बढ़ी हलचल

Punjab Politics में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब से जुड़े इस घटनाक्रम के कारण धार्मिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पार्टी ने मांग की कि जांच के दौरान तख्त श्री केसगढ़ साहिब के प्रबंधक से लेकर ड्यूटी पर तैनात सेवादारों तक संबंधित लोगों से पूछताछ की जाए। इसके साथ ही FIR दर्ज होने के बाद चावला के विदेश जाने से जुड़े घटनाक्रम की भी जांच करने की मांग की गई है।
मामले में 20 सितंबर को श्री अकाल तख्त साहिब की बैठक के बाद अमरजीत सिंह चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह के खिलाफ भी फैसला सामने आया था।
SIT Probe से पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ होने की उम्मीद
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मामले में वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारी के नेतृत्व में SIT Probe गठित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जांच के जरिए आरोपों, संबंधित लोगों की भूमिका और घटनाक्रम की परिस्थितियों की पूरी तस्वीर सामने आनी चाहिए।
वहीं, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पुलिस की जांच अभी जारी है। इसलिए आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अब मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से SIT गठित करने को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर रहेगी। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि निष्पक्ष जांच के जरिए मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
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