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HPMA द्वारा “हरियाणा में फार्मा उद्योग के अवसर और विकास” पर सेमिनार का आयोजन

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करनाल : हरियाणा फ़ार्मास्युटिकल मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन (HPMA) द्वारा 11 जनवरी 2026 को होटल द विवान, एनएच-44, करनाल में “हरियाणा में फार्मास्युटिकल उद्योग के अवसर और विकास” विषय पर एक सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हरियाणा के विभिन्न जिलों से आए 125 से अधिक औषधि निर्माताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत HPMA के अध्यक्ष आर.एल. शर्मा द्वारा स्वागत भाषण से हुई। HPMA के महासचिव विकास परूथी ने पिछले दो वर्षों में एसोसिएशन की उपलब्धियों को साझा किया और आगामी लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उद्योग की प्रमुख समस्याओं को रेखांकित करते हुए सरकार और नियामक अधिकारियों के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखीं।

मुख्य मांगें इस प्रकार रहीं….

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1. MSME इकाइयों के लिए संशोधित शेड्यूल-एम के क्रियान्वयन में कम से कम 2 वर्ष का विस्तार।
2. GMP और GLP प्रमाण पत्रों का निर्गमन भी अन्य टेंडर संबंधित प्रमाण पत्रों की भांति ज़ोनल कार्यालय से किया जाए।
3. करनाल फार्मा पार्क की शीघ्र स्थापना ताकि निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिले।
4. सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों को उन्नयन और अनुपालन हेतु तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया जाए।
5. जब तक ONDLS पोर्टल पूर्णतः कार्यशील न हो, तब तक हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन + ऑफलाइन) को जारी रखा जाए।

मुख्य अतिथि विधायक करनाल जगमोहन आनंद ने HPMA के प्रयासों की सराहना की और पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वे इन सभी मांगों को राज्य सरकार के समक्ष रखेंगे और संशोधित शेड्यूल-एम में विस्तार की मांग को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुँचाएंगे। साथ ही, फार्मा पार्क की मांग को भी गंभीरता से उठाने का भरोसा दिया। ललित गोयल, राज्य औषधि नियंत्रक, हरियाणा ने संशोधित शेड्यूल-एम के दिशा-निर्देशों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने पर बल दिया।

डॉ. अजय सचान, उप औषधि नियंत्रक (भारत) ने निर्यात की संभावनाओं और नियामक समन्वय पर अपने विचार साझा किए। 

रिपन मेहता, उप राज्य औषधि नियंत्रक ने नियामकों और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का समापन HPMA के कार्यकारी सदस्य राजीव गर्ग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह सेमिनार उद्योग और नियामकों के बीच संवाद का एक सशक्त मंच बना और HPMA की राज्य में फार्मा उद्योग के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट किया।

 

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