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AIH समेत PG के 42 सब्जेक्ट में सीट्स खाली, 31 तक हो सकेंगे डायरेक्ट एडमिशन

31 तक हो सकते हैं परास्नातक के 42 विषयों में डायरेक्ट ऐडमिशन

किचन कैबिनेट के मलाईदार पद पाने को घूमते रहते हैं प्रोफ़ेसर्स 

न्यूज़म ब्यूरो

लखनऊ, 29 अगस्त। सीनियर प्रोफेसरों के क्लास में ना झांकने से लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थिति इस कदर गड़बड़ाई है कि अब परास्नातक के 42 विषयों में एडमिशन का टोटा पड़ गया है। हाल यह है कि एडमिशन इंचार्ज अनित्य गौरव ने इन 42 विषयों के लिए डायरेक्ट एडमिशन की पेशकश की है कि कुछ बच्चे आ जाए तो यह कोर्स बंद न करना पड़े। मजेदार बात यह है कि योग के तो स्नातक कक्षाओं में भी छात्रों का टोटा पड़ गया है, ऐसे में योगा के लिए भी छात्रों से पेशकश की जा रही है।

लखनऊ विश्वविद्यालय में सीनियर प्रोफेसर क्लास लेने में अपनी तौहीन समझते हैं, वे कुलपति कार्यालय के आसपास इसलिए चक्कर लगाते हैं कि उन्हें भी किचन कैबिनेट का कोई मलाईदार पद हो या कोई डायरेक्टर, निर्माण अधीक्षक, मानद लाइब्रेरियन, एडमिशन कोऑर्डिनेटर, डीएसडब्लू, कॉपियों के मूल्यांकन, परीक्षा के कंडक्ट, प्रॉक्टरी, प्रोवोस्टी, एचआरडीसी, विधिक सलाहकार, आईक्यूएसी, आईपीपीआर डायरेक्टर आदि का कोई पद मिल जाए तो खर्चा चलता रहे, इसके अलावा इन सीनियर प्रोफेसर के पास में सरकार के कई स्पांसर प्रोजेक्ट रहते हैं, जिसमें लाखों रुपए की कंटीन्जेंसी की व्यवस्था होती है।

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उस पैसे से ही सुबह के चाय से लेकर रात के खाने तक का सारा इंतजाम होता है। ऐसे में वे बायोमेट्रिक लगाने के बाद दिनभर यहां-वहां जुगाड़ में लगे रहते हैं और उनकी कक्षाओं को पढ़ाने के लिए पीएचडी स्कॉलर को तैनात कर दिया जाता है। कई जगहों पर इन पीएचडी स्कॉलर की तैनाती कागजों पर होती है और कुछ बार यह ऑफ द रिकॉर्ड रहता है। अब ऐसे में छात्र तगड़ी फीस देकर और तमाम जुगाड़ के बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी में अपना भविष्य संवारने जब पहुंचता है, तो पता चलता है कि उसे पढ़ाने वाला तो उसके साथ का ही कोई लड़का है, और उसकी भी निगाह उसके जैसी है, ऐसे में वह कक्षा में पढ़ने से ही उदासीन हो जाता है। धीरे-धीरे यह कुप्रचार अब जोर पकड़ चुका है कि यहां के मास्टर पढ़ाते कम है, नुक्ताचीनी और खुरपेंच ज्यादा करते हैं।

अगर इस बात की शिकायत कोई छात्र करता है तो सारे मास्टर एकजुट होकर उस छात्र को सबक सिखाने के लिए कुछ भी एक्शन लेने पर आमादा हो जाते हैं। ऐसे में हाल यह है कि कई सारे सेल्फ फाइनेंस और बहुत सारे रेगुलर परास्नातक के कोर्स में सीट्स भर नहीं पा रही है। योग विभाग के इंचार्ज अमरजीत यादव दिनभर अखबार के दफ्तर में अपनी फोटो और खबर छपवाने के लिए सिर्फ घूमते रहते हैं। खुद अनित्य गौरव प्राचीन भारतीय इतिहास के मास्टर हैं, उनकी पत्नी भी इस विभाग में नवनियुक्त मास्टर बनी है। उनकी नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में डॉ अनिल कुमार यादव ने चैलेंज भी कर रखा है।

बहरहाल उनके डिपार्टमेंट में भी काफी सीट्स खाली है, क्योंकि खुद उनके पास एक दर्जन के करीब काम है, ऐसे में माना जा सकता है कि भला वह कैसे क्लास लेते होंगे? कुछ बार यह क्लास कागजों पर तो लोग ले लेते हैं, लेकिन सच्चाई क्या है यह तो सभी लोग बखूबी जानते ही हैं। उसी का नतीजा है कि परास्नातक के 42 विषयों में छात्र ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।

 

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