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कहा, अकाली दल की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल इस मुददे पर उपराष्ट्रपति से मुलाकात करेगा
कहा, पंजाबी कभी भी यूनिवर्सिटी का केंद्रीयकरण नही होने देंगें
अकाली दल चंडीगढ़ को स्थायी केंद्र शासित प्रदेश बनाने के प्रयासों को नाकाम करने के लिए प्रतिबद्ध
चंडीगढ़/15नवंबर। शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज सभी राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों से पंजाब विश्वविद्यालय के मुददे पर पार्टी लाइन से उपर उठकर समर्थन देने का आहवाहन किया है।
पंजाब यूनिवर्सिटी के आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि यह कड़ा संदेश देना समय की मांग है कि पंजाबी इस यूनिवर्सिटी को किसी भी हाल में छीनने नही देंगें। उन्होने कहा कि उन्हें किसी भी प्रयास का श्रेय नही चाहते, लेकिन पंजाबियों को पंजाब विश्वविद्यालय को राज्य से छीनने के ऐसे किसी भी कदम का विरोध करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।
सरदार बादल ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी राज्य का प्रतीक है और यह उनके लिए भावनात्मक मुददा है। उन्होने कहा कि उन्होने चार साल तक इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है और उन्हें इसे केंद्रीयकृत करने के किसी भी कदम का विरोध करने के लिए एक सांझा मंच पर एक साथ आना चाहिए। उन्होने कहा कि पंजाब के किसी प्रतिष्ठित संस्थान पर कब्जा करने का यह पहला प्रयास है और इसके बाद चंडीगढ़ का स्वरूप बदलने की कोशिश की जा रही हैं।
अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें पता चला है कि चंडीगढ़ के लिए एक अलग भर्ती नीति तैयार की जा रही है। उन्होने कहा कि 1966 में जब राज्य का पुनर्गठन किया गया था, तो पंजाब और हरियाणा से 60ः40 के अनुपात में अधिकारियों की तैनाती का फैसला लिया गया था। अब अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तर्ज पर चंडीगढ़ के लिए एक अलग कैडर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
सरदार बादल ने कहा कि शिरोमणी अकाली दल की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उपराष्ट्रपति से मिलकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करेगा। उन्होने कहा कि पार्टी पंजाब यूनिवर्सिटी के स्वरूप को बदलने के किसी भी कदम का विरोध करने में अपनी भूमिका निभाने और इस संबंध में इस अभियान की अगुवाई करने के लिए तैयार है।
इससे पहले अकाली दल अध्यक्ष को यूनिवर्सिटी के छात्रों ने इस मुददे पर नवीनतम घटनाक्रम से अवगत कराया। छात्रों ने बताया कि कुलपति न उन्हें सूचित किया है कि उन्होने सीनेट चुनाव दोबारा शुरू करने के लिए संबंधित अधिकारियों को एक प्रस्ताव भेजा है और उसकी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार कुछ ही घंटों में दो नोटिफिकेशन जारी कर सकती है तो वाइस चांसलर के प्रस्ताव को बिना देरी के मंजूरी क्यों नही दी जा सकती।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि वह यहां एक राजनीतिक व्यक्ति के तौर पर नही आए बल्कि इस विश्वविद्यालय से उनका भावनात्मक लगाव है, जिससे पंजाब के करीब 200 काॅलेज संबद्ध हैं। उन्होने कहा कि यूनिवर्सिटी के मौजूदा स्वरूप को बनाए रखने के लिए वह हर संभव कोशिश करेंगें।
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