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अविभाजित पंजाब के वरिष्ठतम पूर्व विधायक सही राम बिश्नोई हुए सम्मानित

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न्यूज़म ब्यूरो 

चंडीगढ़, 31 जनवरी 2026। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ने आज अपने सबसे वरिष्ठ जीवित पूर्व छात्र और अविभाजित पंजाब के सबसे वरिष्ठ जीवित पूर्व विधायक, 104 वर्षीय सही राम बिश्नोई को गांव सकताखेड़ा, डबवाली के निकट, उनके निवास पर जाकर सम्मानित किया। विश्वविद्यालय ने उन्हें 'साइटेशन ऑफ ऑनर' प्रदान किया।

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पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल ने बिश्नोई के निवास पर पहुंचकर उन्हें शाल ओढ़ाकर, सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किए। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. वाई. पी. वर्मा और डीन, एलुमनाई रिलेशंस, प्रो. लतिका शर्मा ने किया। उनके साथ प्रो. दिनेश बिश्नोई, सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. अर्चना चौहान और डॉ. जयदेव बिश्नोई भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. रेनू विग ने वीडियो कॉल के माध्यम से सही राम बिश्नोई से संवाद भी किया। बिश्नोई ने विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह ईश्वर की कृपा है कि वे इतनी लंबी आयु तक जीवित रहे और यह सम्मान प्राप्त कर सके। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या विश्वविद्यालय से उनकी आयु वर्ग के अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं।

कुलपति प्रो. रेनू विग ने कहा कि सही राम बिश्नोई का सम्मान किया जाना पंजाब यूनिवर्सिटी की लाहौर से चंडीगढ़ तक की यात्रा और उन मूल्यों की याद दिलाता है, जिन्हें विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते आए हैं। उन्होंने कहा कि सही राम बिश्नोई विश्वविद्यालय की परंपरा, सेवा भावना और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत सही राम बिश्नोई के परिवारजनों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने किया। बिश्नोई ने पूरे संवाद के दौरान प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में हिस्सा लिया।

जनवरी 1922 में जन्मे सही राम बिश्नोई ने अविभाजित पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर से कानून की पढ़ाई शुरू की थी। विभाजन के बाद उन्होंने ईस्ट पंजाब यूनिवर्सिटी, सोलन से अपनी डिग्री पूरी की, जो आगे चलकर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ बनी। उनका छात्र जीवन विश्वविद्यालय के इतिहास के सबसे परिवर्तनकारी दौर से जुड़ा रहा।

भारत विभाजन के दौरान बिश्नोई का परिवार बहावलपुर से विस्थापित होकर वर्तमान हरियाणा के सकताखेड़ा गांव में आकर बस गया। इसके बाद उन्होंने सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई और एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान बनाई।

सार्वजनिक सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण वर्ष 1957 में वे विधायक चुने गए, जिससे वे आज अविभाजित पंजाब के सबसे वरिष्ठ जीवित पूर्व विधायक बने।

सम्मान पत्र में विश्वविद्यालय ने शिक्षा, पुनर्वास और समाज सेवा के प्रति सही राम बिश्नोई के आजीवन समर्पण को रेखांकित किया।

रजिस्ट्रार प्रो. वाई. पी. वर्मा ने कहा कि सही राम बिश्नोई का जीवन संघर्ष, नैतिकता और सेवा भावना का उदाहरण है, जो पंजाब यूनिवर्सिटी के मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि उन्नत आयु में भी उनकी सादगी, बौद्धिक सजगता और शिक्षा में आस्था युवाओं के लिए प्रेरणा है।

विश्वविद्यालय द्वारा यह भी सूचित किया गया है कि सही राम बिश्नोई को पंजाब यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन की मानद सदस्यता प्रदान की जाएगी। 

डीन, एलुमनाई रिलेशंस, प्रो. लतिका शर्मा ने कहा कि बिश्नोई का सरल जीवन, निस्वार्थ सेवा, त्याग और सामाजिक चेतना आने वाली पीढ़ियों को साथ रहने और एक-दूसरे के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि बिश्नोई जीवन में संतुलन बनाए रखने, आत्म अनुशासन और व्यापक जनहित में कार्य करने में विश्वास रखते हैं।

इस अवसर पर सही राम बिश्नोई के परिवार के सदस्य, गांव के गणमान्य नागरिकों के अलावा हिसार से अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के उपाध्यक्ष सुभाष कुमार देहडू, सरदार जगरूप सिंह, देशकमल सीगड़, राजेश कुमार धारणिया, रघुवीर धारणिया, उमेद कुमार धारणिया, पूर्व सरपंच यादविंद्र, पूर्ण धनेरवा, संदीप कुमार रोहज, सुशील कुमार धायल, सुधीर कुमार धारणिया, रवि कुमार रोहज और शेषकरण धारणिया उपस्थित रहे। डबवाली बार एसोसिएशन से एडवोकेट राजीव स्वामी भी मौजूद थे।

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