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एसजीएसटी संग्रह की विकास दर मामले में देश के सभी राज्यों में हरियाणा रहा अव्वल

इस बार राज्य की विकास दर रही  22 प्रतिशत

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़ , 2 जून। हरियाणा ने मई 2026 के महीने में “राज्य माल और सेवा कर” (एसजीएसटी) संग्रह की विकास दर के मामले में देश के सभी राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है। मई 2025 की तुलना में इस बार राज्य ने 22 प्रतिशत की शानदार विकास दर दर्ज की है, जबकि इस अवधि के दौरान एसजीएसटी संग्रह में राष्ट्रीय औसत विकास दर महज 6 प्रतिशत रही।

इस सूची में हरियाणा के बाद मेघालय 19 प्रतिशत के साथ दूसरे, कर्नाटक 17 प्रतिशत के साथ तीसरे और गुजरात 16 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर रहा।

आबकारी एवं कराधान विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि मई के महीने में हरियाणा का शुद्ध राज्य जीएसटी (निपटान के बाद) संग्रह 4,456 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के इसी महीने के संग्रह (3,649 करोड़ रुपये) से 807 करोड़ रुपये अधिक है।

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इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में भी हरियाणा सभी राज्यों के बीच एसजीएसटी राजस्व की संचयी विकास दर (क्युमुलेटिव ग्रोथ रेट) में शीर्ष पर है। राज्य ने पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों के दौरान राज्य जीएसटी राजस्व की औसत राष्ट्रीय वृद्धि 23 प्रतिशत रही।

यह पहली बार नहीं है जब राज्य ने ऐसा प्रदर्शन किया हो; हरियाणा लगातार एसजीएसटी राजस्व में उच्च विकास दर दर्ज कर रहा है। इससे पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी हरियाणा ने राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत के मुकाबले 22 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ देश में सबसे अधिक ग्रोथ रेट दर्ज की थी।

राज्य के जीएसटी राजस्व में इस लगातार उच्च वृद्धि का श्रेय प्रदेश की बढ़ती अर्थव्यवस्था और कुशल कर-प्रशासन को दिया जा रहा है। विभाग द्वारा डेटा एनालिटिक्स पर आधारित प्रवर्तन (इन्फोर्समेंट), फर्जी करदाताओं के खिलाफ गहन अभियान, अनुपालन (कम्प्लायंस) में सुधार और राजस्व रिसाव को रोकने के लिए लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

इसके साथ ही, कर-प्रशासन को अधिक व्यापार-अनुकूल बनाने और करदाताओं की सुविधा के लिए भी विभाग प्रयासरत है। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में की गई घोषणा के अनुपालन में, विभाग ने अब करदाताओं की सहूलियत के लिए पोर्टल पर उपलब्ध कराने के साथ-साथ कारण बताओ नोटिस (शो कॉज नोटिस) और संक्षिप्त आदेशों को पंजीकृत/स्पीड पोस्ट के माध्यम से भी भेजना शुरू कर दिया है।

 

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