हरियाणा के Rural Libraries अभियान ने ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा और सरकारी सेवा की तैयारी के नए अवसर खोले हैं
शत्रुजीत कपूर ने कहा कि ग्रामीण पुस्तकालय ज्ञान की रोशनी फैलाने के साथ युवाओं को आगे बढ़ने का मंच दे रहे हैं
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 11 सितंबर | हरियाणा में Rural Libraries अभियान ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी सेवाओं की तैयारी का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। शत्रुजीत कपूर ने पुस्तकालयों को गांवों और चौपालों तक पहुंचाने की योजना बताई। उन्होंने डिजिटल पुस्तकालयों के विस्तार और ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास पर भी जोर दिया।

Rural Libraries अभियान से बदली तस्वीर
हिंदी माह के अवसर पर चंडीगढ़ में ग्रामीण पुस्तकालयों को लेकर विशेष विमर्श आयोजित किया गया।
एमसीएम कॉलेज चंडीगढ़ के प्रेक्षागृह में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।
इसमें 100 से अधिक ग्रामीण पुस्तकालयों के प्रभारी शामिल हुए।
पुलिस महानिदेशक आईटीबीपी शत्रुजीत कपूर ने पुस्तकालयों की भूमिका पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि यह अभियान ग्रामीण युवाओं के लिए नई राह खोल रहा है।
इस अभियान की शुरुआत 22 अक्टूबर 2020 को करनाल के काछवा गांव से हुई थी।
कपूर ने कहा कि पुस्तकालय युवाओं को ज्ञान और अवसर से जोड़ते हैं।
उनके अनुसार पुस्तकालय भारतीय भाषाओं के साथ विश्व भाषाओं का भी मंच है।
यह युवाओं में व्यापक सोच और अध्ययन की आदत विकसित करने में मदद करता है।
Rural Libraries में पढ़कर सरकारी सेवा तक पहुंचे युवा
शत्रुजीत कपूर ने ग्रामीण पुस्तकालयों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि यहां अध्ययन करने वाले कई युवा सरकारी सेवाओं में चयनित हुए हैं।
उन्होंने इसे हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कपूर ने कहा कि ऐसे प्रयासों से युवाओं में आगे बढ़ने का विश्वास पैदा हुआ है।
उन्होंने बिना पर्ची और बिना खर्ची की व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
उनके अनुसार पुस्तकालयों ने ग्रामीण युवाओं को तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया है।
इससे छोटे गांवों के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिली है।
Digital Library को गांवों तक पहुंचाने की तैयारी
शत्रुजीत कपूर ने डिजिटल पुस्तकालयों के विस्तार की योजना भी साझा की।
उन्होंने कहा कि संस्थाओं के सहयोग से यह अभियान आगे बढ़ाया जाएगा।
लक्ष्य हरियाणा के गांवों और चौपालों तक डिजिटल अध्ययन सुविधाएं पहुंचाना है।
इसके साथ ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।
कपूर ने कहा कि युवाओं के लिए नए अवसर तलाशने की जरूरत है।
इसके लिए अलग-अलग संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
‘रोशनी की नई राह’ पर हुआ विमर्श

कार्यक्रम में शत्रुजीत कपूर की पुस्तक ‘रोशनी की नई राह’ पर भी चर्चा हुई।
यह पुस्तक बिजली कंपनियों के कायाकल्प की यात्रा पर आधारित है।
लेखकों और विशेषज्ञों ने पुस्तक को हिंदी साहित्य में नए विषय की शुरुआत बताया।
यह पुस्तक वर्ष 2026 में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है।
इससे पहले पुस्तक का अंग्रेजी संस्करण भी प्रकाशित हो चुका है।
उसका प्रकाशन दो वर्ष पहले विजडम ट्री द्वारा किया गया था।
Hindi Literature में नए विषयों पर चर्चा
कार्यक्रम में हिंदी साहित्य से जुड़े कई शिक्षाविद और लेखक मौजूद रहे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर सुधा सिंह शामिल हुईं।
बीएचयू के हिंदी विभाग से प्रोफेसर कृष्ण मोहन ने भी हिस्सा लिया।
पंजाब विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से डॉ. गुरमीत कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
प्रख्यात लेखिका शिल्पी और चंडीगढ़ के विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थी भी मौजूद थे।
शिक्षकों ने ग्रामीण पुस्तकालयों की भूमिका और हिंदी पुस्तकों के विस्तार पर विचार रखे।
विमर्श में शिक्षा, पुस्तकालय और युवा विकास को आपस में जोड़ने पर जोर रहा।
आयोजकों के अनुसार ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में अध्ययन संस्कृति को मजबूत कर सकते हैं।
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