राहुल गुप्ता
मुंबई, 4 अक्टूबर। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला। मोर्चे के दौरान राज ठाकरे ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की।
‘6 महीने में 40 लाख मतदाता कैसे बढ़ गए?’
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच करीब 6 महीने में मतदाताओं की संख्या में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे हुई। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में करीब 40 लाख मतदाता बढ़े।
राज ठाकरे ने कहा कि देश में सत्ता में कौन बैठेगा, इसका फैसला जनता को करना चाहिए, चुनाव आयोग को नहीं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसते हुए भी टिप्पणी की।
मनसे प्रमुख ने दावा किया कि वह 2018-19 से ही चुनाव प्रक्रिया और कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने विपक्षी नेताओं से चुनाव बहिष्कार की अपील की थी।
SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव की मांग
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में अब तक की गई SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग रखी। उनकी दूसरी प्रमुख मांग भविष्य में चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से कराने की रही। यह मांग उन्होंने मुंबई में आयोजित संयुक्त विपक्षी मार्च के दौरान रखी।
राज ठाकरे ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है और चुनाव में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उद्योगपतियों और केंद्र सरकार पर भी निशाना
राज ठाकरे ने अपने भाषण में केंद्र सरकार और बड़े उद्योगपतियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जंगल, एयरपोर्ट और पोर्ट जैसी संपत्तियां एक ही उद्योगपति को दी जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनका विरोध उद्योगपतियों के खिलाफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी कई उद्योगपति आगे बढ़े, लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल में एक ही उद्योगपति को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है।
‘मोर्चे निकालने के बाद भी सरकार का रवैया नहीं बदलता’
मनसे प्रमुख ने सरकार पर जनता की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि लोग कितने भी मोर्चे निकालें या विरोध प्रदर्शन करें, सरकार का रवैया नहीं बदलता।
राज ठाकरे ने पेट्रोल की कीमतों से लेकर अमेरिका के साथ भारत के संबंधों तक कई मुद्दों पर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। वहीं, चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित इस मार्च में शिवसेना (UBT), MNS के साथ कांग्रेस और शरद पवार गुट की NCP के नेता भी शामिल हुए। मोर्चे में पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर आने की अपील की गई थी।
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