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पु. ल. देशपांडे के पत्रों का होगा पुस्तक रूप में प्रकाशन

प्रकाशन के लिए 10 लाख रुपये तक की प्रशासनिक मंजूरी

रीमा सिंह

मुंबई, 22 सितंबर।

महाराष्ट्र के प्रसिद्ध साहित्यकार पु. ल. देशपांडे के संग्रहित पत्रों को पुस्तक रूप में प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है। सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशिष शेलार की पहल के बाद सांस्कृतिक कार्य विभाग ने इस संबंध में प्रशासनिक मंजूरी दी है। पुस्तक के प्रकाशन के लिए होने वाले खर्च को 10 लाख रुपये तक सीमित रखा गया है।

पत्रों के संपादन और प्रकाशन को मंजूरी

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विभाग के निर्णय के अनुसार, पु. ल. देशपांडे के उपलब्ध और संरक्षित पत्रों का संकलन, संपादन और पुस्तक रूप में प्रकाशन किया जाएगा। इस निर्णय से उनके पत्र संग्रह को व्यवस्थित रूप से प्रकाशित करने की प्रक्रिया को प्रशासनिक आधार मिला है।

विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों से पत्राचार

पु. ल. देशपांडे ने साहित्य, संगीत, नाटक, फिल्म और वक्तृत्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम किया था। उनके पत्राचार में भारतरत्न लता मंगेशकर, भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी, कुमार गंधर्व, पंडित रविशंकर, ग. दि. माडगूळकर, वि. वा. करंदीकर, जयवंत दळवी, विजय मर्चंट, बाबा आमटे, स्वामी विज्ञानानंद, पांडुरंगशास्त्री आठवले और दया पवार सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों के पत्र शामिल हैं।

सुनीताबाई ने सुरक्षित रखे थे पत्र

पु. ल. देशपांडे की पत्नी सुनीताबाई ने कई मान्यवरों से प्राप्त पत्रों को सुरक्षित रखा था। इसके अलावा पु. ल. देशपांडे द्वारा विभिन्न व्यक्तियों को लिखे गए पत्रों की प्रतियां भी सुनीताबाई और परिवार के संग्रह में उपलब्ध हैं। इन पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने का प्रस्ताव सांस्कृतिक कार्य विभाग के विचाराधीन था।

शोधकर्ताओं और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री

प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अब पत्रों के संपादन और प्रकाशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पत्रों के माध्यम से पु. ल. देशपांडे के समकालीन साहित्यकारों, कलाकारों और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों के साथ उनके संवाद से संबंधित सामग्री सामने आएगी। यह संग्रह उनके साहित्यिक कार्य के साथ-साथ उस दौर के साहित्यिक और सांस्कृतिक परिवेश से संबंधित दस्तावेजी सामग्री के संरक्षण में उपयोगी होगा।

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