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आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद खत्म हुआ विरोध, निदेशक ने 18 सूत्रीय मांगों पर किए हस्ताक्षर

तीन दिन से जारी छात्र आंदोलन रविवार देर रात समाप्त हुआ, करीब तीन घंटे की बैठक के बाद संस्थान प्रशासन ने मांगों को आगे बढ़ाने पर जताई सहमति

राहुल गुप्ता
मुंबई, 21 सितंबर।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोड़े की आत्महत्या के बाद पिछले तीन दिनों से जारी छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार देर रात समाप्त हो गया। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने प्रदर्शनकारी छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताते हुए मांग पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए।

छात्रों और संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच करीब तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद यह समझौता हुआ। छात्रों ने शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई बदलावों की मांग की है।

क्या है साहिल वाकोड़े की मौत का मामला?

यह मामला एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत से जुड़ा है। 18 सितंबर की शाम साहिल अपने छात्रावास के कमरे में मृत मिले थे।

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इससे पहले मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान निरीक्षक प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने साहिल को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा था। संस्थान के अनुसार, परीक्षा के दौरान साहिल ने प्रश्नपत्र के उत्तर खोजने के लिए उसे चैटजीपीटी पर अपलोड किया था।

छात्र को अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी देने का आरोप

साहिल के साथी छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान पकड़े जाने के बाद उन्हें परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कहा गया था। छात्रों का यह भी आरोप है कि साहिल को निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी गई थी।

हालांकि, आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। संस्थान के अनुसार, संकाय सदस्य और विभागाध्यक्ष ने साहिल से बात की थी और उन्हें आश्वासन दिया था कि इस घटना का उनके करियर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

परिजनों की शिकायत पर दर्ज हुई प्राथमिकी

साहिल की मौत के बाद शनिवार सुबह 200 से अधिक छात्रों ने संस्थान के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन किया और मामले में न्याय की मांग की। इसके बाद साहिल के माता-पिता भी संस्थान पहुंचे और प्रशासन से बेटे की मौत को लेकर जवाब मांगा।

परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की।

छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों में क्या-क्या शामिल?

छात्रों की मांगों में साहिल की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच कराने और उसकी अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर तथा अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक सौंपने की मांग शामिल है।

इसके अलावा छात्रों ने साहिल को सार्वजनिक रूप से बदनाम किए जाने को लेकर संस्थान प्रशासन से लिखित माफी मांगने और फैकल्टी तथा कर्मचारियों के लिए सख्त आचार संहिता लागू करने की मांग की है।

निदेशक के इस्तीफे की मांग भी शामिल

मांग पत्र में कहा गया है कि प्रस्तावित सुधारों को एक महीने के भीतर लागू नहीं किए जाने की स्थिति में निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

छात्रों ने संस्थान के अस्पताल में 24 घंटे ऑन-कॉल मनोचिकित्सक उपलब्ध कराने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने और सभी मांगों को लागू करने के लिए 26 सितंबर तक लिखित समयसीमा एवं कार्ययोजना देने की मांग भी रखी है।

छात्रों की मदद के लिए विशेष कार्यबल बनाने की मांग

छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की पहचान और निवारक उपायों की सिफारिश के लिए एक विशेष कार्यबल बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। इसमें छात्र, संकाय सदस्य, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है।

आरोपी प्रोफेसर पर कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के बाद

18 सूत्रीय मांग पत्र पर हस्ताक्षर करने के बावजूद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का फैसला तय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर निदेशक के इस्तीफे से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, लेकिन उनके इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं, फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का समर्थन करते हुए कहा है कि वह संस्थान के नियमों के तहत अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।

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