जैन राष्ट्रसंत मुनि निलेशचंद्र महाराज ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात कर 51 कबूतरखाने दोबारा शुरू करने की मांग की, स्वास्थ्य कारणों से बीएमसी की पाबंदी का स्थानीय नागरिकों ने किया समर्थन
राहुल गुप्ता
मुंबई, 21 सितंबर।
मुंबई में कबूतरखानों को दोबारा शुरू करने को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। जैन राष्ट्रसंत मुनि निलेशचंद्र महाराज ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात कर बंद पड़े कबूतरखानों को तत्काल शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मुंबई के कबूतरखाने जल्द नहीं खोले गए तो जैन समाज आंदोलन और आमरण अनशन करेगा।
मुनि निलेशचंद्र महाराज ने विधानसभा अध्यक्ष को करीब आठ महीने पहले आजाद मैदान में हुए आंदोलन के दौरान दिए गए आश्वासन की याद दिलाई। उनके मुताबिक, उस समय कबूतरों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक मुंबई के कबूतरखाने बंद हैं।
मुंबई के 51 कबूतरखाने अब भी बंद
मुंबई में कबूतरों को दाना डालने के लिए बनाए गए कबूतरखाने अभी भी बंद हैं। जैन समाज का कहना है कि इन जगहों के बंद होने से पक्षियों के दाने-पानी का संकट पैदा हो गया है।
मुनि निलेशचंद्र महाराज ने कहा कि कबूतरखानों को तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
स्वास्थ्य कारणों से बीएमसी ने लगाई थी पाबंदी
कबूतरों के पंख और बीट से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए बीएमसी ने दादर सहित मुंबई के कबूतरखानों में दाना डालने पर रोक लगाई थी।
पब्लिक हेल्थ और सांस से जुड़ी बीमारियों, जिसमें हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस जैसी समस्या भी शामिल है, के जोखिम को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट और महाराष्ट्र सरकार के निर्देशों के बाद मुंबई के 51 कबूतरखाने बंद किए गए थे।
स्थानीय नागरिकों के एक वर्ग ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस प्रतिबंध का समर्थन किया है, जबकि जैन समाज लगातार कबूतरखानों को फिर से शुरू करने की मांग कर रहा है।
धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बता रहा जैन समाज
जैन मुनि निलेशचंद्र महाराज ने कबूतरखाने बंद करने के फैसले को धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि पक्षियों को दाना खिलाना जैन समाज की जीव दया और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
जैन समाज और पक्षी प्रेमियों की ओर से कबूतरखाने बंद करने तथा दाना डालने वालों के खिलाफ बीएमसी की ओर से एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई का विरोध किया जाता रहा है।
अब विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद एक बार फिर कबूतरखाने खोलने की मांग तेज हो गई है। जैन समाज ने स्पष्ट किया है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और आमरण अनशन का रास्ता अपनाया जाएगा।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।
