मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने चंडीगढ़ हेरिटेज संरक्षण समिति की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 7 अगस्त। चंडीगढ़ हेरिटेज संरक्षण समिति (सीएचसीसी) की 27वीं बैठक आज यू.टी. चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में चंडीगढ़ की स्थापत्य विरासत के संरक्षण तथा यूनेस्को विश्व धरोहर मूल्यों के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़; वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा; पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह; नगर निगम आयुक्त अमित कुमार; उपायुक्त निशांत कुमार यादव; मुख्य अभियंता सी.बी. ओझा; मुख्य वास्तुकार राजीव मेहता; उप-हेरिटेज समिति के सदस्य; चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर की प्राचार्य डॉ. संगीता बग्गा मेहता; इंजीनियरिंग विभाग के परामर्शदाता तथा चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के प्रारंभ में मुख्य वास्तुकार राजीव मेहता ने 20 जनवरी 2026 को आयोजित 26वीं बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्रवाई से समिति को अवगत कराया। इसके पश्चात पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की गई।
समिति ने भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत सेक्टर-19 स्थित ले कॉर्बुज़िए सेंटर में डिजिटल संग्रहालय स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार किया। पर्यटन विभाग द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) प्रस्तुत करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य भवन की विरासत विशेषताओं को संरक्षित रखते हुए न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ विश्वस्तरीय डिजिटल संग्रहालय विकसित करना है। उन्होंने परियोजना के ऐतिहासिक महत्व, पर्यटन संभावनाओं, प्रस्तावित लेआउट, लागत, अपेक्षित परिणाम तथा राजस्व संभावनाओं की जानकारी दी और बताया कि उप-हेरिटेज समिति द्वारा सुझाए गए सभी सुरक्षा उपाय प्रस्ताव में शामिल किए गए हैं।

उप-हेरिटेज समिति के सदस्यों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के सुझावों पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अध्यक्ष ने सेक्टर-19 स्थित ले कॉर्बुज़िए सेंटर में डिजिटल संग्रहालय स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी।
इसके बाद समिति ने यूनेस्को विश्व धरोहर कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बफर ज़ोन में स्थित सेक्टर-2, 3, 4 एवं 5 के संशोधित ज़ोनिंग प्लान पर विचार किया। शहरी नियोजन विभाग की वरिष्ठ नगर योजनाकार मंदीप मेहंदीरत्ता ने चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के तहत प्रस्तावित वास्तु नियंत्रण एवं भवन ऊंचाई संबंधी प्रावधानों सहित संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
विचार-विमर्श के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि बफर ज़ोन का उद्देश्य कैपिटल कॉम्प्लेक्स की विरासत एवं दृश्यात्मक पहचान का संरक्षण करना है और इसके गठन का औचित्य आज भी यथावत है। उन्होंने इस विषय पर निर्णय स्थगित करते हुए शहरी नियोजन विभाग को स्पष्ट एवं तर्कसंगत अनुशंसाओं के साथ संशोधित प्रस्ताव पुनः समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
समिति ने यूनेस्को विश्व धरोहर कैपिटल कॉम्प्लेक्स स्थित पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के समग्र विकास योजना के क्रियान्वयन हेतु तैयार होलिस्टिक मास्टर प्लान फ्रेमवर्क की भी समीक्षा की। इंजीनियरिंग विभाग के परामर्शदाताओं ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैयार फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद मुख्य सचिव राजेश प्रसाद ने इंजीनियरिंग विभाग को समिति की टिप्पणियों एवं लागू विरासत संरक्षण दिशानिर्देशों के अनुरूप प्रस्ताव पर आगे कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में मुख्य सचिव प्रसाद ने चंडीगढ़ प्रशासन की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि शहर की विशिष्ट स्थापत्य विरासत का संरक्षण करते हुए यूनेस्को के दिशानिर्देशों के अनुरूप सतत एवं संवेदनशील विकास सुनिश्चित किया जाएगा।
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