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स्पोर्ट्स इंजरी और कंप्यूटर के अतिप्रयोग से बढ़ रही जकड़न में फिजियोथैरेपी असरदार

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न्यूज़म ब्यूरो

पंचकूला, 19 फरवरी। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने, मोबाइल के अतिप्रयोग और स्पोर्ट्स जनित जकड़न, गर्दन और कंधों में दर्द से राहत दिलाने में फिजियोथैरेपी असरदार साबित हो रही है।

भागदौड़ भरी जिंदगी में लैपटॉप और मोबाइल पर काम का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। इसके अतिप्रयोग से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम और सरवाईकल दर्द के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। खासकर युवा वर्ग में गर्दन की अकड़न, कंधे में जकड़न और पीठ दर्द की समस्या आम बन चुकी है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला का फिजियोथैरेपी सेंटर  पंचकर्म चिकित्सा तालमेल के साथ गठिया, पैरालिसिस और जोड़ों के दर्द में प्रतिरोधी साबित हो रहा है।

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आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब पमनानी के मार्गदर्शन में संस्थान के फिजियोथैरेपी सेंटर में हर रोज 50 से ज्यादा रोगी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। फरवरी माह में अब तक 400 रोगी शरीर की दर्द समस्या का इलाज करवा चुके हैं। जबकि जनवरी माह में यह आंकड़ा 600 से ज्यादा रहा। वर्ष 2025 में 8700 लोगों को स्पोर्ट्स इंजरी, गर्दन की अकड़न, घुटने, कंधे और जोड़ों के दर्द सहित पैरालिसिस में राहत मिली है।

फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. शैफाली का कहना है कि स्ट्रेचिंग, मैनुअल थैरेपी और इलेक्ट्रोथैरेपी जैसी तकनीकों के माध्यम से रोगी का इलाज किया जाता है, जिससे उनकी मांसपेशियों में रक्त प्रवाह बढ़ता है, सूजन कम होती है और दर्द से राहत मिलती है।

इंफ्रारेड थैरेपी हो रही है प्रभावी साबित
एनआईए के फिजियोथैरेपी सेंटर में अत्याधुनिक उपकरण इंफ्रारेड रेडिएशन थैरेपी (आईआरआर) के जरिये इलाज किया जाता है। इन्फ्रारेड हीट थैरेपी गर्माहट देने वाली उपचार पद्धति है, जिससे इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और दर्द में राहत मिलती है। वहीं, आइस थैरेपी मांसपेशियों में खिंचाव, मोच और घुटने और पैरों की मांसपेशियों की सूजन में राहत दिलाने में कारगर है।

आईएफटी थैरेपी गर्दन दर्द और सायटिका में असरदार 
फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. शैफाली ने बताया कि फिजियोथैरेपी सेंटर में सबसे ज्यादा रोगी सरवाईकल, कंधों, घुटनों, जोड़ों, कमर दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव के आते हैं। इन रोगियों का मैनुअल थैरपी, जिसमें एक्सरसाइज के जरिये इलाज किया जाता है। वरिष्ठ नागरिकों में घुटनों, जोड़ों और कमर दर्द की सबसे ज्यादा समस्या है, जबकि युवा वर्ग में कंधे और गर्दन की जकड़न बढ़ रही है। आईएफटी थैरेपी गर्दन दर्द और सायटिका में असरदार साबित हो रही है। 

 
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