न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 5 अक्टूबर। आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए मुंबई महानगरपालिका ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस डिपो और खेल परिसरों जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से पकड़े जाने वाले आवारा कुत्तों के आजीवन पालन-पोषण की जिम्मेदारी निजी संस्था को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना पर दो वर्ष के लिए 13 करोड़ 35 लाख 17 हजार रुपये खर्च प्रस्तावित हैं। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए स्थायी समिति के समक्ष रखा जाएगा।
1,000 कुत्तों के लिए बनेगा आश्रय
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, केंद्र सरकार के पशु जन्म नियंत्रण नियमों और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के दिशानिर्देशों के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों से पकड़े गए कुत्तों को उनके मूल स्थान पर वापस छोड़ने के बजाय स्थायी आश्रय देना जरूरी है। बीएमसी के पास फिलहाल अपना स्थायी आश्रय केंद्र नहीं है। इसलिए निजी संस्थाओं से ई-निविदाएं मंगाई गई थीं। इसमें ‘जेनिस शिफ्ट एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट’ ने 100 में से 100 तकनीकी अंक हासिल किए और प्रति कुत्ता प्रतिदिन औसतन 155 रुपये की सबसे कम दर पेश की। पहले चरण में 1,000 कुत्तों को संस्था के केंद्र में रखा जाएगा।
दो साल में 13.35 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान
प्रति कुत्ता प्रतिदिन 155 रुपये के हिसाब से एक वर्ष में 5 करोड़ 65 लाख 75 हजार रुपये और दो वर्षों में जीएसटी सहित करीब 13 करोड़ 35 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। एक कुत्ते के शेष संभावित नौ वर्ष के जीवनकाल में औसतन छह लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। संस्था को कुत्तों के लिए दिन में दो बार पौष्टिक आहार, स्वच्छ पानी और नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करानी होगी। साथ ही कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड और भौगोलिक स्थान निर्धारण तकनीक के जरिए प्रत्येक कुत्ते की जानकारी दर्ज करना भी अनिवार्य होगा।
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