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गुजरात में घोषित कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 हरियाणा में हो’ के नारों से गूंज उठा संसद परिसर : दीपेन्द्र हुड्डा

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• कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले हरियाणा को मेजबानी न मिलना घोर अन्याय : दीपेन्द्र हुड्डा
• हरियाणा में खेल ढाँचे की दुर्दशा के चलते हमारे खिलाड़ियों की जान तक जा रही : दीपेन्द्र हुड्डा
• भारत सरकार द्वारा गुजरात में घोषित कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 की मेजबानी या सह-मेजबानी मिलने से हरियाणा का खेल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा : दीपेन्द्र हुड्डा
• हरियाणा के साथ अन्याय के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ेंगे : दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 16 दिसंबर। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा आज संसद भवन परिसर में हरियाणा के सांसदों जयप्रकाश जेपी, सांसद वरुण मुलाना, सांसद सतपाल ब्रह्मचारी के साथ भारत सरकार द्वारा गुजरात में घोषित कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 के लिए हरियाणा को सह-मेज़बान राज्य बनाने के साथ ही राज्य के खेल ढांचे में निवेश के लिए पर्याप्त बजट दिए जाने की मांग को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। उन्होंने नारे लिखी तख्तियाँ लेकर संसद परिसर में ‘ओलंपिक व कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में हो’ का नारा लगाया और सरकार से मांग करी कि भारत सरकार द्वारा गुजरात में घोषित ये खेल हरियाणा में हों या कम से कम हरियाणा को सह-मेजबान राज्य बनाया जाए, ताकि हरियाणा में निवेश हो सके और खेल ढांचे में सुधार हो। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा के साथ अन्याय के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेंगे। 

 

इस दौरान उन्होंने कहा कि हरियाणा के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। हरियाणा ऐसा राज्य है जो कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में 50% मेडल भारत माता के लिए जीतकर लाता है, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। जब भारत को कॉमनवेल्थ खेल 2030 की मेज़बानी का मौका मिला, तो इसके लिए गुजरात और अहमदाबाद को चुना गया। इसी प्रकार सरकार ने ओलंपिक 2036 को भी गुजरात में कराने के लिए आधिकारिक बोली (बिडिंग) पेश करने की घोषणा की है। अब सारा खेल बजट वहीं खर्च होगा, लेकिन अगर यह निवेश हरियाणा में किया जाता तो हमारे खिलाड़ी कितने और मेडल जीतते इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

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उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा को खेलो इंडिया में सबसे कम बजट दिया गया। देश के ₹3500 करोड़ के 'खेलो इंडिया' बजट में ₹600 करोड़ गुजरात को और सबसे ज्यादा मेडल लाने वाले हरियाणा को सिर्फ ₹80 करोड़ ही दिए गए, जो देश में सबसे कम है। जबकि, ओलंपिक, एशियाई, कॉमनवेल्थ खेल हों, सबसे ज्यादा मेडल हरियाणा के खिलाड़ी लाते हैं।

दीपेन्द्र हुड्डा ने इससे पहले पूरक अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान लोकसभा में भी इस मुद्दे को रखा और अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा कि आज हरियाणा में खेल ढाँचे की इतनी दुर्दशा है कि बास्केटबॉल कोर्ट्स के अंदर हमारे खिलाड़ियों की जान तक जा रही है। कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 में हरियाणा को कम से कम को-होस्ट राज्य बनाने से लाखों करोड़ के बजट में से हरियाणा के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी कुछ खर्च हो पाएगा।

 

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