सीजेपी संस्थापक ने हिरासत से रिहाई के बाद दिल्ली पुलिस की शर्तों पर उठाए सवाल, कहा- पीएम मोदी और अमित शाह से नहीं डरते
राहुल गुप्ता
नागपुर, 12 अक्टूबर। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड नहीं भरा है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर दोबारा प्रदर्शन नहीं करने की शर्त हो। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी फिर से सड़कों पर उतरेगी और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नहीं डरते।
दीपके की यह टिप्पणी सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के बयान के बाद आई है। रत्ना सिंह ने कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली हवाई अड्डे पर एहतियातन हिरासत में लिए गए अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे।
‘हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे’
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए रवाना होने से पहले दीपके ने नागपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा, “मैंने किसी भी बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे नेताओं से डरने वाले नहीं हैं। दीपके के मुताबिक, उन्हें एक बार जेल में डाला जाए या सौ बार, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी कथित तानाशाही के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी।
हिरासत और रिहाई की शर्तों पर अलग-अलग दावे
इस मामले में सीजेपी की ओर से हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की शर्तों को लेकर बयान सामने आए हैं। रत्ना सिंह ने दावा किया था कि तीनों को एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किया गया, जबकि दीपके ने किसी बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के बीच दीपके के ताजा बयान से साफ है कि सीजेपी अपना आंदोलन जारी रखने के पक्ष में है। हालांकि, रिहाई की शर्तों को लेकर दोनों बयानों के बीच अंतर है।
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