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Mid-Day Meal : हिमाचल के स्कूलों में हफ्ते में दो दिन मिलेगा अतिरिक्त पोषण

CM Sukhu announces extra nutrition under Mid-Day Meal. CM Sukhu announces extra nutrition under Mid-Day Meal.
CM Sukhu announces extra nutrition under Mid-Day Meal.

हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों के पोषण को बेहतर बनाने के लिए Mid-Day Meal से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव किया है

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने पूरक पोषण कार्यक्रम को सप्ताह में एक दिन से बढ़ाकर दो दिन करने को मंजूरी दी है

न्यूज़म ब्यूरो

शिमला, 24 सितंबर | हिमाचल प्रदेश में School Nutrition को मजबूत करने के लिए मिड-डे मील में अतिरिक्त पोषण शामिल किया गया है। राज्य सरकार के नए फैसले के अनुसार नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार उबला अंडा या ताजा फल मिलेगा। स्कूलों को स्थानीय स्तर पर ताजा सामग्री खरीदने की अनुमति होगी। इस प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और स्कूल प्रबंधन समितियों की भागीदारी भी की जा सकेगी। स्कूलों के प्रधानाचार्य और अन्य निगरानी अधिकारी योजना के क्रियान्वयन पर नजर रखेंगे। सरकार की ओर से स्कूलों को नामांकन के आधार पर हर तिमाही फंड जारी किया जाएगा। साथ ही खर्च का अलग रिकॉर्ड और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य बच्चों को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना और उनके स्वस्थ विकास में सहयोग देना है।

Mid-Day Meal में अब सप्ताह में दो बार मिलेगा अतिरिक्त पोषण

हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए Mid-Day Meal व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। राज्य में पूरक पोषण कार्यक्रम को अब सप्ताह में एक बार के बजाय दो बार किया जाएगा।

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नई व्यवस्था के तहत नर्सरी से कक्षा 8 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिड-डे मील के साथ उबला हुआ अंडा या ताजा फल दिया जाएगा। यह प्रावधान मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना में संशोधन के बाद लागू किया गया है।

सरकार की योजना के अनुसार, यह व्यवस्था मुख्य रूप से बुधवार और शुक्रवार को लागू की जाएगी। बच्चों या उनके अभिभावकों को अंडे और ताजे फल में से किसी एक विकल्प को चुनने का अवसर मिलेगा।

School Nutrition के तहत अंडे और फलों का विकल्प

School Nutrition कार्यक्रम में बच्चों को अतिरिक्त पोषण देने के लिए दो विकल्प रखे गए हैं। विद्यार्थी उबला हुआ अंडा ले सकते हैं या ताजा फल चुन सकते हैं।

ताजे फलों में केला और सेब को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य बच्चों के भोजन में अतिरिक्त पोषक तत्व शामिल करना है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह पहल बच्चों के पोषण समर्थन को मजबूत करेगी। उनके अनुसार, इससे बच्चों के स्वस्थ विकास में भी मदद मिलेगी।

Student Health को लेकर खाद्य सुरक्षा पर जोर

सरकार ने Student Health से जुड़े इस कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। अधिकारियों को खरीद, भंडारण, तैयारी और वितरण के दौरान FSSAI के खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्कूल स्थानीय स्तर पर ताजा खाद्य सामग्री खरीद सकेंगे। जहां संभव होगा, इस प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और स्कूल प्रबंधन समितियों को भी शामिल किया जाएगा।

इस व्यवस्था की निगरानी स्कूलों के प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक और अन्य संबंधित अधिकारी करेंगे। इससे खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

Himachal Pradesh Schools में स्थानीय खरीद की व्यवस्था

Himachal Pradesh Schools में ताजा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय खरीद पर जोर दिया गया है। स्कूल जरूरत के अनुसार अंडे और फलों की खरीद स्थानीय स्तर पर कर सकेंगे।

सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय से जुड़े समूहों को शामिल करने की संभावना भी रखी गई है। इससे योजना के संचालन में स्थानीय भागीदारी बढ़ सकती है।

स्कूलों को विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर फंड उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों के माध्यम से यह राशि हर तिमाही जारी की जाएगी। साथ ही स्कूलों को खर्च का अलग रिकॉर्ड रखना होगा।

स्कूलों में खर्च और रिपोर्ट की होगी निगरानी

नई व्यवस्था के तहत स्कूलों को कार्यक्रम पर होने वाले खर्च का अलग हिसाब रखना होगा। इसके अलावा समय-समय पर संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार ने नामांकन के आधार पर स्कूलों के लिए फंड जारी करने की व्यवस्था तय की है। इससे विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार अतिरिक्त पोषण कार्यक्रम के लिए जरूरी राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

इस बदलाव के साथ हिमाचल प्रदेश में स्कूली बच्चों के भोजन में अतिरिक्त पोषण शामिल किया जाएगा। सप्ताह में दो दिन अंडा या फल देने की व्यवस्था के जरिए सरकार ने बच्चों के पोषण और स्वस्थ विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।

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