पुणे में भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग पर तुकाराम मुंढे को जांच समिति का सचिव बनाया गया है।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 12 अक्टूबर। महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर 11 दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन समाप्त हो गया है। राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग मानते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को जांच समिति का सचिव नियुक्त किया है। पुणे में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने इस नियुक्ति की मांग की थी। सरकार के फैसले के बाद छात्रों ने आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया।
देर रात महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों और उनके समर्थन में पहुंचे विधायक रोहित पवार से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम भी मौजूद थे। बातचीत में मंत्री ने एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने के फैसले की जानकारी दी। हालांकि, सरकार ने उन्हें पद से नहीं हटाया है।

जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे एमपीएससी अध्यक्ष
एमपीएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर विवाद के बीच आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। पुणे में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में अध्यक्ष का इस्तीफा भी शामिल था।
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय आयोग गठित किया है। पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। तुकाराम मुंढे सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाईक को सदस्य बनाया गया है। मुंढे फिलहाल खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त के पद पर तैनात हैं।
60 दिनों में देनी होगी जांच रिपोर्ट
आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। सरकार के सामने अभ्यर्थियों ने कई अन्य मांगें भी रखी हैं। इनमें आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना, तीन वर्षों में 70,000 पदों पर भर्ती करना, जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप सी परीक्षा में सीटों की संख्या बढ़ाना और एमपीएससी अध्यक्ष व सचिव की नियुक्ति से पहले उनके पुराने रिकॉर्ड की जांच करना शामिल है।
पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले ने प्रदर्शनकारियों को उनकी अन्य मांगों पर समाधान का आश्वासन भी दिया है।
अध्यक्ष को हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया जरूरी
एमपीएससी अध्यक्ष का पद संवैधानिक है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य सरकार या राज्यपाल सीधे आयोग के अध्यक्ष को पद से नहीं हटा सकते। संविधान के अनुच्छेद 317 में लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है।
ऐसे में जांच आयोग की रिपोर्ट अहम होगी। यदि जांच में अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश होती है, तो आगे का निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा। फिलहाल, विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजा गया है।
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