देश में थोक महंगाई दर 9.92 फीसदी तक पहुंचने के बीच दिल्ली, मुंबई, नोएडा और बेंगलुरु में महंगे आईफोन खरीदने के लिए लोग घंटों लाइन में खड़े नजर आए
राहुल गुप्ता
नई दिल्ली, 18 सितंबर।
देश में एक तरफ बढ़ती महंगाई आम आदमी के बजट पर दबाव डाल रही है, तो दूसरी तरफ देश के बड़े शहरों से सामने आई तस्वीरें अलग कहानी बयां कर रही हैं। दिल्ली, मुंबई, नोएडा और बेंगलुरु समेत कई शहरों में एप्पल स्टोर्स के बाहर आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। खास बात यह है कि आईफोन 18 प्रो मैक्स के टॉप मॉडल की कीमत 3.29 लाख रुपये तक है और कई ग्राहक इसे खरीदने के लिए रात से ही लाइन में लग गए थे।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ रही हैं, तब 3 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाला स्मार्टफोन खरीदने के लिए लोगों में इतनी दिलचस्पी क्यों है।
9.92 फीसदी पर पहुंची थोक महंगाई दर
हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में थोक महंगाई दर यानी डब्ल्यूपीआई बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई। जुलाई में यह आंकड़ा 9.78 फीसदी था। वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था और आम लोगों के बजट पर पड़ रहा है।
हालांकि, एप्पल स्टोर्स के बाहर महंगे आईफोन खरीदने के लिए उमड़ी भीड़ अर्थव्यवस्था के दूसरे पहलू की ओर भी इशारा करती है। अर्थशास्त्र में इसे ‘के-शेप्ड रिकवरी’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि आर्थिक सुधार का फायदा समाज के अलग-अलग वर्गों को समान रूप से नहीं मिलता। एक वर्ग आर्थिक दबाव झेल रहा होता है, जबकि दूसरे वर्ग के पास खर्च करने के लिए अपेक्षाकृत अधिक डिस्पोजेबल इनकम होती है।
प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती मांग को इसी बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत में स्मार्टफोन बाजार का एक बड़ा हिस्सा अब प्रीमियम सेगमेंट की ओर बढ़ रहा है और एप्पल इस बाजार में प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
क्यों मची है आईफोन खरीदने की होड़?
स्मार्टफोन अब सिर्फ बातचीत या इंटरनेट इस्तेमाल करने का साधन नहीं रह गया है। कई लोगों के लिए यह लाइफस्टाइल और सामाजिक पहचान से भी जुड़ गया है। नो-कॉस्ट ईएमआई, क्रेडिट कार्ड ऑफर और अन्य भुगतान विकल्पों ने महंगे स्मार्टफोन खरीदना आसान किया है।
इसके अलावा नया मॉडल सबसे पहले खरीदने का क्रेज भी इस मांग को बढ़ाता है। कुछ ग्राहक नए आईफोन की लॉन्चिंग को एक खास उपलब्धि या अनुभव के तौर पर देखते हैं। सोशल मीडिया पर नए फोन के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा करने की चाहत भी इस उत्साह को बढ़ाती है।
लॉन्च के शुरुआती दिनों में प्रीमियम मॉडल की उपलब्धता सीमित होने की आशंका भी ग्राहकों को जल्दी खरीदारी के लिए प्रेरित करती है। कई लोग बैंक ऑफर और शुरुआती बिक्री का फायदा उठाने के लिए सुबह-सुबह स्टोर पहुंच जाते हैं।
देशभर में एप्पल स्टोर्स के बाहर दिखी लंबी कतार
देश के छह रिटेल आउटलेट्स पर नए आईफोन मॉडल की बिक्री सुबह 8 बजे से शुरू हुई। बेंगलुरु में राहुल नाम के एक ग्राहक सुबह 5 बजे से लाइन में खड़े थे। उन्होंने बताया कि वह आईफोन 7 के समय से लगातार एप्पल के फोन खरीद रहे हैं और उनके लिए नया आईफोन लॉन्च होना किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है।
दिल्ली-एनसीआर के नोएडा स्थित डीएलएफ मॉल में भी आईफोन खरीदने के लिए ग्राहकों की भीड़ दिखाई दी। मथपरा से पहुंचे एक ग्राहक ने बताया कि वह सुबह 6 बजे से लाइन में खड़े थे। उन्होंने आईफोन 18 प्रो मैक्स के दो फोन खरीदे और शुरुआती बुकिंग के चलते उन्हें पहला फोन मिल गया।
महाराष्ट्र में भी कुछ ग्राहकों को नए फोन के लिए 10 से 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। वहीं बेंगलुरु के एक अन्य ग्राहक ने बताया कि उन्होंने आईफोन 13 से सीधे नए मॉडल पर अपग्रेड किया और उन्हें महज पांच मिनट में फोन मिल गया।
इन घटनाओं से साफ है कि महंगाई के आंकड़ों के बावजूद प्रीमियम स्मार्टफोन के लिए एक खास उपभोक्ता वर्ग में खर्च करने की क्षमता और इच्छा बनी हुई है।
सबसे सस्ता आईफोन 18 प्रो भी 1.64 लाख रुपये का
आईफोन 18 प्रो के 256 जीबी मॉडल की कीमत 1.64 लाख रुपये है। 512 जीबी मॉडल की कीमत 1.89 लाख रुपये और 1 टीबी मॉडल की कीमत 2.39 लाख रुपये है।
वहीं आईफोन 18 प्रो मैक्स के 256 जीबी मॉडल की कीमत 1.79 लाख रुपये, 512 जीबी मॉडल की 2.04 लाख रुपये और 1 टीबी मॉडल की 2.54 लाख रुपये है। सबसे ज्यादा स्टोरेज वाले 2 टीबी आईफोन 18 प्रो मैक्स की कीमत 3.29 लाख रुपये तक पहुंचती है।
इस बार एप्पल ने अपना पहला फोल्डेबल फोन आईफोन डुओ भी पेश किया है। इसकी पहली बिक्री 23 सितंबर से शुरू होने की जानकारी है। इसके बेस वेरिएंट की कीमत करीब 2.99 लाख रुपये बताई गई है, जबकि टॉप वेरिएंट की कीमत लगभग 4.5 लाख रुपये तक हो सकती है।
महंगाई और महंगे गैजेट की एक साथ मौजूद तस्वीरें बताती हैं कि देश में उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति और खर्च करने की क्षमता एक जैसी नहीं है। जहां एक वर्ग जरूरी खर्चों के बढ़ते बोझ से जूझ रहा है, वहीं दूसरा वर्ग प्रीमियम टेक्नोलॉजी और नए गैजेट पर बड़ी रकम खर्च करने के लिए तैयार है।
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