चंडीगढ़। नारनौंद के विधायक जस्सी पेटवाड़ ने हरियाणा सरकार द्वारा CET के नाम पर युवाओं के साथ किए गए अन्याय को गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार को कठोर शब्दों में घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि सभी पारियों के पेपर का स्तर समान नहीं था, फिर भी गलत नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया लागू कर दी गई, जिससे किसी के 45 अंक बढ़कर 60 हो गए और किसी के 60 घटकर 45 रह गए। जब परीक्षा की आधारशिला ही असमान हो, तो नॉर्मलाइजेशन कैसे न्याय कर सकता है? यह हजारों युवाओं की मेहनत, समय और भविष्य पर सीधी चोट है।
जस्सी पेटवाड़ ने CET की केवल तीन वर्ष की वैधता को युवाओं के साथ दूसरा बड़ा धोखा बताया। उन्होंने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी CET पास कर भी ले और तीन साल तक सरकार भर्ती ही न निकाले, तो उसकी मेहनत और समय दोनों बेकार हो जाते हैं। न उसकी CET वैध रहती है और न उसकी आयु सीमा। ऐसे में वह युवा किस दरवाज़े पर न्याय मांगने जाए? क्या सरकार उसके खोए हुए वर्षों की भरपाई करेगी? यह नीति युवाओं को बेरोज़गारी के दलदल में धकेलने के अलावा कुछ नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि हरियाणा सरकार नौकरियों के नाम पर सिर्फ़ दिखावा कर रही है। न भर्ती पूरी होती है, न पारदर्शिता दिखती है, न युवाओं के भविष्य की कोई योजना। इन गलत नीतियों की सबसे बड़ी कीमत उन लाखों युवाओं को चुकानी पड़ रही है जिनकी उम्र, सपने और करियर CET की अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहे हैं। जस्सी पेटवाड़ ने मांग की कि सरकार साफ बताए क्या CET युवाओं के हित में है या केवल सरकार की सुविधा के लिए बनाया गया एक असफल प्रयोग ?
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