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स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों का पालन करने से भारत अपनी खोई हुई महिमा पुनः प्राप्त करेगा : प्रसाद

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न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 20 मार्च : रामकृष्ण मिशन आश्रम चंडीगढ़ में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव के प्रथम दिन को *‘स्वामी विवेकानन्द दिवस’* के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ आश्रम के सचिव स्वामी भितिहरानंदजी के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने बताया कि आश्रम वर्ष 1958 से मूल्याधारित शिक्षा, आध्यात्मिक शिविर, आसपास के गाँवों के लिए चलित चिकित्सालय, छात्रावास तथा पुस्तकालय के माध्यम से समाज की सेवा कर रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के उपदेशों के अनुसार हृदय में दृढ़ता, प्रेम और सेवा भाव धारण करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि एच. राजेश प्रसाद मुख्य सचिव यू.टी. चंडीगढ़ ने कहा कि यद्यपि विद्यालयी पाठ्यक्रम में स्वामी विवेकानन्द के जीवन का विस्तृत वर्णन नहीं मिलता, परंतु उनका साहित्य हम सभी के लिए उपलब्ध है, जिससे हम प्रेरणा ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को जनसामान्य तक पहुँचाया। उन्होंने ईश्वर को केवल मंदिरों में सीमित न मानकर प्रत्येक मनुष्य में देखा तथा समस्त लोककल्याण का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं के लिए स्वामीजी का विशेष संदेश — अपने ऊपर विश्वास — को स्मरण करते हुए कहा कि उनके आदर्शों का पालन करने से भारत अपनी खोई हुई महिमा पुनः प्राप्त करेगा।
स्वामी निर्विकारानंदजी सचिव रामकृष्ण मिशन इंदौर ने “हमारे जीवन के लिए स्वामी विवेकानन्द का संदेश” विषय पर बोलते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द मानवता के कल्याण के लिए अवतरित सप्तऋषियों में से एक थे। उन्होंने कहा कि उस समय देश सहस्र वर्षों की पराधीनता के कारण अपनी शक्ति खो चुका था। स्वामीजी ने श्रीरामकृष्ण के उपदेशों को हृदयंगम किया और उन्हें सामान्य जन तक पहुँचाया। उन्होंने “शिव ज्ञाने जीव सेवा” को वेदान्त का सबसे व्यावहारिक रूप बताते हुए कहा कि मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद ही मनुष्य धर्म के विषय में सोच सकता है।
आश्रम की प्रबंध समिति के सदस्य सुधीर बावेजा ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने देशवासियों के लिए प्रसन्नतापूर्वक अनेक कठिनाइयाँ सहन कीं। उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने भारत को विश्वगुरु के रूप में देखने की भविष्यवाणी की थी, जो केवल भौतिक उन्नति में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक नेतृत्व में निहित है, और इसे साकार करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर स्वामी विवेकानन्द दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित निबंध लेखन तथा समूह चर्चा प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इन प्रतियोगिताओं में चंडीगढ़ तथा आसपास के क्षेत्रों के महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया था। कार्यक्रम के अंत में रामकृष्ण मिशन, गुवाहाटी के स्वामी दिव्यव्रतानंदजी द्वारा प्रस्तुत भजन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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