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कान पर बाल बढ़ाने से मिली अंतरराष्ट्रीय ख्याति

कानपुर : 22 साल से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में कब्जा जमाए बैठे हैं कनपुरिया राधाकांत वाजपेयी। इनकी उम्र है 75 साल। हालांकि यह उपलब्धि राधाकांत वाजपेयी को सबसे पहले 2003 में मिली थी। तब 13.2 सेंटीमीटर लंबे कान के बाल वाले राधाकांत वाजपेयी थे। अब इनका दावा है कि यह लंबाई 24 सेंटीमीटर तक हो गयी है।

राधाकांत एक फिर गिनीज बुक में अपने कान के बालों की लंबाई दर्ज कराने जा रहे हैं। इनके बड़े भाई राम किशोर वाजपेयी, छोटे भाई नवल किशोर वाजपेई के भी कान के बाल लंबे और घने हैं, पर राधाकांत की तरह नहों। गिनीज बुक में नाम दर्ज होने का श्रेय ये मित्र सुमंत मिश्र और अग्रज रामकिशोर वाजपेयी को देते हैं।

नटशेल में कहा जाय तो कानपुर के राधाकांत वाजपेयी ने एक अनोखे शौक को विश्व रिकॉर्ड में बदलकर शहर और देश का नाम रोशन किया है। देश-विदेश के मीडिया से उन्हें खासी शोहरत मिली। बकौल राधाकांत, जापान और साउथ कोरिया ने इन पर शार्ट फ़िल्म भी बनाई है। वर्षों तक कान के बाल बढ़ाने के उनके धैर्य और संकल्प ने उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाया।

नहाने से पहले वह आधा घण्टा तक आयुर्वेदिक शैम्पू लगाए रखते है, रोज। सामान्य दिखने वाले इस प्रयोग के पीछे उनकी असाधारण लगन छिपी है। न नियमित कटिंग, न किसी तरह का कृत्रिम उपाय। राधाकांत वाजपेयी की उपलब्धि यह बताती है कि पहचान केवल बड़े मंचों या संसाधनों से नहीं, बल्कि निरंतरता और अलग सोच से भी बनती है।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होते ही वे देश-विदेश में चर्चा का विषय बने और युवाओं के लिए यह संदेश दिया कि अनोखापन यदि अनुशासन से जुड़ जाए, तो वह इतिहास रच सकता है। इनके पास देसी-विदेशी जर्नल्स हैं जिसमें ये छपे हैं।

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