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पूर्व न्यायाधीश ज्ञान चंद्रा का लखनऊ में हृदय गति रुकने से निधन

राजधानी के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन थे पूर्व न्यायाधीश ज्ञान चंद्रा 

 

चंद्रा के भांजे न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ में न्यायाधीश हैं 

 

प्रतापगढ़/लखनऊ, 25 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के पूर्व सचिव लोकायुक्त एवं पूर्व न्यायाधीश ज्ञान चंद्रा का आज सुबह तड़के लखनऊ के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके भांजे न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी उच्च न्यायालय खंड पीठ लखनऊ में न्यायाधीश हैं। ज्ञान चंद्रा के पिताजी स्व. बाबूलाल श्रीवास्तव प्रतापगढ़ जनपद में जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष रहे और सन 1962 में प्रतापगढ़ के सदर सीट से जनसंघ के पहले विधायक। 

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अपने पिता के पद चिन्हों पर चलकर ज्ञान चंद्रा जी ने सामाजिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति अंतिम सांस तक समर्पित रहे। विगत 18 दिसंबर 2025 को अपने पिता स्वर्गीय बाबूलाल श्रीवास्तव की पुण्य तिथि उनके द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में यह झलक पूर्णतया देखने को मिली थी। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवकों के साथ जनपद के प्रबुद्ध समाज के लोगों ने बढ़चढकर हिस्सा लिया था।

ज्ञान चंद्रा ने अपने स्व. पिताजी के सानिध्य में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया था। वह बेहद सरल और विराट व्यक्तित्व के धनी थे। न्यायिक सेवा में उन्होंने मुंसिफ मजिस्ट्रेट से सफर शुरू किया और जनपद न्यायाधीश के पद से उनकी न्यायिक सेवा समाप्त हुई। सेवानिवृत्त के बाद वह चर्चित यादव सिंह घोटाले की जांच, कुंभ मेले में हुए भगदड़ की न्यायिक जांच और वाराणसी में पूर्व में हुए जयगुरदेव की मीटिंग में हुए हादसे की जांच कमेटी का जिम्मा भी निभा चुके है।

न्यायिक सेवा के साथ लखनऊ और प्रतापगढ़ के कई सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में इन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। बचपन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कई बड़े स्वयं सेवकों का सान्निध्य इन्हें प्राप्त हुआ था। यह राज्यपाल के पूर्व सलाहकार एसएस उपाध्याय और पूर्व चीफ सीक्रेट्री आलोक रंजन के बेहद प्रिय थे।

अपने पीछे स्वर्गीय ज्ञान चंद्रा एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए है। इनके बच्चे अमेरिका में रहते है और पत्नी इनके साथ लखनऊ के महानगर स्थित आवास में रहती हैं। अंतिम क्षण में इनका बेटा अमेरिका से इनके पास आ गया था। इनका इलाज इनके भांजे न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की देख रेख में ही हो रहा था। उनके निधन से उनके शुभचिंतकों और चाहने वालो में शोक की लहर दौड़ गई है। 

 

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