मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-5 ने अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया है। छापेमारी में बड़ी संख्या में बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और लैपटॉप बरामद किए गए।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 17 सितंबर।
मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-5 ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह गोवा के एक रिसॉर्ट के विला से कथित तौर पर अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
फर्जी बैंक खातों का बनाया जाल
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी अपने और अन्य लोगों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे। इन खातों को सक्रिय कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, खाते सक्रिय होने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड का नियंत्रण गिरोह अपने पास रखता था। इन बैंक खातों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों से ऑनलाइन ठगी के जरिए हासिल रकम जमा करने के लिए किया जाता था।
जांचकर्ताओं का कहना है कि ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसका लेनदेन किया जाता था, जिससे पैसों के स्रोत को छिपाया जा सके।
13 सितंबर को गोवा में हुई छापेमारी
मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने 13 सितंबर 2026 को गोवा के वर्का इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट के विला पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में 88 पासबुक, 143 चेकबुक, 100 एटीएम कार्ड, 24 मोबाइल फोन, 167 सिम कार्ड और 2 लैपटॉप बरामद किए गए। इसके अलावा गोवा में छापेमारी के दौरान 59 मोबाइल फोन, 19 सिम कार्ड, 9 लैपटॉप, 51 एटीएम कार्ड और 12 पासबुक भी जब्त किए गए।
ठगी की रकम के लिए बनाया कस्टम ऐप
जांचकर्ताओं के मुताबिक, गिरोह ने साइबर ठगी से हासिल रकम को छिपाने और अलग-अलग बैंक खातों के बीच ट्रांसफर करने के लिए एक कस्टम एप्लिकेशन भी तैयार किया था।
पुलिस अब इस ऐप के जरिए किए गए लेनदेन और उससे जुड़े बैंक खातों की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऐप के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ और इसमें कितने बैंक खाते जुड़े हुए थे।
अन्य आरोपियों और नेटवर्क की तलाश
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त राजतिलक रौशन के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच यूनिट-5 की टीम ने की। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी बैंक खातों और देशभर में किए गए कथित साइबर फ्रॉड से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और इन खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम को किन-किन जगहों पर ट्रांसफर किया गया।
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