न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 5 नवंबर। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कोल्हापुर के प्रसिद्ध गोकुल दूध संघ को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर करारा हमला बोला है। फडणवीस ने राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह बेहद हास्यास्पद है कि एक स्थानीय संस्था के चुनाव के लिए राहुल गांधी को दिल्ली में बैठकर ट्वीट करना पड़ रहा है।
CM फडणवीस का राहुल गांधी पर हमला
संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोकुल दूध संघ हालिया घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की कैसी हालत हो गई है! गोकुल में केवल 4,500 मतदाता हैं, और इतने छोटे से स्थानीय चुनाव के लिए राहुल गांधी को दिल्ली में बैठकर ट्वीट करना पड़ रहा है। गोकुल के चुनाव में किसी भी एक पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। चुनाव परिणामों में एक पक्ष ने 13 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे पक्ष ने 12 सीटें जीती थीं।
कोरम न पूरा होने के कारण लिया गया फैसला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रशासनिक बताया कि गोकुल दूध संघ की बैठक के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था। सदस्यों की गैरहाजिरी और कोरम की कमी के कारण बैठक को पहले ही दो बार रद्द करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अगर कोरम की कमी की वजह से यह बैठक तीसरी बार भी रद्द हो जाती, तो नियमानुसार पूरा चुनाव ही रद्द करने की नौबत आ जाती। संस्था के कामकाज और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
कानूनी सलाह के बाद ही हुआ निर्णय
विपक्ष द्वारा सरकार के इस फैसले को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताए जाने पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दोटूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि यह फैसला अदालत में नहीं टिकेगा, जबकि कानूनी जानकारों का मानना है कि यह निर्णय पूरी तरह वैध है। सरकार ने यह फैसला ऐसे ही नहीं लिया, बल्कि राज्य के एडवोकेट जनरल की आधिकारिक कानूनी राय लेने के बाद ही आगे कदम बढ़ाया है।
राहुल गांधी बिना वजह दखल दे रहे
राहुल गांधी के हस्तक्षेप पर नाराजगी जाहिर करते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह कोई राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा नहीं है जिसके लिए देश का विपक्ष का नेता बयानबाजी करे। लेकिन राहुल गांधी स्थानीय स्तर के इस छोटे से मामले में भी बिना वजह दखल दे रहे हैं, जो उनकी राजनीतिक समझ और स्थिति को दर्शाता है।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार कैबिनेट की बैठक में सहकारी संस्थाओं को लेकर एक फैसला लिया है। राज्य में जिन सहकारी संगठनों का वार्षिक टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से अधिक है, सरकार उनकी प्रबंध समितियों में पांच सदस्यों को नामित करेगी। इस समूह में एक सरकारी अधिकारी होगा, जो सहायक रजिस्ट्रार या उससे ऊपर के पद का हो और ऐसे संगठनों के कामकाज का अनुभव रखने वाले चार अन्य व्यक्ति शामिल होंगे।
सरकारी अधिकारी को वोट देने का अधिकार नहीं होगा। हालांकि नामित किए गए अन्य चार सदस्यों को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में वोट देने का अधिकार तो होगा, लेकिन वे संगठन में किसी पदाधिकारी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
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