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बच्चों के पास जानकारी बहुत, लेकिन ज्ञान की कमी; शिक्षकों की जिम्मेदारी अहम: देवेंद्र फडणवीस

नागपुर में शैक्षणिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृभाषा में पढ़ाई बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राहुल गुप्ता

नागपुर, 24 अक्टूबर। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि जेन-जी और जेन-अल्फा के बच्चों के पास जानकारी की भरमार है, लेकिन उस जानकारी को ज्ञान में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को केवल जानकारी तक सीमित न रखें, बल्कि उसका सही उपयोग करना भी सिखाएं। फडणवीस नागपुर में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय प्राचार्य शैक्षणिक सम्मेलन के समापन कार्यक्रम में बोल रहे थे।

मातृभाषा में शिक्षा पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित देशों में शिक्षा का माध्यम मुख्य रूप से मातृभाषा होती है, जबकि कई विकासशील देशों में पढ़ाई उन भाषाओं में होती है जो कभी उन पर शासन करने वाले देशों की थीं। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी मातृभाषा में शिक्षा देने पर जोर देती है।

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फडणवीस के मुताबिक, पांच वर्ष की उम्र तक बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है। इस दौरान बच्चों के साथ मातृभाषा में बातचीत उनके मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए शुरुआती शिक्षा में मातृभाषा को महत्व देना जरूरी है।

मोबाइल और सोशल मीडिया को पूरी तरह नकारने की जरूरत नहीं

फडणवीस ने मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर कहा कि अक्सर यह शिकायत की जाती है कि आज के विद्यार्थी मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, लेकिन बड़े लोग भी इससे अछूते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब लोगों का ध्यान कुछ सेकंड तक ही केंद्रित रह पाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया को पूरी तरह नकारने के बजाय उनके सही इस्तेमाल पर ध्यान देने की जरूरत है। विद्यार्थियों को तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करना सिखाया जाना चाहिए।

एआई में मानवीय संवेदनाओं और नैतिकता की कमी

मुख्यमंत्री ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच तकनीकी अंतर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है और अगले पांच वर्षों में इसके काफी हद तक समाप्त होने की उम्मीद है।

फडणवीस ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में मानवीय संवेदनाएं और नैतिकता नहीं होतीं। उन्होंने इन्हें शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण मूल्य बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों में इन गुणों का विकास करना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि नितीश भारद्वाज ने सरकार के सामने कुछ अपेक्षाएं रखी हैं, जिन पर सरकार निश्चित रूप से विचार करेगी।

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