निश्छल भटनागर की कलम से….
प्रधानमंत्री का संदेश…. ज़मीन से जुड़िए !
दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल…. भारतीय जनता पार्टी से जुड़े करोड़ों कार्यकर्ताओं से लेकर….पार्टी के कद्दावर दिग्गज नेता तक….एक ही सपना देखते हैं कि…. कैसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय…. सबसे बड़ी फैन फॉलोइंग रखने वाले…. सबसे ज्यादा सुने जाने वाले तथा कैसी भी आपदा में अवसर ढूंढ निकालने वाले…. सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार….देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला जाए। कब वो दिन आए कि मोदी पूछें…. कैसे हैं आप। क्या चल रहा है…. और दे डालें कोई नया टास्क। सच पूछिए तो हरियाणा के मंत्रियों से लेकर…. भाजपा विधायकों ने भी कभी सपने में भी जो नहीं था सोचा….वो सच हो गया, और…. प्रधानमंत्री कि ओर से न्योता आ गया….मिलने का। बीती 3 अक्टूबर को सभी 48 भाजपा विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों ने…. नई दिल्ली के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित…. प्रधानमंत्री के सरकारी आवास की चौखट पार की। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में….प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुनहरी मुलाकात करने गई…. हरियाणा सरकार को उनसे जो संदेश मिला, वो…. ताउम्र याद रहेगा। मौके पर मौजूद रहे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन…. नवनियुक्त हरियाणा प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव स्मृति जुबिन ईरानी…. और प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अर्चना गुप्ता। सामान्य चर्चा के बाद शुरू हुआ प्रेरणा स्तोत्र…. प्रधानमंत्री मोदी का ब्रेन स्टॉर्मिंग संबोधन। जो हरेक को भीतर तक छू गया…. कर्तव्य बोध जगा गया। ये बता गया कि अब करना क्या है।
चर्चा तो है कि….मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दिल को….छू गई प्रधानमंत्री की बातें। प्रधानमंत्री मोदी से मिले अपनत्व को शब्दों में समेटने की नायाब कोशिश की उन्होंने…. बोले, आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण व प्रेरणादायी रहा। आज प्रधानमंत्री जी से हमें जो दिशा मिली है, उसे हम केवल बैठक तक सीमित नहीं रखेंगे। मोदी के दिशा-निर्देश अनुसार….अब हर मंत्री अपने विभाग में। हर विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में। हर कार्यकर्ता अपने गांव में और…. हर विभाग अपने क्षेत्र में इस सोच को जमीन पर उतारेगा। हमारी कोशिश होगी, सरकार जनता के बीच जाए। मंत्रीगण जनता के बीच जाएं। विधायक जनता के बीच जाएं। कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं। समस्याएं जमीन पर सुनी जाएं। समाधान भी जमीन पर दिखाई दें। और सबसे महत्वपूर्ण….विकसित भारत का संकल्प…. हरियाणा के हर गांव और हर परिवार का संकल्प बने। प्रधानमंत्री ने दिशा दिखाई है। ऐसे में हरियाणा की जनता का आशीर्वाद….हमारे मंत्री- विधायकों -कार्यकर्ताओं की मेहनत…. तथा सरकार की नीयत और नीति के साथ…. हम हरियाणा को विकसित भारत की यात्रा का…. मजबूत व अग्रणी भागीदार बनाएंगे। नायब सैनी बोले कि….हमारा संकल्प स्पष्ट है – “विकसित हरियाणा – विकसित भारत की मजबूत नींव।” प्रधानमंत्री जी ने हमें हरियाणा के विकास….जनसेवा व संगठन संबंधी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। अब समय से वही मार्गदर्शन प्रदेश कि जनता…. के सामने रखने का।
भाव- विह्वल हुए सीएम सैनी बोले, हमारे लिए ये केवल एक बैठक न थी। ये था हरियाणा को विकसित भारत के संकल्प से….और मजबूती से जोड़ने का स्पष्ट मार्गदर्शन।पीएम कहते हैं कि….विकसित भारत केवल सरकारों के प्रयास से न बनेगा। विकसित भारत तब बनेगा….जब देश का हर गांव। हर किसान, हर युवा, हर महिला और….हर परिवार जुड़ेगा….इस संकल्प से। इस राष्ट्रीय संकल्प में बहुत महत्वपूर्ण है….हरियाणा की भूमिका। मोदी जी के मार्गदर्शन का मूल मंत्र है….जनभागीदारी। अब से हमारा प्रयास रहेगा….कि सरकार और जनता के बीच न रहे…. कोई दूरी। हर सरकारी योजना…. केवल सरकारी कार्यक्रम बनकर न रह जाए। वह बने…. जनभागीदारी का जन-अभियान। हमें मंत्र मिला है….लोगों से अधिक से अधिक जुड़ने का। अब से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नियमित रूप से होंगी….30 से 35 गांवों में बैठकें। करीब 250 से 300 लोगों की टोली….महीने में एक बार गांवों में जाएगी। वहां स्वच्छता अभियान चलाएंगे। टिफिन बैठक होंगी। ग्रामीणों संग बैठकर संवाद होगा। स्थानीय समस्याओं पर होगी चर्चा और…. निकाला जाएगा समाधान का रास्ता। चर्चा है कि…. स्पष्ट संदेश मिला है कि….लोकतंत्र केवल विधानसभा में नहीं चलता। गांव की चौपाल में भी चलता है। अब से प्रधानमंत्री के कहे-अनुसार…. हमारे मंत्री- विधायक, कार्यकर्ता जनता के बीच जाएंगे। जनता की बात सुनेंगे। और जनता के साथ मिलकर निकालेंगे समाधान। चर्चा ये भी है कि…. गरीब संग दीपावली, समाज के साथ सेवा। इसी भाव को अपनाकर अब हरियाणा सरकार…. दीपों का पर्व अभूतपूर्व तरीके से मनाएगी। गरीब जरूरतमंद परिवारों के साथ दीपावली मनाई जाएगी। स्वच्छता अभियान चलेगा। बड़े पैमाने पर होगा पौधरोपण। प्रधानमंत्री ने हरियाणा के भाजपा नेताओं को बताया….सेवा की राजनीति का मार्ग। राजनीति केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं। राजनीति का अर्थ है- जनता के सुख-दुख में उसके साथ खड़ा होना। खद्दरधारियों में छिड़ गई है चर्चा….इस बात की कि…. अबकी दिवाली के पर्सनल प्रोग्राम कैंसिल…. खुशियां बांटी जाएंगी। मिठाइयां बांटी जाएंगी। पटाखे फोड़े जाएंगे…. गरीब जरूरतमंद परिवारों के साथ। कुल मिलाकर आने वाली दिवाली….गरीबों के घर होंगे रोशन। उनके द्वारे भी महकेंगे….किस्म किस्म के पकवान, मिष्ठान और व्यंजन।
“अभी तो मैं भी युवा हूं”
मौका था क्रिकेट को हां, नशे को ना…. कहने वाले खेल आयोजन ”नमो क्रिकेट लीग” का। यहां हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के राजनीतिक सलाहकार…. तरुण भंडारी की सरपरस्ती में चल रहे आयोजन में…. बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने स्टेट चॉपर से पहुंचे….उत्तराखंड के 12वें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। क्रिकेट खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने और….खास तौर से पंचकूला पैंथर्स की टीम से भिड़ रही….देहरादून के युवाओं वाली क्रिकेट टीम का हौंसला बढ़ाने आए…. सीएम धामी बल्ला थामने की अपनी दीवानगी के चलते फड़क रहीं….अपनी बाजुओं को रोक न सके और पकड़ लिया क्रिकेट बैट…. बॉलिंग एन्ड से तरुण भंडारी की नपी तुली बॉल आई….और उधर बिजली की तेजी से घूमा बल्ला….और गेंद पवेलियन से बाहर। मौका चूंकि सांकेतिक क्रिकेट खेलने का था, ऐसे में सिर्फ बल्ला घुमाकर….खिलाडियों को प्रोत्साहित करना भर था। दूसरी बॉल आई सामने तो…. CM धामी ने घुमाया ऐसा बल्ला कि….. बॉल दूर गगन की ओट में जाती दिखाई दी…और नज़ारा देख रहे खिलाड़ियों और दर्शकों की तालियां…. पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में गुंजायमान हो उठीं।
चर्चा है कि…. यही पर लोगों से रूबरू हुए CM पुष्कर सिंह धामी…. अपने दिली जज़्बात का इज़हार किए बिना रह न सके। और उगल गए क्रिकेट सहित खेल को लेकर अपनी दीवानगी। बोले, जीवन में लगानी हो कोई लत…. तो लत लगाएं खेल की, फिटनेस की। कोई जूनून पालना है…. तो पालें अपने सपनों और लक्ष्यों को हासिल करने का। समय बदल गया है। पहले कहा जाता था, ”पढोगे लिखोगे….तो बनोगे नवाब। खेलोगे कूदोगे तो…. होगे खराब।” पर आज देश की सोच में आ चुका है बदलाव। अब खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए हैं…. बेहतर अवसर और मंच। आज कह सकते हैं कि…. ”खेलोगे कूदोगे तो बनोगे लाजवाब।” खेलों को हाँ कहकर….अगर एक युवा भी नशे से बचेगा, तो…. एक परिवार बचेगा। एक परिवार बचेगा तो…. समाज मजबूत बनेगा। और मजबूत समाज से होगा…. मजबूत राष्ट्र का निर्माण। धामी जिस समय युवाओं से खुद को कनेक्ट कर रहे थे…. तभी बोल पड़े, मैं आज भी क्रिकेट खेल सकता हूँ…. अभी भी मैं युवा हूं….। और माहौल युवाओं के शोर से गूँज उठा। CM धामी की इस बात ने….स्टेडियम में मौजूद खेल प्रेमियों के दिलो दिमाग पर…. ख़ासा असर डाला। यहीं पर दर्शकों की भीड़ में पिता संग मच देखने आया नौजवान…. देवऋषि चहक उठा। बोला, पापाजी…. धामी सर सही कह रहे हैं। खिलाडी ही तो हैं वो, मगर राजनीती के। अब सोचिये, वहुत कम उम्र में ही लखनऊ यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से जुड़ गए। उत्तर प्रदेश से अलग हुआ उत्तरांचल। यही पुराना नाम था उत्तराखंड का। तब के CM भगत सिंह कोशियारी के OSD रहे। 2002 से 2008 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के दो बार रहे प्रदेशाध्यक्ष। फिर 37 वर्ष में ही विधायक बने। 2021 मे तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद….भाजपा ने पुष्कर सिंह धामी को नए मुख्यमंत्री के रूप मे चुना। उत्तराखंड के 12 मुख्यमंत्री के रूप में।
चर्चा है कि….नमो क्रिकेट लीग में बतौर मुख्य अतिथि बहुत तारे सितारे आए…. मग़र जो जलवा उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने बिखेरा, वो समां बांध गया। बात उनकी लोकप्रियता की करें तो…. धामी उन बिरले नेताओं में शामिल हैं, जो चुनावी बाज़ी हारने के बाद भी किला जीत जाते हैं। जी हां, वर्ष 2022 में खटीमा से चुनाव हारने के बाद ….एक मौका ऐसा आया कि चम्पावत से जीते भाजपा प्रत्याशी कैलाश चंद्र गहतोड़ी ने…. उत्तराखंड की जनता के हित में अपनी सीट से दे दिया इस्तीफा। उनके सीट छोड़ने से हुए उपचुनाव में चम्पावत की जनता ने…. धामी को सिर आंखों पे बिठाया। और चुनाव जिताकर…. फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया। धामी उत्तराखंड के सबसे कम उम्र के CM हैं। इस तरह हो गए ना….धामी राजनीति के ऐसे मंझे हुए खिलाड़ी…. जो एक चुनाव बेशक हार गया, मग़र लोगों के दिल जीत ले गया। जीती बाज़ी साथी छोड़ गए और….मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने का रास्ता दिखा गए। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ही तरह…. हर समय चेहरे पर मुस्कराहट रखने वाले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी…. कड़े निर्णय लेने में तनिक देर नहीं लगाते। चर्चा है कि…. यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने वाले प्रदेशों में….देश भर में उत्तराखंड ही अव्वल आता है। जबकि दूसरे राज्य UCC को लेकर अभी भी गुज़र रहे हैं….मंथन के दौर से। दीगर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने…. 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और NDA शासित राज्यों में…. इसे लागू करने का तय कर रखा है लक्ष्य।
श्राद्ध पक्ष में श्राप !
पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष का सनातन धर्म में है…. विशेष महत्व। बड़े बूढ़ों और पितरों की प्रसन्नता के लिए…. तमाम लोग करते हैं किस्म किस्म की…. परम्पराओं का पालन। कोई यहां तो कोई वहां…. न जाने कहां कहां। साथ ही चलता है, स्नान ध्यान करके….विधि विधान से भांति भांति की वस्तुओं को दान करके….पुण्य कमाने का चलन। एक तरह का ख़ास अनुष्ठान। कुछ ज्यादा पढ़े लिखे लोग…. कहते हैं इसे, पंडों – पंडितों की साल दर साल…. अनवरत चलने वाली दुकान ओपन। हालांकि, सब अपने मानने या न मानने की ही है बात। ख़ास बात ये है कि लोग…. इन दिनों के दौरान, पखवाड़े भर…. यानी 15 दिनों तक रखते हैं ख़ास ख्याल। अपनी शौक़ीन तबियत से परहेज़ भी…. और पीने खाने की मनाहियों का भी। यही नहीं। लोग चाहते हैं कि इस दौरान…. किसी का दिल न दुखाया जाए। बड़े बूढ़ों का…. और ब्राह्मणों का आशीर्वाद लिया जाए। मगर ये क्या…. चर्चा तो है कि, एक बड़े साहब ने ले लिया…. उड़ता हुआ तीर। ये भी न देखा कि सामने है कौन सा ग़रीब। न जाने कितने दिनों बाद जग रहा था…. उसका नसीब, पर आपसे बताया ना…. ले लिया पंगा। पता नहीं कौन सा लगाया हिसाब….और साहब ने चला दी कलम की बन्दूक…. ठाएं। निशाना चूकना नहीं था। क्योंकि कलम से निकली गोली…. सीधे भरोसे से भरे दिल के पार हो गई। चार दिन की चांदनी के बाद…. सबोर्डिनेट अफसर की फिर अँधेरी हो गई रात। आहत हो गया…. द्विज श्रेष्ठ। पूछ बैठा, गलती क्या थी मेरी…. जो किया मेरे संग ऐसा सुलूक। पर सुनने में है आया कि…. जवाब हो तो दिया जाए। चर्चा है कि…. कुपित ब्राह्मण देवता का पारा भी चढ़ गया। दिमाग पे उनके मानो खून सा चढ़ गया…. और इसी सूरते-हाल में उन्होंने दे दिया…. श्राप। बोल पड़े, होगा तेरा भी सत्यानाश। जिस कुर्सी का हो रहा है ग़ुरूर तुझे…. छिन जाएगी जल्द ही तुझसे। साहब ठहरे गुणा भाग के पक्के…. खोल के दिमाग, लगाया हिसाब…. कोई चिंता नहीं, देखा जाएगा, होगा जो भी। ब्यूरोक्रेसी में भी है चर्चा कि…. श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण का दिया श्राप…. हो गया फलित। लग गया काम…. हो गए साहब तमाम। बड़ी मुश्किल से निकला पखवाड़ा ये…. साहब के मिलने वालों में है….अजब सा इक डर। कि गाडी बढ़ेगी आगे या…. लंबा चलेगा श्राप का असर। वहीँ दूसरी तरफ, ब्राह्मण देवता के मिलने वालों में है….उत्साह जैसा माहौल…. उनके कुछ ख़ास मित्रों का लहू….रहा है अब भी खौल…. हुए नुकसान की यादें अ रही हैं बनकर शूल…. वहीँ कुछ हैं ऐसे भी, कि जिनके चेहरे पर दीखता है…. अभीष्ट की प्राप्ति जैसा मिश्रित कौतूहल।
बाबा की चुनौती से बोलती बंद !
विधानसभा चुनाव की आहट…. राजनेताओं को जुबानी फसल की मुफीद ज़मीन मुहैया करा रही है। बात उत्तर प्रदेश की करें तो…. जुमले तीखे होते दिख रहे हैं। हो ये रहा है कि नेताजी जैसे ही….. माइक आईडी थामे मीडिया कर्मियों और कैमरामेन को देख रहे हैं….. कुछ न कुछ बोल बतिया कर। माहौल को गरमाने का कोई भी मौक़ा….. चूक नहीं रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री…..अखिलेश यादव को ही ले लें। पता नहीं क्या हुआ, जो….. बिना आगा पीछा सोचे बोल गए बड़े बोल। और दे डाली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को….. अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती। अब बाबा कहां मौका चूकने वाले ठहरे….. लगा दिया फुलटॉस नसीहत पर चैलेंज का सिक्सर। चर्चा है कि….. बाबा खेल गए ऐसा मास्टर स्ट्रोक….. कि जिसने सीधे वोट बैंक पर ही कर दी चोट। मुख्यमंत्री ने किया चुनौती का ऐसा प्रहार कि….. चुनाव लड़ने से पहले ही विपक्ष गया बाज़ी हार। बाबा ने दी खुली चुनौती, बोले…..चेले को हटाइए। आइए, हम और आप, दोनों हैं किस्मत आजमाते। चिर परिचित अंदाज़ में बोले योगी, बौखला गए हैं…..समाजवादी पार्टी के बबुआ। वह मुझसे कहते हैं मुख्यमंत्री जी…..अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखा दें। अखिलेश जी, अयोध्या हमारा पावन धाम और है…..आस्था की स्थली। आप भी अयोध्या से नामांकन करिए और…..मैं भी। एक बार दोनों आजमा लेते हैं किस्मत। लड़ाई चेलों से क्यों। लड़ाई तो आमने-सामने होनी चाहिए। जिस अयोध्या को सपा तीन से चार घंटे बिजली देती थी। जहां जय श्रीराम बोलने पर आपकी सरकार ने प्रतिबंध लगाया। वह अयोध्या फिर से राम राज्य का नया उदाहरण बनकर….. करा रही है त्रेता युग का स्मरण।
चर्चा है कि….. योगी एक बार जो 2017 से पहले वाली सरकार को घेरने पर हैं आते….. तो समां ऐसा हैं बांधते कि विपक्ष की हो जाती है….बत्ती गुल। बाबा ने तंज कसा कि …..माफिया के सामने नाक रगड़ने और….. उनकी कब्र पर फातिहा पढ़ने वाले हम लोगों से…..क्या ही लड़ पाएंगे। क्योंकि जनता पहले ही कर चुकी है….इनकी छुट्टी। स्थिति है इनकी ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसी। फिर 80-20 होगा विधानसभा का चुनाव परिणाम। समाजवादी पार्टी का पीडीए यानी….‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’। राज्यसभा चुनाव में इन्होंने दो प्रत्याशी खड़े किए। लेकिन दलित, पिछड़ा (कुर्मी, पाल आदि), ब्राह्मण, कायस्थ, वैश्य, क्षत्रिय, खत्री आदि नहीं था। एक सीट पर अखिलेश के चचाजान (राम गोपाल यादव) थे। दूसरी इन्होंने बेच दी एक धन्ना सेठ को। परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी में जो पराया धन दे….वही है अपना। पीडीए मतलब….प्रदेश डुबाऊ अलायंस। योगी यहीं नहीं रुके, बोले…. सपा सरकार ने बदमाश दिए। लेकिन अब कोई भारत-विरोधी गतिविधियों में लिप्त नहीं हो सकता। सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी छांगुर को पनपने नहीं देंगे। डेमोग्राफ़ी नहीं बदलने देंगे। अब प्रदेश में कोई दंगा, अराजकता, बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं कर सकता। उसे मालूम है …ऐसा करने पर जेल जाना होगा या….जहन्नुम।
चर्चा है कि, अखिलेश यादव पर भाजपा नेताओं के….जुबानी हमले हैं जारी। मंत्री गिरीश चन्द्र यादव हैं कहते….अखिलेश यादव अयोध्या गए थे तो उन्हें….प्रभु श्रीराम के दर्शन भी करने चाहिए थे। यदि है भगवान राम से प्रेम तो….उन्हें राम मंदिर जाकर दर्शन करना चाहिए था। ये कहने का साहस भी दिखाना चाहिए कि उन्हें….राम मंदिर बनने से हुई है खुशी। भाजपा सांसद और UP के पूर्व DGP बृजलाल ने भी खूब साधा निशाना। बोले, भागवत कथा के धार्मिक मंच से भी अखिलेश यादव ने…. दिया राजनीतिक संदेश। ये है कथा का अपमान। बृजलाल ने दी अखिलेश यादव को चुनौती…. यदि वास्तव में समानता की बात हैं करते तो करें घोषणा….सत्ता में आने पर अपने परिवार के अलावा किसी अन्य….यादव, मुस्लिम या दलित को बनाएंगे मुख्यमंत्री। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी तरकश से खींचा तीर…. और चला दिया, अयोध्या सप्तपुरियों में से है एक। लेकिन अखिलेश यादव ने सत्ता में रहते हुए इसे भुला दिया था। अखिलेश यादव श्रीकृष्ण को अपना आराध्य हैं मानते तो….उन्हें मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि के लिए भी प्रयास करना चाहिए। मुस्लिम वोट बैंक की नाराजगी के डर से….अखिलेश यादव न रामलला के दर्शन कर रहे हैं…. और न ही कृष्ण जन्मभूमि पर अपना रुख ही…. स्पष्ट कर रहे हैं।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।



