निश्छल भटनागर की कलम से…..
मात-पिता की अब यही जिम्मेवारी, बेटे बनाएं संस्कारी
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ….अभियान का श्रीगणेश यही से हुआ था…. काम बड़ा था और चुनौती उससे भी बड़ी, मग़र…. जो हरियाणा ने करके दिखलाया, उसने पूरे देश में सूबे का….नाम चमकाया, मान बढ़ाया, सम्मान दिलाया। वर्ना, कानों में विष घोलने वाली बातें…. और कुड़ीमार प्रदेश की तोहमत, बेइज्जती झेलना…. कतई था नहीं आसां। पर ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही देखा हुआ था सपना…. कि कुड़ीमार का दंश था हरियाणे से हटाना…. और पूरे मुल्क को ये बताना कि…. तय कर लिया तो….कर लिया, अब तो है करके दिखलाना। पूरे सरकारी सिस्टम और आम हरियाणवी ने…. दिखाया पूरा विश्वास और निभाया साथ, तब कहीं जाकर….बड़ी कोशिशों और मशक्कतों के बाद हटा …. कुड़ीमार का तमगा। लेकिन, अब क्या है बेटियों की हालत…. क्या सोचा है कभी। चर्चा है कि…. बेटियों को बचा भी लिया और …. भागीरथ प्रयत्न कर पढ़ा भी लिया, लेकिन…. क्या मिल पाया बेटियों को समाज में वो मुकाम….कि जिसके लिए किया इतना ताम-झाम। मौजूदा समाज में नन्ही मुन्नी बच्चियों से लेकर…. बुजुर्ग महिलाओं संग होने वाले अपराधों पर डालें गर इक निगाह तो…. ज़रूर कहेंगे यही कि संस्कारी परवरिश है ज़रूरी। कुछ ऐसा ही एक वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट ने बीते दिनों किया…. दिली जज़्बातों का मुकम्मल इज़हार। कहा उन्होंने, दे तो दिया बेटियों को पलने बढ़ने का मौका, मग़र…. क्या हो जब उड़ें वो खुले आसमां में, और…. वहीँ घेर लें चील- गिद्ध सारे। ऐसा माहौल और ऐसी परवरिश ….दी क्यों नहीं गई कि, बेटी हो घर की चारदीवारी में, या बाहर…. मिलेगा उसे उड़ने का मुक्त आसमान, तभी पूरे कर सकेगी वो…. अपने अरमान और जारी रख सकेगी, अपने सपनों को….पंख देने का अभियान।
असल बात है ये कि…. बेटियों को बचाने की कोशिश में भूल गए…. मात पिता सारे कि, बेटों की हो परवरिश ऐसी कि….बनें संस्कारी। चर्चा है कि…. बुद्धिजीवियों के एक सम्मलेन में गए हम, जहां एक महिला अधिकारी द्वारा ….जताई गयी ये चिंता, नाहक ही नहीं हुई…. वजह बने तमाम ऐसे हालात, जो पैदा करते हैं घर घर में…. चिंता करने की वजहें, मसलन…. घर में यदि जब भाई ने बहन की…. खींच ली चोटी…. फाड़ दिए उसके कपडे…. टोका नहीं गया, रोका नहीं गया तब बेटों को…. और वही बेटा जो घर में बदस्तूर…. खींचता रहा बहन की चोटी…. करता रहा मनमानी, वो बदलते माहौल में जैसे भूल ही गया कि समाज में…. उसकी इन हरकतों से खड़ा हो सकता है बड़ा बखेड़ा …. और बवाल। अब हालत ये है कि बेटों को दिए नहीं गए…. घर में ही संस्कार तो, कैसे करे बाहर….दूसरी लड़कियों और महिलाओं की इज्जत और सत्कार। ऐसी ही सूरते हाल में…. कहीं लड़कियों के साथ होता है कुछ बुरा…. तो दे दिया जाता है उन्हें…. जुदा-अलहदा सा नाम और पहचान का शिकार। अक्सर किसी युवती के प्रेम में पड़कर…. भूल जाते हैं युवा अपने संस्कार, और कर गुजरते हैं कुछ ऐसा कि जिससे…. नाम उनके बाप दादा का समाज में बरसों बरस तक…. होता रहता है बदनामी भरा गुलज़ार। चर्चा ये इसलिए कि…. एक रिटायर्ड आईएएस बोल पड़े…. एकतरफा प्यार के मामलों में किसी भी युवती के खूबसूरत चेहरे पर…. तेज़ाब फेंककर, उसे झुलसाकर और देकर दर्द…. ज़िंदगी भर की चीत्कार, नहीं होता कुछ दुष्टों मतवालों को मलाल…. पर दोतरफा चोट लगती है तब, जबकि पुलिस या रिपोर्ट्स…. बताती हैं समाज के उस दुश्मन को….वन साइडेड लवर। अरे भाई, कैसे हो गया वो…. एकतरफा प्यार का मारा, सिरफिरा और बेचारा…. जबकि क्राइम किया उसने…. ना बख्शा जाने वाला अपराध किया उसने…. फिर कैसा बेचारा। भाई, जब बहन – बेटी ने कहा ना, तो ना ही हुआ ना…. कैसे हो गया वन साइडेड। चर्चा है कि…. सोचना होगा देश और राज्यों की पुलिस को…. कि ऐसी हरकतों वाले नहीं होते बिलकुल भी बेचारे, न ही एकतरफा प्यार के मारे…. इन्हें तो लगाओ चार जूत सारे, तब आए शायद अकल…. और हों इनकी समझ के वारे न्यारे।
ये तो हुई वैसी ही बात कि…. दशकों पहले कहा था देश के एक बड़े पॉलिटिशियन ने अप्रैल 2014 में …. मुरादाबाद की एक चुनावी रैली में…. कि लड़के हैं, लड़कों से गलतियां हो जाती हैं…. क्या रेप केस में फांसी दी जाएगी। और मामला था मुंबई शक्ति मिल सामूहिक बलात्कार केस से जुड़ा…. जिसमे तीन दोषिषों को मिली फांसी की सजा पर…. वो जनाब दे रहे थे अपनी प्रतिक्रिया। यही नहीं….वो रुके नहीं और बोल पड़े कि…. उनकी पार्टी सत्ता में आएगी तो करेंगे रेप कानून में बदलाव…..। सत्ता में तो उनको क्या ही था आना…. अपनी अलग सोच और विचारधारा से पार्टी की फजीहत अलग करा डाली। इसी विषय से जुडी एक चर्चा में निकली….सौ बात की एक बात ये कि…. मोबाइल के चलते किशोरावस्था से सीधे युवावस्था में कदम रख रहे…. नवयुवकों को संस्कार दिए जाने की शुरुवात भी कहीं न कहीं से …. और किसी न किसी को तो….करनी ही पड़ेगी, ऐसे में क्यों न भगवान कृष्ण की इस धरा से, जहाँ हुआ भगवान हरि का आना…. उसी हरियाणा से हो इस सोच का आना, देश भर में छा जाना कि…. मात पिता की हो अब ये जिम्मेवारी, बेटे बनाएं अपने संस्कारी…..।
हम ही हम हैं तो क्या हम हैं, तुम ही तुम हो तो क्या….
सरकार के काम मिल जुलकर हैं होते…. पर ये बात कुछ अफसरान…. समझ ही नहीं पाते। लगता है उन्हें ऐसा कि…. उनके चाहे बिना पेड़ भी…. हिलाता नहीं अपने पत्ते। एक महकमे की मैडम अफसर…. लगाती हैं पूरा ज़ोर अक्सर, रह रहकर…. खींचती रहती हैं हरदम अधीनस्थ अफसर…. ऐसा क्यों नहीं हुआ, वैसा क्यों हुआ, अब क्यों हुआ, तब क्यों नहीं हुआ, वगैरह….वगैरह। आम आदमी से जुड़े एक महकमे पर है उनकी…. पूरी नज़र। दिन भर जुटे रहते हैं सारे कर्मचारी और अफसर…. मग़र मैडम सर हैं कि…. खुश होती ही नहीं, मातहतों की मेहनत को….सलाम करती ही नहीं, खैर…..। सरकार के इस विभाग में हर तरफ है मैडम सर की…. नज़रों की चर्चा। जिधर ठहर गई, उधर आफत गई…. चर्चा है कि, पूरा गियर में रखती हैं मैडम….नाराज़ होने में तनिक देर नहीं लगातीं…. चढ़ जाए जो बात दिमाग में इक बार तो ….उतारे न उतरे, जतन करते रहो आप चाहे बार बार। गुस्सा भी है रहता उनका…. नाक पर बैठा, जो रह रहकर आता निकल। ये भी है चर्चा कि…. मीटिंग में बैठे हों चाहे जितने भी अफसर, नाम अकेला….मैडम सर का ही बैठक से आएगा बाहर, वही छपेगा और वही गूंजेगा। बताते हैं महकमे के निचले अफसर…. सारा खेल क्रेडिट का है, मैडम को किसी का काम ….उतना अदद भी पसंद नहीं कि…. दे दें उसे क्रेडिट, सोचते हैं वो….ऐसे जैसे कि, हम ही हम हैं तो क्या हम हैं, तुम ही तुम हो तो क्या….। मतलब ये कि, जो किया सिर्फ उन्होंने ही किया…. बाकी ठहरे महकमे में सब निठल्ले…..। चर्चा है कि …. अब लोग उन्हें समझ चुके हैं, पढ़ चुके है और…. ले चुके हैं सबक, इसलिए एक सिरे से सब के सब…. मिलाते हैं उनकी हाँ में हाँ और ना में ना…..आखिर नौकरी किसे नहीं है प्यारी।
झगड़ा सुलझाओ भाई !
पेड़ों की अवैध कटाई से निकली बात…. देखिए कहाँ तक पहुँच गई। जैसे जैसे गड़बड़ी मिलती और…. निकलती चली गई, कार्रवाई का दायरा बढ़ता गया। हरियाणा के दो बेहद वरिष्ठ भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को….कुर्सी से हटाने और बिना काम के घर पर बिठाने के बाद भी…. मामले के ठंडा पड़ने के आसार बेहद क्षीण होते दिख रहे हैं। वजह, खैर के पेड़ों की कटाई का बढ़ता ग्राफ बताया जाता है। लेकिन अब मामला…. कुछ अलग ही रंग रूप अख्तियार करता दिख रहा है। जिसने गलत किया या गलत काम में साथ दिया…. उस पर तो कार्रवाई बनती ही है मग़र, एक आध मामले में…. गेंहूं के साथ पिस गया है घुन…. जिसकी गलती नहीं रही वो, शराफत में मारा गया है। ताज़ा मामले में पिछले हफ्ते बताया था हमने…. चर्चा की थी कि, पिंजौर में HMT के साथ लगते जंगल में…. हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की मलकियत वाली ज़मीन पर मिले हैं…. खैर के पेड़ों के 1456 ठूंठ…. जिन्हें बड़ी बेरहमी से इलेक्ट्रिक कटर से काट डाला गया, और…. जिम्मेवार अफसर मुंह ढंके सोते रहे। किसी का कुछ नहीं गया, बेजुबां था दरख़्त…. सो कट गया। पिछले हफ्ते हुई चर्चा में…. महकमे ने किया अपनी भूल में सुधार और…. एक और जिम्मेवार अफसर को दिया कुर्सी से उतार। अब चर्चा है ये कि…. यमुनानगर के कलेसर जंगल में भी खैर के पेड़ों को काटने…. जड़ के करीब से उखाड़ फेंकने के मिले हैं निशाँ। ऐसी चर्चा है कि…. सात से नौ आला अफसरों की एक कमेटी ने कर रखी है पुख्ता जांच पड़ताल, और…. रिपोर्ट वन बल प्रमुख को सौंपने का बना रखा है ख्याल।
इन सबके बीच जंगलात महकमे के अफसरों के बीच से…. निकलकर आई इक चर्चा, जो है जुड़ी आपसी झगड़े, तकरार और लड़ाई से। अफसरों में है चर्चा कि…. महकमे का नामचीन रिटायर्ड अफसर, पैदा करता रहता है….झंझट अकसर। कभी किसी के खिलाफ तो कभी किसी के….। विभाग के अफसर कोई कागजी कार्यवाही करते हैं तो जवाब मिलता है कानूनी कागज़ों से…. मामूली सी एक बात को खींच रखा है बरसों से अनसुलझा…. और उससे उपजे हालातों ने जिम्मेवार अफसरों के….दिलो दिमाग को रखा है बेहद उलझा। बात ऊपर तक है जा पहुंची और….शिकायतों का एक अनवरत दौर भी है चल पड़ा…. जिसमें हर कोई है ना चाहते हुए भी जुड़ा हुआ। चर्चा है कि…. ऐसा माहौल है विभाग में बन पड़ा कि जिसने फाइल चलाई….उसी की सिरदर्दी बढ़ाने को शिकायती लेटर्स की आफत आई। हर कोई है डरा सहमा हुआ…. कुछ गलत न करने पर भी दुबका हुआ, और वजह…. वही रि….र्ड साहिबान। दबी जुबां से कहते हैं सारे…. “नए पुराने” की ये जुगलबंदी…. महकमे में कंडक्ट और रेस्पेक्ट पर बरबस ही…. गिरा रही है ज़हनी गंदगी। चर्चा है कि, आम तौर पर हर छोटी बड़ी हरकत पर….निगाहें टिकाए रखने वाले महकमे के काबिल अफसरों को भी…. नहीं हुई कानों कान यहाँ की खबर कि…. एक के बाद एक गड़बड़ी, क्यों ले रही अंगड़ाई…. आपस की बात बेशक काफी आगे निकल गई, जो हुआ सो हुआ….पर अब झगड़ा सुलझाओ भाई।
इसे क्या कहेंगे….परिवारवाद !
चुनाव की बेला है और…. हर कोई अकेला है। ख़ास तौर से वो, जो अपने दम पर है खड़ा हुआ….वर्ना तो पूरा सिस्टम है कुछ लोगों के साथ ही लगा हुआ। टिकट बंट गए और बंट गईं रेवड़ियां…. बाकी जिसके हिस्से में जो आया, वो अपने भाग्य का पाया। चर्चा ये है चल रही कि…. जो एक बार राजनीति की जद में आया, उसका मन कुछ ऐसा भाया कि…. बिना टोपी पहने उससे रहा नहीं गया। खुद को नहीं तो धर्मपत्नी को सही, पिता नहीं तो बेटे बेटी को सही…. और तो और इस बार हुआ कुछ ऐसा कि जिसकी…. होने लगी है चर्चा दूर तलक…. पंचकूला से मेयर पद पर भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार…. हैं आपस में पड़ोसी। दिलचस्प ही है कि दोनों प्रत्याशी….सेक्टर 2 में ही हैं रहते और…. भौगोलिक दृष्टि से एक ही लाइन के दो अलग अलग छोर की कोठियों को पकड़े। भाजपा प्रत्याशी श्याम लाल बंसल के चुनावी कार्यालय के शुभारम्भ पर…. खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहुंचे तो, कांग्रेसी उम्मीदवार सुधा भारद्वाज के लिए…. कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के साथ दो दो राष्ट्रीय महासचिव…. कुमारी सेलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला को भेजा…. ढोल बाजा हुआ, खासी भीड़ और शक्ति प्रदर्शन के साथ राजनीतिक तमाशा हुआ।
इन सबके बीच चकाचौंध बटोर ले गया एक नौजवान…. 21 वर्षीय पार्थ गुप्ता। उम्र के 22वे बसंत में पहुँचने तक देश के सबसे युवा पार्षद बनने का इच्छुक…. युवा पार्थ जहाँ भी है जाता, लोग उसे ताकते रह जाते। हरियाणा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के नक़्शे कदम पर….चलते दिख रहे उनके पौत्र, पार्थ ने क्षेत्र में हर किसी का दिल जीतने का है जैसे….बीड़ा उठाया हुआ। वहीँ अम्बाला में भी जिन उम्मीदवारों को मिला है पार्टियों का टिकट, वो सिर्फ कार्यकर्ता नहीं…. अपने पिता या परिवार के सगे सम्बन्धी की बदौलत पाए हैं पार्टी का सिंबल…. सोनीपत में कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी कमल दीवान हैं….पूर्व विधायक देवराज दीवान की संतान। यही एक वार्ड के प्रत्याशी कुणाल कौशिक हैं…..भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के भाई के सगे सम्बन्धी। अम्बाला से भाजपा की मेयर प्रत्याशी अक्षिता सैनी हैं अम्बाला शहर मंडल उपाध्यक्ष की बेटी। अम्बाला में ही एक वार्ड से पूर्व विधायक की बहू को …..और एक अन्य वार्ड से पूर्व मेयर की बहू को भी….. कमल के निशान वाला टिकट मिला है। चर्चा है कि….. ऐसे बहुत से वार्ड और क्षेत्र हैं, जहाँ….. जाने माने नाम को मिली पहचान…..और सामान्य कार्यकर्ता की मेहनत नहीं आई उसके काम। जानकार बताते हैं कि टिकट वितरण में सिफारिश….. जरूर करती है काम, मग़र जीतने वाले उम्मीदवार और सिस्टम ”संभाल” लेने वाले को ही….. दिया जाता है जिम्मा और पार्टी का परचम।