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‘ट्रांजिट सिटी’ की छवि से बाहर आए चंडीगढ़ : विशेषज्ञों ने दी रणनीतिक पर्यटन रोडमैप की सलाह

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 13 फरवरी 2026 : 

पंजाब विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट (UIHTM) ने चंडीगढ़ इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन तथा चंडीगढ़ सिटीज़न्स फाउंडेशन के सहयोग से गोल्डन जुबली सेमिनार हॉल में एक उच्चस्तरीय पर्यटन हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की। बैठक का विषय था — “चंडीगढ़ में पर्यटन संवर्धन: ट्रांजिट सिटी की वर्तमान छवि से आगे”।

 कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, पर्यटन विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, नागरिक समाज तथा शिक्षाविदों ने भाग लिया और चंडीगढ़ को एक स्वतंत्र एवं सशक्त पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने पर विचार-मंथन किया। 

“संपत्तियों को अनुभव में बदलना होगा” कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रो. योजना रावत, डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शंस, पंजाब विश्वविद्यालय ने कहा कि चंडीगढ़ की वैश्विक स्तर पर पहचानी जाने वाली वास्तुकला और नियोजित शहरी पहचान को अब अनुभवात्मक पर्यटन में रूपांतरित करने की आवश्यकता है।

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“चंडीगढ़ के पास विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और विशिष्ट पहचान है। अब ज़रूरत है कि इसे एक ‘क्यूरेटेड अर्बन एक्सपीरियंस’ के रूप में प्रस्तुत किया जाए। शहर को केवल प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि आधुनिक विरासत और ज्ञान-केंद्रित पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना होगा,” उन्होंने कहा।

प्रो. मीनाक्षी गोयल, निदेशक अनुसंधान, पंजाब विश्वविद्यालय, ने विश्वविद्यालय की ‘लीड नॉलेज इंस्टीट्यूट (LKI)’ के रूप में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नीति निर्माण में अकादमिक शोध और डेटा-आधारित दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।

प्रशासन की प्राथमिकताएँ स्पष्ट

सुश्री राधिका, निदेशक पर्यटन, चंडीगढ़ प्रशासन, ने प्रशासन की प्राथमिकताओं को साझा करते हुए कहा : “चंडीगढ़ के पास मजबूत आधार हैं। हमारा फोकस पर्यटन अवसंरचना उन्नयन, इवेंट-आधारित पर्यटन और बेहतर विज़िटर अनुभव पर है। समन्वित प्रयासों से हम उच्च-मूल्य पर्यटन को आकर्षित कर सकते हैं।” 

पहले तकनीकी सत्र में प्रो. राकेश मलिक (स्पोर्ट्स टूरिज्म), डॉ. मोहित वर्मा (गवर्नेंस), श्री अरुण भारद्वाज (वेलनेस टूरिज्म) और सुश्री अविता खवास (आर्किटेक्चरल टूरिज्म) ने थीम आधारित सर्किट, खेल एवं वेलनेस पर्यटन, तथा वास्तुकला व्याख्या मार्ग विकसित करने पर बल दिया।

दूसरे सत्र में डॉ. अनिल कपूर (MICE टूरिज्म), डॉ. नीरज अग्रवाल (मेडिकल टूरिज्म) और डॉ. कल्याणी सिंह (हेल्थ टूरिज्म) ने सम्मेलन, चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित किया। 

बैठक का निष्कर्ष स्पष्ट था — चंडीगढ़ को “स्टॉपओवर सिटी” से आगे बढ़ाकर एक रणनीतिक, उच्च-मूल्य और सस्टेनेबल पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना होगा।

 

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