Follow

अटल बिहारी वाजपेयी : भारत के विकास के शिल्पकार

Listen to this article

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के उन महान नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने देश की राजनीति और विकास की दिशा को नया आयाम दिया। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे वाजपेयी एक कवि, पत्रकार और राजनेता थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने। बाद में यह जनता पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विकसित हुआ। वाजपेयी ने 1957 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता और दशकों तक संसद में विपक्ष की मजबूत आवाज बने रहे। वे तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 1996 में मात्र 13 दिनों के लिए, फिर 1998 में 13 महीनों के लिए और अंततः 1999 से 2004 तक पूर्ण कार्यकाल के लिए। उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक, आधारभूत, वैज्ञानिक और सामाजिक क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की। 

वाजपेयी का राजनीतिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने आपातकाल के दौरान जेल की यातना सही और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। वे एक कुशल वक्ता थे, जिनकी कविताएं और भाषण आज भी प्रेरणा देते हैं। लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान भारत के विकास में रहा। 1990 के दशक में जब भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था, वाजपेयी की सरकार ने उदारीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन दिया, जिससे अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आई।

उनकी सरकार ने विनिवेश नीति अपनाई, सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत बनाया और व्यापारिक बाधाओं को कम किया। परिणामस्वरूप, भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6-7% तक पहुंच गई, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि थी।आधारभूत संरचना के विकास में वाजपेयी का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने 'गोल्डन क्वाड्रिलेटरल' परियोजना शुरू की, जो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाली 5,846 किलोमीटर की हाईवे नेटवर्क थी। इस परियोजना ने देश के परिवहन को क्रांतिकारी बदलाव दिया, व्यापार बढ़ाया और रोजगार सृजित किया। 

Advertisement

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाया गया, जिससे गांवों को शहरों से जोड़ा गया और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। इन परियोजनाओं ने भारत को 21वीं सदी में प्रवेश कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वाजपेयी ने भारत को विश्व पटल पर स्थापित किया। 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण करवाकर उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाया। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन था। उन्होंने दूरसंचार क्रांति को बढ़ावा दिया, जिससे मोबाइल फोन और इंटरनेट का प्रसार हुआ। आईटी क्षेत्र में सुधारों से भारत सॉफ्टवेयर निर्यात में अग्रणी बना।

वाजपेयी की सरकार ने नेशनल टास्क फोर्स ऑन इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी गठित किया, जिसने डिजिटल इंडिया की नींव रखी।शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। 'सर्व शिक्षा अभियान' (एसएसए) की शुरुआत उनकी सरकार ने की, जो 6-14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखता था। यह कार्यक्रम जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम पर आधारित था और ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का निर्माण, शिक्षकों की भर्ती और लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया। इसके अलावा, विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग बढ़ाई गई, जिससे आईआईटी और अन्य संस्थानों का विस्तार हुआ। 

विदेश नीति में वाजपेयी एक दूरदर्शी नेता साबित हुए। उन्होंने 'शाइनिंग इंडिया' की अवधारणा दी और अमेरिका, रूस तथा अन्य देशों से संबंध मजबूत किए। 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को हराया, लेकिन उसके बाद लाहौर बस यात्रा और अगड़ा शिखर सम्मेलन से शांति की पहल की। उनकी सरकार ने भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर मजबूत बनाया, जिससे विदेशी निवेश बढ़ा। वाजपेयी की विरासत आज भी जीवित है। उन्होंने स्थिर शासन प्रदान किया, जो गठबंधन राजनीति में दुर्लभ था। उनकी सरकार ने 24 दलों के गठबंधन को सफलतापूर्वक चलाया। 

भारत के विकास में उनका योगदान सांस्कृतिक भी था—वे भारत को एक सभ्यतागत लोकतंत्र मानते थे, जहां विविधता में एकता है। हाल ही में उनकी जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वाजपेयी ने राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया, न कि किसी एक परिवार के विकास में। अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को आर्थिक रूप से मजबूत, आधारभूत रूप से विकसित और वैश्विक रूप से सम्मानित बनाया। उनके सुधार आज के भारत की नींव हैं। उनका योगदान भारत के विकास की कहानी में हमेशा जीवित रहेगा। 

 

 

लेखक: अरविंद सैनी
प्रदेश मीडिया प्रभारी,

भाजपा हरियाणा

What are your Feelings
Advertisement
Tap to Refresh