निश्छल भटनागर की कलम से….
क्या सचमुच बदल पाएंगे पुलिस ”अफसरों ” के तारे सितारे ?
होने वाली है आज की चर्चा….बात-बे-बात की….जूनियर्स के जज़्बात की….पुलिस फ़ोर्स में पनप रहे राजनीतक हालात की….और मातहतों के साथ पक्षपात की। पहले बात वरिष्ठों की….हरियाणा की आईपीएस दंपति… करियर के सर्वोच्च पद तक पहुंच गई …32 बरस से संग-संग साथ-साथ। शुरुवात करते हैं प्रोटोकॉल…और सीनियरिटी के हिसाब से…1994 बैच के नवदीप सिंह विर्क और उनकी पुलिस अफसर धर्मपत्नी… इसी 1994 बैच की वरिष्ठ आईपीएस कला रामचंद्रन की…दोनों अतिरिक्त से हो चुके है पूर्ण ….न समझें हों आप तो, बताते हम हैं…ये आईपीएस दंपति राज्य के गृह मंत्री का दायित्व संभालने वाले…. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की … मंजूरी मिलते ही हो गए हैं डीजी प्रमोट। पहले रहे दोनों ही एडीजीपी। नायाब सीएम की हामी ने….ये सुखद लम्हा हरियाणा पुलिस को भी… है दे डाला, मिल गया है मौका गर्व सी मुस्कुराने का। चर्चा इसी बात की है …और दिलचस्प भी कि….कुछ ऐसा ही अजब संयोग… पिछले बरस पंजाब पुलिस में भी…था देखने को मिला। जुलाई 2025 में नवदीप – कला के बैचमेट्स … 1994 बैच की ही पंजाब पुलिस की….आईपीएस दंपति प्रवीण कुमार सिन्हा और अनीता पुंज….भी हुए थे प्रमोट। पिछले बरस से ही….बन चुके हैं दोनों डीजीपी। एक और दिलचस्प बात ये भी है कि….एक तो यूपीएससी की परीक्षा…उस पर यूनिफॉर्म्ड पुलिस फ़ोर्स में सिलेक्शन के साथ ….एक ही स्टेट में कैडर एलोकेशन….विशेष रूप से ऑफिसर कपल्स के लिए…जीवन के अनेक मोड़ों पर…मिलकर साथ चलने, मुस्कुराने, आपस में खुशियां बांटने….आगे बढ़ने और, चलते जाने का….अवसर आता ही रहता है, लेकिन…. करियर के पीक पर, शिखर पर पहुंचने से पहले….पहाड़ जैसे प्रयत्न भी हैं करने पड़ते। ये सब आपको बताएंगे फिर कभी….अभी बढ़ते हैं चर्चा में…. थोड़ा सा और आगे….तो ज़िक्र उनका भी हो, जो अपने बॉसेज की खुशियों में….शरीक होने के साथ ही, खुद भी थैंक यू सर….कहते दिखाई देंगे। ये हैं…2012 बैच के आईपीएस जशनदीप सिंह रंधावा, दीपक गहलावत, सुमेर प्रताप सिंह और सुनील कुमार….अलग अलग जगहों पर….जिम्मेवारियों सम्भाल रहे ये चारों पुलिस ऑफिसर्स….कंधों पर राष्ट्रीय चिन्ह, अशोक की लाट और….एक से दो सितारों वाले एसपी- एसएसपी के पद से….लगाएंगे छलांग और अशोक की लाट वाले, राष्ट्र चिन्ह के साथ तीन सितारे वाले….डीआईजी पद की शोभा बढ़ाते नज़र आएंगे।
बात यहीं खत्म नहीं होती….चर्चा ये भी है सुलगती हुई कि….बरसों से डीएसपी का दायित्व निभाने वाले…. एचपीएस अफसरों के दिन भी बहुरेंगे क्या….। ऊंची कुर्सी पर बैठे नौकरशाह दिल बड़ा कर लें….चाह लें और ठान लें तो….क्या मुश्किल है। मातहत दिल से सलाम ठोंकेंगे, ड्यूटी करने पर तो सैल्यूट करते ही हैं…. वैसे भी प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत भी….है यही कहता कि…. अधीनस्थों के भी दिन….बहुरने ही चाहिए। चर्चा है कि ऐसी दरियादिली को अंजाम देने के लिए….बना एक प्रस्ताव…. साहब बहादुर के पास भेजा गया…. बड़े साहब ने, जनाब ने राय शुमारी की-कराई…. उनसे छोटे वाले…. कुछ बड़ों ने रिस्पांस, नेगेटिव में दिया…. कुछ ने मुंह बना, बात हंसी में टाल दी….। चर्चा है कि मातहतों के हक़ कि इस मांग को….बातचीत की टेबल तक आने से है….रोका जा रहा….डीपीसी की थी बात चली, पर….साहब की अनिच्छा के आगे….मीटिंग दी गई है टाल…. चर्चा है कि उन्हें है ये डर….कि आरआर के हिस्से में आने वाले पद….एचपीएस न पा जाएं। और ये पद हैं एडिशनल एसपी का….जिसके आधा दर्जन से ज्यादा पदों को है….नए अफसरों का इंतज़ार। ऐसे में बरसों बरस से अपने कंधों पर….तीन सिल्वर स्टार्स लगाने वाले….एचपीएस अफसरों को कंधों पर राष्ट्र चिन्ह, अशोक की लाट….लगवाने के लिए करना होगा अभी और इंतज़ार। याद आ रहा है ये भी कि….हरियाणा की नंबर वन नौकरी एचसीएस के तमाम अफसरों को…. करीब 22 बरस बाद मिला था पहला प्रमोशन, और…. ये सभी एचसीएस अफसर बन पाए थे आईएएस। बड़ी मशक्कत करनी पड़ी, बड़े पापड़ बेलने पड़े, तब जाकर लगा नंबर…. उस हिसाब से तो अभी…. तज़ार की घड़ियाँ गिननी ही हैं दिखाई देती, बड़ा कलेजा करना पड़ेगा….। चलते चलते बता दें कि….साहब बहादुर ने, कंधों पर टू स्टार से थ्री स्टार लगाने वाले….दरोगा और पुलिस इंस्पेक्टर्स के प्रमोशन की….नैया पार लगाने की कर डाली है तैयारी…. चर्चा है कि ऐसा करेंगे, तभी तो….उठते सवाल दबाए जा सकेंगे। कुल मिला कर, सवाल वही का वहीँ खड़ा रह गया कि….क्या सचमुच बदल पाएंगे पुलिस अफसरों के सितारे ? जवाब अब आपको भी है पता…..।
गैस निकाल रहे एजेंसियों की
बात करते हैं देश प्रदेश की बड़ी आबादी की…. वो लोग जो दो वक़्त की रोटी कमाने के बाद….उसे पकाने का इंतज़ाम करने की जंग…लड़ते हैं दिखते। चर्चा उनकी जो…. घरेलू गैस सिलेंडर पाने के लिए… परिवार का पेट पालने के लिए…ईंधन जुटाने के लिए….गैस एजेंसियों के बाहर घंटों खड़े रहने….और डटे रहने को दिखते हैं मजबूर…. सोचिए ज़रा, आखिर क्या है उनका कुसूर….जो वो झेल रहे हैं ऐसे हालात बदस्तूर। खैर, ये तो हुई बात उनकी, जो सचमुच हैं मजबूर… अब बात उनकी, जो हैं तो खासे मजबूत, पर ठहरे…अपनी आदत से मजबूर। ऐसे मजबूत किरदारों की…मुखौटों के बिना चेहरों की…जाननी हो असलियत तो, पूछिए सिर्फ… गैस एजेंसियों के मालिकों से… उन जिम्मेवारों से, जो जैसे तैसे करवाते हैं…हर किसी की रसोई के ईंधन का ‘जुगाड़’…. सुनने वालों की आँखों पर चढ़े… कथित मजबूत लोगों की दिखावट के परदों से…. हटा देंगे वो…झूठ और बनावट का नकाब। बताते हैं आपको एक जगह की आँखों देखी…. एक गैस एजेंसी के मालिक का मोबाइल घनघनाया…. फोन क्या उठाया, चेहरा ही लटक आया। हुआ था कुछ यूँ कि….दूसरी तरफ से कोई बोला, मंत्री जी की कोठी पर भिजवा दो अभी के अभी….चार सिलेंडर। बताई गई जो उन ‘सज्जन पुरुष’ को….बुक एंट्री की अनिवार्य बात तो….वहां से भड़की हुई सी आई आवाज, जानते नहीं क्या….नए हो, एजेंसी तो चलानी है ना, या फिर…. यही सुनने के बाद चेहरा था लटक सा आया। अब कौन कहे मंत्री जी की कोठी पर तैनात….गार्ड, उनके पीए या कुक से…. बिना बुक एंट्री के सिलेंडर देना मतलब….गैरकानूनी काम करना। अब मंत्री की कोठी से ही आए….नियम विरुद्ध अनुरोध नहीं, सन्देश की शक्ल में फरमान…. तू क्या करे कोई भी। इसी एजेंसी के मैनेजर ने बिना देर लगाए … एक और राज़ से पर्दा उठाया, बोला…. फलां पुलिस थाने के मुंशी ने…. पुलिस हेडक्वार्टर के बेहद बड़े अधिकारी का नाम लेकर उसे धमकाया….दो सिलेंडर भिजवा देगा तो, गड्डी तेरी दूंगा छोड़….और जो ना माना तू तो, खड़ी रहेगी गाड़ी तेरी थाणे में…. बोल क्या बोलता तू….। चंद हजार रुपए की नौकरी करने वाले, गैस एजेंसी के उस मैनेजर की वो बात…. छू गई, छेड़ गई दिली जज़्बात, वो अनकही बात….जो इज्जत से, नियम और कायदे से….चलने वालों को जब तब दिखा देती है, हकीकत….और आखें खोल देने वाले हालात।
असलियत में चल यही रहा है…. कमजोरों का, मजबूरों और मजलूमों का हिस्सा….खा रहे हैं, डकार रहे हैं बड़े। तहकीकात में खुली बात ये कि….सिर्फ ओहदेदार जिम्मेवार और इज्जतदार लोग ही…. सिस्टम के खिलाफ जा रहे…. कर रहे वो काम, जो शोभा नहीं देता उनको। बिना बुक एंट्री के एक सिलेंडर न देने को….नियमों के पालनकर्ता मान रहे हैं, मिस्टेक ब्लंडर। और बुक्स में निकल आए जो गड़बड़ी तो….कौन किसको है पहचानता, तमाम जुर्माने और कानूनी कार्रवाई के साथ…. समाज में अपमान का घूँट है पीना पड़ता। कुछ एजेंसी मालिकों ने तो जिलों के तमाम रसूखदारों के नाम खोल डाले, जिन्होंने….बगार डालने के सारे बाँध ही तोड़ डाले। खैर, उनकी करनी, उनके साथ। अब चर्चा को पहुंचाते हैं निंचोड़ की तरफ….बात वो जो है, आपके और….हर किसी के मतलब की। सचमुच इतने खराब नहीं हैं हालात….जो बड़े और इज्जतदार, मजबूत लोग….न दिखाएं अपनी ऐसी सूरत और सीरत…. बनाए छिपाए ढके रखें…. अपनी हैसियत और औकात। बात एक सिलेंडर की नहीं, सिर्फ वो चाहिए हो तो दे दे, कोई भी, अपने घर के कोटे से….मगर एक साथ चार चार माँगना, धमकाना, उनके काम में बाधा डालना, साथ में बगार डालना….कहाँ तक जायज कहा जाएगा जनाब, बताओ आप ही। चर्चा है चली ये कि….पूछताछ में, निकलकर आया वो, जो है…. जन मानस के अंदर से निकली आज की आवाज….कि आजकल गैस एजेंसियों के मालिकों और मैनेजर्स के….मोबाइल आखिर मिल क्यों नहीं रहे, शायद समझ कुछ आया हो आपके….. होंगे ऐसे अगर हालात, तो कौन कराएगा….सिर मुंडाते ही ओलों की बरसात। खुलकर बोल गए कुछ गैस एजेंसी ओनर्स, बाई साब….एजेंसी में बुक करा लो और नियम अनुसार….सिलेंडर आपके घर-ठिकाने पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी। बाकी रात 12 बजे या आधी रात बाद के बजे हों दो…. तो किसी की भी उटपटांग सुनने को बाध्य नहीं हूँ…..।
ऐसे ”विकास” से तो फिसड्डी ही भले
ऐसा हर बार ही क्यूं होता है….सत्ता के नज़दीक पहुंच रखने वालों का ज़मीर…इतना सस्ता कैसे है हो जाता… कि है बिक जाता। चर्चा पंचकूला नगर निगम की है चल रही…. माल का हर पल हाल-ख़याल रखने वाले ही…एसआईटी की पकड़ में आकर रहे हैं मचल मचल। हालिया नाम आया अकाउंट अफसर का….चर्चा है कि ऐसे विकास से तो साहब….लोग फिसड्डी ही भले। समाज के विभिन्न वर्गों में बाज़ार गरमागरम है चर्चाओं का… कि ये जनाब तो, खुद को पंचकूला का कर्ता धरता कहलवाना पसंद करने वाले ….नेताजी का बड़ा करीबी रहा। जुगाड़ बिठाने के लिए जात पात का भी…करता इस्तेमाल। कुछ चोगा धारी श्री श्री एक करोड़ी….का भी प्राप्त था वरद-हस्त…. हो भी क्यों न, हाज़िरी जो लगाई जाती थी। दरबार में बैठकी लगाता था, महाराज जी महाराज जी की जयकार लगाता….और महाराज जी पहुँच जाते सपनों की उड़ान लेने, सात समुन्दर पार। चर्चा है कि….मीडिया में आए चेहरो और नामों ने….एक बात तो कर दी एकदम साफ़ कि…. बिना सत्ता के करीब पहुंचे, कोई नहीं कमा पता….अकूत धन सम्पदा, बेहिसाब दौलत, बड़ी और महंगी गाड़ियां….कोठियां और बंगले, फार्म हाउस, वगैरह वगैरह। देखना तो चाहिए ये एजेंसियों को, जो काम और मेहनत कर रही हैं अब वो…. समय रहते कर लिया होता पहले जो….तो, व्यवस्था पर जनता का बेशकीमती भरोसा….रहता कायम, अंगुली न उठती एक भी।
खैर, गड़बड़ घोटाले में नाम और कुख्याति बटोरने वाले….ये लम्बे हाथ रखने वाले डीलर्स अक्सर दिखते रहे हैं…. विभिन्न ऐसे महकमों में, जहाँ की धन दौलत का हिसाब…. सरकार नहीं, सरकार के बिठाये ओहदेदार हैं रखते। चर्चा ये भी कि….कुछ वर्दीधारी अफसरों के ऑफिसेस में….ये चमत्कारी पुरुष नियमित रूप से अक्सर दिखते रहे हैं आसीन, तब किसी को भी….नहीं होती थी अंदर आने देने की अनुमति और इजाजत। पता नहीं क्या और कैसे….किसकी करते थे वो इबादत। अब चढ़े हैं जांच एजेंसी के हत्थे…. ठीक से सिरे चढ़ी अगर जांच तो…. छोटा शायद ही कोई आए, पकड़ या पूछताछ की गिरफ्त में…. सिर्फ बड़े नाम शोभा बढ़ाते दिखेंगे। चर्चा है कि….बीते दिनों प्रमुख विपक्षी दल ने एक प्रेस वार्ता करके…. तब मचा दी थी हलचल। उन नेताओं ने एक नाम लेकर जड़ा था आरोप कि…. इसे ही पकड़ो, रिमांड में लो, सब पता चल जाएगा। दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। लोगों में है चर्चा कि…. पुलिस के हाथ होते तो हैं लम्बे, मगर…. इतने लम्बे हो जाएँ कि बड़ी और मोटी गर्दन तक पहुँच जाएं…. आम तौर पर ऐसा होता तो नहीं, आगे भगवान जानें…. किसका जमीर कब जाग जाए, कहा नहीं जा सकता। हमारी तरफ से शुभकामनाएं…..।
उम्मीद से कई गुना बड़ा निकलेगा घोटाला !
एक बार फिर जंगलात महकमे की…. ताज़ातरीन अपडेट के साथ हाज़िर है चर्चा…..। हमेशा की तरफ एकदम पुख्ता और…. मुकम्मल जानकारी रखने वाले ओहदेदारों की ….पेशानी पर आए हुए हैं बल। बात कर रहे हैं वो….संभल-संभल, बंद कमरे की बात, बाहर न जाए निकल-निकल, पर जो है, सो है। चर्चा है कि…. पंचकूला के प्रोटेक्टेड फारेस्ट एरिया में….खैर के हजार से ज्यादा बेजुआन दरख्तों की कटाई पर…. जिस तरह नाप दिए गए हैं गार्ड से लेकर ऊपर तक तमाम आला आईएफएस अफसर…. उस कार्रवाई से भी बड़ी कार्रवाई होने का….बन रहा है अंदेशा, वजह है साफ़….वन माफिया पाँव पसार चुका है, सिस्टम के मुंह में चांदी के चंद टुकड़े डाल….अंदर से खोखला कर चुका है, क्योंकि…. पंचकूला के जंगल से जुड़ा मामला तो….एक बानगी भर ही रह जाएगा, असली खेल तो यमुनानगर में खेला गया….पाया जाएगा। जी हाँ, जांच का गुपचुप सिरे चढ़ रहा दायरा…. जैसे से ही खोज बीन पूरी कर लेगा, उसकी रिपोर्ट चौंकाएगी….कई लोगों को हिला जाएगी, ये जता जाएगी कि….कोई थाली में छेद कर दे तो कैसा हो। बाड़ ही खेत खा जाए तो…. कैसा लगे। घर का ही भेदी हो तो….लंका क्या कोई भी किले को ढहने से कौन बचाए। चर्चा है कि…. हजारों हजार की तादात में खैर के पेड़ों की….जबरदस्त तरीके से कटाई हुई है, वो भी दिन-दहाड़े….खुलेआम….बेरोकटोक….बेपरवाह होकर, ऐसे जैसे कि….किसी जिम्मेवार का हो आश्रय, ठिकाना और हिस्सेदारी भी तय, डील हुई होगी कुछ ऐसे कि…. होगा कुछ नहीं….ये यकीं मानो, नहीं आएगा कोई, क्योंकि….वाइल्ड लाइफ विंग के भरोसे है पूरा जंगल, बाकी टेरीटोरियल फारेस्ट फाॅर्स से….मतलब नहीं है कोई…..परिंदा भी पर नहीं मारेगा।
ऐसे चर्चा है कि …. फारेस्ट के चंद मनी माइंडेड अफसरों की कारस्तानियों से फिर होंगे एक बार…. हमेशा मुस्कराहट बिखेरने वाले मुख्यमंत्री ख़फ़ा, वजह ही होगी ऐसी कि पता चलेगा उनको कि…. पंचकूला के अलावा यमुनानगर ही नहीं, आगे भी जंगल में जहाँ जहां खैर के पेड़ थे गर्व से खड़े… उन्हें मोटर संचालित कटर से जड़ के पास से बेरहमी से काटा गया…. आंकड़ा ये पहुँच सकता है 10000 पेड़ों के भी पार। यानी घोटाले की रकम का आंकड़ा छू जाएगा सैंकड़ों करोड़ – अरबों के पार। सीएम को जब ये बताया जाएगा कि वन तस्करों ने….जिन ऊंटों का किया, लकड़ी ढोने में इस्तेमाल, वो थे हाइली ट्रेंड…..। गाँव की पगडण्डी कच्चा रास्ता हो या कम चौड़ी सड़क….वहां तक बिना किसी के सहारे, लोहे के फ्रेम में पीठ पर पांच-पांच सौ किलो लकड़ी लदवाकर….खुद-ब-खुद जा पहुँचते थे ये ऊँट ठिकाने पर…. वहां जहाँ खड़ी होती थी वन तस्करों की गाड़ियां….और किसी को कानों कान खबर तक नहीं। चर्चा ये भी कि…. न जाने पहले कब से चलता रहा है, काली कमाई का ये….गोरख-धंधा, कुछ भी नहीं इसमें चंगा, हिस्सा पड़वाने के लिए चंद अफसर….होते रहे हैं हम्माम में जैसे नंगा। कायदे से अब, मौजूदा जिम्मेवार ओहदेदारों को…. सरकार से समय लेकर उन्हें भविष्य की पुख्ता कार्य योजना से….करवाना चाहिए जागरूक और लेना चाहिए उनसे….ऐसा मार्ग दर्शन कि जिससे विभाग के सामने उपजी….चुनौती पूर्ण स्थिति से जीतकर बाहर निकला जा सके…. महकमे का कायम पुराना भरोसा बनाए रखा जा सके।