दबाव बनाने को कार्यवाहक कुलपति मनुका खन्ना ने कार्रवाई करने के लिए जारी की थी चिट्ठी
न्यूज़म ब्यूरो
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के नए कुलपति का पदभार ग्रहण करने के पांच दिन बीतने के बाद भी उन्हें बधाई देने का तांता लगा हुआ है, आज मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के तीनों उपाध्यक्ष ने एक साथ उनसे मुलाकात करके एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। हालांकि यह मुलाकात पूरी तरह से शिष्टाचार भेंट थी लेकिन लोग इसे लूटा के अन्य पदाधिकारियों व अध्यक्ष/महामंत्री के बीच चल रही खींचतान से जोड़ रहे हैं।
दरअसल लखनऊ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के मौजूदा अध्यक्ष अनित्य गौरव और महामंत्री राममिलन यादव पर तत्कालीन कुलपति आलोक राय द्वारा समर्थित प्रत्याशी होने का ठप्पा लगा हुआ था और उनके दबाव के चलते ही उनकी जीत सुनिश्चित हो पाई थी, लेकिन तीनों उपाध्यक्ष डॉ मोनीषा बनर्जी, गौतम और एस ए ए जाफरी ने विपरीत धारा में तैरकर न केवल अपनी जीत सुनिश्चित की बल्कि उनका मार्जिन भी बहुत अधिक रहा। यही कारण रहा कि आलोक राय ने लखनऊ विश्वविद्यालय छोड़ने के बाद भी अपनी मनमानी जारी रखी और मास्टरों को धमकाए रखा।
बहरहाल इन तीन उपाध्यक्षों ने ही हिम्मत दिखाते हुए आलोक राय के सैकड़ो करोड रुपए के निर्माण और खरीद संबंधी घोटाले, नियुक्तियों में भ्रष्टाचार और घोटाला एवं अन्य मामलों की जांच करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत की थी। माना जा रहा है कि इस शिकायत के बाद से ही आलोक राय के बैकफुट पर आ गए थे, और अपना बोरिया बिस्तर समेट कर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति आवास से भाग खड़े हुए थे। माना जा रहा है कि अब जब नए कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय में आ गए हैं और बार-बार लोगों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि वह विश्वविद्यालय के स्टेट्यूट पर ही काम करेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि लखनऊ यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (लूटा) में एक बार फिर दो फाड़ हो जाएगा और जल्द ही अध्यक्ष पद की कुर्सी खाली हो सकती है। और अगर ऐसे हालात बनते हैं तो वरिष्ठ उपाध्यक्ष को ही यह कुर्सी मिलेगी, ऐसे में यह मुलाक़ात महत्वपूर्ण हो गयी है।
'चेला' चला गुरु की राह पर
लखनऊ विश्वविद्यालय में एक बार फिर लविवि का इतिहास दोहरा सकता है। डीपी तिवारी की राह पर अनित्य गौरव चल निकले हैं। डेढ़ वर्ष का कार्यकाल बचा है।सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन कुलपति आरपी सिंह के बहुत नजदीकी डीपी तिवारी लूटा अध्यक्ष हुआ करते थे। मौजूदा अध्यक्ष अनित्य गौरव की ही तरह भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के चलते पूरी लूटा डीपी तिवारी के खिलाफ थी, इसलिए जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) बुलाकर उनको हटाया गया था और सबसे मजेदार बात यह भी है कि वह भी प्राचीन भारतीय इतिहास के मास्टर थे (उनकी पीएचडी थी) और तब अब के भ्रष्टाचारी CDC अवधेश त्रिपाठी वरिष्ठ उपाध्यक्ष होने के नाते अध्यक्ष बन गए थे।
और हां, डीपी तिवारी ही अनित्य गौरव के कथित गाइड थे/हैं, क्योंकि थिसिस अभी तक शोध गंगा/लाइब्रेरी में मिली नहीं है। लखनऊ विश्वविद्यालय के कई शिक्षक चुटकी ले रहे हैं कि लग रहा है पुराना इतिहास फिर से दोहराएगा।
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