कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने और प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा।
राहुल गुप्ता
नागपुर, 14 अक्टूबर। कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजनीतिक दलों में टूट और चुनाव चिह्नों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग की मदद की। साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के मामले में अदालत की प्रतिक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।
धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के अवसर पर दीक्षाभूमि में डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे दीपके ने नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले फैसलों के लिए संवैधानिक संस्थाओं को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख था। दीपके के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति को इस बार मतदान का अवसर नहीं मिलता, तो क्या उसे अगली बार मतदान करने की बात कहकर मामला टाला जा सकता है? उन्होंने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी सवाल किया कि क्या अदालत उनसे इस बार चुनाव नहीं लड़ने और अगली बार चुनाव लड़ने के लिए कह सकती है।
दीपके ने राजनीतिक दलों में विभाजन और चुनाव चिह्नों से जुड़े मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका का भी जिक्र किया, हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट मामले का नाम नहीं लिया।
उनकी यह टिप्पणी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच आई है।
‘देश में अघोषित आपातकाल लागू करने का आरोप’
दीपके ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर देश में ‘अघोषित आपातकाल’ लागू करने का आरोप लगाया। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार आपातकाल लागू करना चाहती है, तो उसे आधिकारिक रूप से ऐसा करना चाहिए। दीपके ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के कारण प्रदर्शनकारियों को पांच दिनों तक हिरासत में रखा गया। उन्होंने सवाल किया कि देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराना कब से अपराध बन गया है।
दीपके ने आरोप लगाया कि सौरभ, आशुतोष और अजिंक्य नाम के तीन प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और शुरुआत में उनके वकीलों को उनसे मिलने से रोका गया। उनके अनुसार, बाद में सौरभ और आशुतोष को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत विरोध प्रदर्शन के अधिकार का बचाव करते हुए कहा कि यदि शांतिपूर्ण विरोध को राष्ट्रविरोधी बताया जाएगा, तो ब्रिटिश शासन के दौरान महात्मा गांधी के आंदोलनों को भी इसी तरह देखा जाता।
दिल्ली पुलिस के वीडियो को बताया संपादित
दिल्ली पुलिस की ओर से अपनी हिरासत को लेकर जारी किए गए वीडियो पर भी दीपके ने सवाल उठाए। उन्होंने वीडियो को संपादित बताते हुए कहा कि अपनी दादी की मृत्यु की सूचना मिलने के बाद उन्होंने गांव में अपने भाई या अपने वकील से बात करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया।
दीपके के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रात करीब 3:30 बजे फोन कर गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा समय चुनने का उद्देश्य उनके परिवार पर मानसिक दबाव बनाना था।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अपने वीडियो में कहा था कि मानवीय आधार पर दीपके को घर जाने का विकल्प दिया गया था। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों में अंतर है।
इंडिया गठबंधन के आंदोलन का किया समर्थन
दीपके ने स्पष्ट किया कि कॉक्रोच जनता पार्टी किसी राजनीतिक दल से औपचारिक रूप से जुड़ा संगठन नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र दबाव समूह है। उन्होंने कहा कि इसके समर्थकों में ऐसे युवा नागरिक शामिल हैं, जिनका किसी राजनीतिक दल से औपचारिक जुड़ाव नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ उनकी कोई विशेष चर्चा नहीं हुई है, लेकिन सीजेपी और इंडिया गठबंधन एक ही मुद्दे पर अभियान चला रहे हैं। दीपके के अनुसार, इंडिया गठबंधन को देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आंदोलन करने का अधिकार है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महाराष्ट्र के नेताओं उद्धव ठाकरे तथा राज ठाकरे के समर्थन का भी उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने इस आधार पर सीजेपी को किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ मानने से इनकार किया।
यह पूछे जाने पर कि यदि मतदान के लिए फिर से मतपत्रों का इस्तेमाल शुरू होता है, तो क्या सीजेपी चुनाव लड़ेगी, दीपके ने कहा कि फिलहाल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा अधिक महत्वपूर्ण है।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे के बयान पर भी प्रतिक्रिया
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे के विरोध प्रदर्शनों की तुलना विदेशों में हुए आंदोलनों से किए जाने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि साल्वे के पास यदि कोई सबूत है, तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को देना चाहिए।
दीपके ने कहा कि आरोप लगाने के बजाय मामले की जांच कराई जानी चाहिए और उपलब्ध सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।
