सरकार ने 500 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में मनोनीत निदेशकों की संख्या दो से बढ़ाकर पांच कर दी है। नए सदस्यों को मतदान का अधिकार भी मिलेगा, जिससे कोल्हापुर की गोकुल डेयरी का राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 7 नवंबर। महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने विपक्ष के विरोध के बीच महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी कर दिया है। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने शुक्रवार को इस संशोधन को मंजूरी दी। इसके तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में सरकार की ओर से मनोनीत निदेशकों की संख्या दो से बढ़ाकर पांच कर दी गई है। इन मनोनीत निदेशकों को मतदान का अधिकार भी दिया गया है।
इस अध्यादेश का सबसे बड़ा राजनीतिक असर कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ यानी गोकुल डेयरी पर पड़ सकता है। गोकुल के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने महायुति समर्थित पैनल को हराया था। इसके बाद अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर विवाद पैदा हुआ और अब कानून में बदलाव के बाद सत्ता संघर्ष और तेज हो गया है।
गोकुल चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल को मिली थी जीत
गोकुल डेयरी के चुनाव में सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीती थीं, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिली थीं। इस नतीजे के बाद अध्यक्ष पद पर कांग्रेस समर्थित पैनल का दावा मजबूत हुआ था।
हालांकि, 29 अक्टूबर को अध्यक्ष चुनने के लिए बुलाई गई बैठक में महायुति समर्थित पैनल के 12 निदेशक शामिल नहीं हुए। इसके कारण आवश्यक 14 निदेशकों का कोरम पूरा नहीं हो सका और बैठक स्थगित करनी पड़ी।
अध्यादेश से मनोनीत निदेशकों को मिलेगा मतदान का अधिकार
नए संशोधन के बाद सरकार को 500 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में पांच निदेशक मनोनीत करने का अधिकार मिलेगा। पहले यह संख्या दो थी। अब इन मनोनीत सदस्यों को मतदान का अधिकार भी दिया गया है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में हार के बाद सरकार कानून बदलकर गोकुल की निर्वाचित व्यवस्था को प्रभावित करना चाहती है। कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने कहा है कि वह इस अध्यादेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने सोमवार को कोल्हापुर में बड़े विरोध मार्च का भी ऐलान किया है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने भी उठाए थे सवाल
पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने 3 नवंबर को सरकार को दी गई कानूनी राय में इस संशोधन पर आपत्ति जताई थी। उनका मत था कि चुनाव के बाद नियम बदलना और निर्वाचित बहुमत को अध्यक्ष पद हासिल करने से रोकने के उद्देश्य से ऐसा करना मनमानी विधायी कार्यवाही माना जा सकता है।
वहीं, मंत्री हसन मुश्रीफ ने दलील दी है कि गोकुल में बैठक का कोरम पूरा नहीं होने से गतिरोध पैदा हुआ है। उनके अनुसार, लगातार दो बैठकों में कोरम पूरा नहीं होने पर सरकार को प्रशासक नियुक्त करना पड़ सकता है।
10 नवंबर की बैठक पर टिकी निगाहें
गोकुल के सभी 25 निर्वाचित निदेशकों को 10 नवंबर की बैठक में उपस्थित रहने के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश अदालत ने दिया है। अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर इसी दिन अगली प्रक्रिया होनी है। अध्यादेश के खिलाफ कानूनी चुनौती और बैठक के नतीजे से यह स्पष्ट होगा कि गोकुल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
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