सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों को समय पर इलाज और आर्थिक सहायता दिलाने के लिए पंचायत समिति कार्यालयों में विशेष कक्ष बनाए जाएंगे।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 7 नवंबर। महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष का विस्तार तालुका स्तर तक करने का निर्णय लिया है। इन कक्षों में अलग से चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। इससे जरूरतमंद मरीजों की पहचान करने, उन्हें समय पर उपचार दिलाने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 नवंबर 2026 को इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। इसके तहत जिला और तालुका स्तर पर स्वास्थ्य समन्वय समितियां भी गठित की जाएंगी। फिलहाल यह व्यवस्था खरीफ सीजन 2026 में ट्रिगर-1 के तहत सूखा घोषित किए गए सभी तालुकों में लागू होगी।
संबंधित तालुका की पंचायत समिति के कार्यालय में यह कक्ष स्थापित किया जाएगा। जिलाधिकारी यहां एक स्वतंत्र चिकित्सा अधिकारी को कक्ष प्रमुख नियुक्त करेंगे। उनकी सहायता के लिए लिपिक और टंकलेखक तैनात रहेंगे। आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी गुट विकास अधिकारी की होगी।
पहले सरकारी योजनाओं से मिलेगा इलाज
जरूरतमंद मरीजों को उनकी पात्रता के अनुसार पहले आयुष्मान भारत, महात्मा फुले जन आरोग्य योजना, श्रमिक विभाग की योजनाओं और धर्मार्थ अस्पतालों के माध्यम से उपचार दिलाया जाएगा। इन योजनाओं के लिए पात्र नहीं होने वाले मरीजों के आवेदन संबद्ध अस्पतालों के जरिए ऑनलाइन प्रणाली पर मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। इस प्रक्रिया में तालुका कक्ष मरीजों को मार्गदर्शन देगा।
कक्ष प्रमुख उपजिला और ग्रामीण अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपकेंद्रों तथा आशा कार्यकर्ताओं की मदद से जरूरतमंद मरीजों की पहचान करेंगे। यह सुनिश्चित करना कक्ष की जिम्मेदारी होगी कि कोई भी पात्र मरीज उपचार से वंचित न रहे।
तालुका और जिला स्तर पर बनेंगी समितियां
तालुका स्तरीय समिति के अध्यक्ष स्थानीय विधायक होंगे, जबकि उपविभागीय अधिकारी (राजस्व) सह-अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे। तहसीलदार, गुट विकास अधिकारी, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और केमिस्ट-ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। कक्ष प्रमुख सदस्य सचिव के रूप में काम करेंगे।
जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष पालकमंत्री और सह-अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे। जिला स्वास्थ्य अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे। इसके अलावा चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े दो समाजसेवियों को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से लगेंगे शिविर
इस व्यवस्था के तहत महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, महाराष्ट्र मेडिकल परिषद, स्थानीय चिकित्सा संगठनों और निजी अस्पतालों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर मरीजों को दवाएं और उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
महीने में दो बैठकें करना अनिवार्य
जिला और तालुका स्तर की दोनों समितियों को महीने में कम से कम दो बैठकें करनी होंगी। दुर्गम क्षेत्रों, अधिक आबादी वाले इलाकों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले स्थानों की पहचान कर वहां प्राथमिकता के आधार पर उपाय किए जाएंगे।
समितियां पेयजल और गर्मी से होने वाली बीमारियों की स्थिति की समीक्षा करेंगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य शिविरों, मोबाइल चिकित्सा दलों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं की योजना बनाई जाएगी। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों तथा मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मंत्रालय को भेजी जाएगी नियमित रिपोर्ट
तालुका स्तर का कक्ष अपने दैनिक कामकाज और स्वास्थ्य शिविरों की रिपोर्ट जिला कक्ष को सौंपेगा। जिला कक्ष सभी तालुकों की रिपोर्ट एकत्र कर मंत्रालय स्थित मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष को भेजेगा।
मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मार्थ अस्पताल सहायता कक्ष के प्रमुख रामेश्वर नाईक ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की परिकल्पना के तहत सहायता निधि की व्यवस्था को अधिक जनोन्मुख बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। तालुका स्तर पर कक्ष स्थापित होने से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के जरूरतमंद मरीजों की समय पर पहचान हो सकेगी और उन्हें उचित उपचार के साथ आर्थिक सहायता दिलाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ और आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री सहायता निधि से मिलने वाली मदद के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि कोई भी जरूरतमंद मरीज आर्थिक परेशानी के कारण उपचार से वंचित न रहे।
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