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सूखे से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, चारे की कमी रोकने के लिए बनेगी नई व्यवस्था

304 सूखाग्रस्त तालुकों में पशुओं को चारा उपलब्ध कराने के लिए जिला योजना निधि का कम से कम 5 प्रतिशत खर्च होगा, चारा बैंक और डिजिटल निगरानी भी शुरू होगी।

मुंबई। अल नीनो के कारण कम बारिश से पैदा हुई सूखे की स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने पशुओं के लिए चारे की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना बनाई है। इसके तहत राज्य के 304 सूखाग्रस्त तालुकों में चारा उत्पादन, भंडारण और वैकल्पिक स्रोत विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने शुक्रवार को घोषणा की कि जिला वार्षिक योजना निधि का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा अब चारा उत्पादन, उपलब्ध चारे के संरक्षण और वैकल्पिक चारा स्रोतों के विकास पर खर्च किया जाएगा।

योजना में चारा बैंक स्थापित करने, जल-परागण और अजोला की खेती को बढ़ावा देने, जिलों के बीच चारे का परिवहन आसान बनाने और पशु शिविरों के डिजिटल प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं।

विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों पर तैयार हुई योजना

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यह पहल राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप-समिति के तहत गठित विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों के आधार पर की गई है। इस समूह की अध्यक्षता राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने की थी।

उप-समिति ने 27 अक्टूबर को सिफारिशों को मंजूरी दी थी। इसके बाद 30 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में सरकारी निर्णय (जीआर) जारी किया गया।

कम पानी में उगने वाली चारा फसलों को मिलेगा बढ़ावा

सरकारी आदेश के मुताबिक, रबी सीजन के लिए कम पानी में उगने वाली और कई बार कटाई की जा सकने वाली चारा फसलों के बीज महाबीज और अन्य उत्पादकों के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।

इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों की जमीन, तालुका बीज गुणन केंद्रों, कृषि निगमों के भूखंडों और पशुपालन विभाग के अधीन संस्थागत भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा।

विभिन्न विभागों के समन्वय से चारागाह, घास के मैदानों और बंजर या परती जमीन पर भी चारा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। जल संसाधन विभाग की मदद से गाद जमा होने वाले क्षेत्रों को किसानों और पशुपालकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

जिलों में बनाए जाएंगे चारा बैंक

सरकारी आदेश में वन विभाग को घास की कटाई और उसके भंडारण की व्यवस्था समय पर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा किसान उत्पादक संगठनों, कंपनियों और गैर सरकारी संगठनों की मदद से जिला स्तर पर चारा बैंक स्थापित किए जाएंगे।

चारे की लागत नियंत्रित रखने के लिए सूखे चारे की अधिकतम कीमत 12 रुपये प्रति किलोग्राम और साइलेज की कीमत 8 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है।

पशुपालकों को चारे की सही कटाई, भंडारण, साइलेज तैयार करने, यूरिया और एंजाइम से उपचार तथा धान के भूसे का बेहतर इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

हाइड्रोपोनिक्स और अजोला जैसी तकनीकों को बढ़ावा

चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए हाइड्रोपोनिक्स, अजोला और बिना कांटों वाले कैक्टस की खेती जैसी वैकल्पिक तकनीकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए पशु चिकित्सालयों में प्रायोगिक उत्पादन की योजना भी बनाई गई है।

सरकार ने पशु आहार की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए चारे के औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसके तहत पैकेजिंग, जैव ईंधन और बिजली उत्पादन जैसे उद्देश्यों के लिए चारे का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।

जिला कलेक्टरों को राज्य से बाहर चारे के परिवहन को कानूनी रूप से रोकने का अधिकार भी दिया गया है।

पशु शिविरों की निगरानी डिजिटल प्रणाली से होगी

राज्य सरकार पशु शिविरों के लिए ऑनलाइन निगरानी और प्रबंधन प्रणाली लागू करेगी। इसके जरिए पशुओं का पंजीकरण, रोजाना उपस्थिति, चारा वितरण, पानी की उपलब्धता, पशु चिकित्सा देखभाल और खर्चों की निगरानी की जाएगी।

शिविरों में बायोमेट्रिक या क्यूआर कोड से उपस्थिति दर्ज करना, भारत पशुधन प्रणाली के जरिए पशुओं का सत्यापन और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य होगी।

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