फडणवीस और ठाकरे बंधुओं के एक मंच पर आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाएं तेज; रवींद्र धंगेकर ने एकनाथ शिंदे को राज्य का नेतृत्व सौंपने की भी मांग की।
पुणे। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। महायुति के भीतर चल रहे मतभेद भी खुलकर सामने आने लगे हैं। भाजपा ने चुनाव में मिली हार के लिए अपने सहयोगी दलों को जिम्मेदार ठहराया है। इसी बीच देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक कार्यक्रम में एक साथ आने से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब शिंदेसेना के नेता रवींद्र धंगेकर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है और कल ठाकरे-शिंदे भी एक साथ आ सकते हैं।
मीडिया से बातचीत में रवींद्र धंगेकर ने कहा कि बीते कुछ समय में व्यक्तिगत मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिशें हुई हैं। लोगों को इस तरह की राजनीति पसंद नहीं है। इसलिए राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नेताओं का एक मंच पर आना अच्छी बात है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में संवाद बना रहना चाहिए। विरोधियों को खत्म करने की कोशिशों के उदाहरण राज्य और देश दोनों ने देखे हैं। ऐसे में जो संवाद टूट गया था, उसे इस कार्यक्रम के जरिए फिर से जोड़ने का प्रयास हुआ है। इससे महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा मिल सकती है।
ठाकरे और शिंदे को लेकर क्या बोले धंगेकर?
धंगेकर ने कहा कि उद्धव ठाकरे बालासाहेब ठाकरे के बेटे हैं। उन्हें कहां झुकना है और कहां मजबूती से खड़े रहना है, यह बताने की जरूरत नहीं है। वहीं, एकनाथ शिंदे बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के उत्तराधिकारी हैं। इसलिए दोनों ही डरने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि जो ऊपर से दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि हकीकत भी वही हो। हर नेता की अपनी स्पष्ट राजनीतिक भूमिका है। राजनीति में कुछ भी हो सकता है और यह बात किसी से छिपी नहीं है। महाराष्ट्र की परंपरा और विरासत को बनाए रखने के लिए सभी को एक साथ आना चाहिए।
एकनाथ शिंदे को नेतृत्व देने की मांग
विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की चुनावी हार पर भी धंगेकर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में उच्च शिक्षित मतदाता मतदान करते हैं और उन्हें राज्य की राजनीतिक दिशा का आकलन होता है। ऐसे नतीजे राज्य के नेतृत्व की परीक्षा माने जाते हैं।
धंगेकर के मुताबिक, इन चुनावों का परिणाम राज्य के नेतृत्व की हार को दर्शाता है और अब नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 200 से अधिक विधायक चुनकर आए थे। इसलिए राज्य का नेतृत्व शिंदे को सौंपा जाना चाहिए।
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