संदीप देशपांडे ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच कराने की मांग की, 45 दिनों में रिपोर्ट देने और ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच पर उठाए सवाल
राहुल गुप्ता
मुंबई, 24 अक्टूबर। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील की ओर से जारी एक कथित ऑडियो क्लिप को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में विवाद बढ़ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि यदि जांच सरकार के अधीन होगी, तो उसकी निष्पक्षता पर भरोसा कैसे किया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराई जाए और 45 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए।
ऑडियो क्लिप की जांच पर उठाए सवाल
देशपांडे ने कहा कि मनोज जरांगे पाटील की ओर से ऑडियो क्लिप सार्वजनिक किए जाने के बाद इस पर चर्चा हो रही है। इससे पहले भी कई ऑडियो क्लिप सामने आ चुकी हैं, लेकिन उनके फॉरेंसिक जांच संबंधी निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए। उन्होंने सवाल किया कि मौजूदा मामले में फॉरेंसिक जांच कौन करेगा और उसकी रिपोर्ट कब तक सामने आएगी।
जरांगे पाटील ने इससे पहले आरोप लगाया था कि एकनाथ शिंदे ने भाजपा से 500 करोड़ रुपये लिए हैं। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में ऑडियो क्लिप सुनाई थी। हालांकि, इस आरोप और क्लिप की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
देशपांडे ने कहा कि कथित बातचीत में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, वे सत्ता में शामिल हैं और बातचीत में दूसरे सत्ताधारी दल का भी जिक्र होने की बात कही जा रही है। ऐसे में उन्होंने सरकार के स्तर पर होने वाली जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए।
मीडिया पर दबाव होने का भी सवाल
मनसे नेता ने मीडिया संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या किसी खबर या लेख को प्रकाशित करने के लिए मीडिया संस्थानों पर दबाव डाला गया था। देशपांडे के मुताबिक, लोकतंत्र में मीडिया की अहम भूमिका है और इस मामले में संबंधित संस्थानों को अपनी पारदर्शिता स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि मीडिया संस्थानों पर सरकारी दबाव होने के आरोप हैं, तो इस बारे में भी स्थिति साफ होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने जिन संभावित दबावों का जिक्र किया, उनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं रखा गया।
विपक्ष को बदनाम करने की साजिश का आरोप
देशपांडे ने आशंका जताई कि इस पूरे घटनाक्रम का इस्तेमाल विपक्ष को बदनाम करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने शिवसेना के वॉर रूम की बातचीत सार्वजनिक होने पर कई और बातें सामने आने की संभावना जताई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मनसे की दिलचस्पी महायुति के घटक दलों के आपसी विवाद में नहीं है। उनका सवाल यह है कि क्या इस तरह की घटनाओं का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
फिलहाल, ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता, उसमें कथित तौर पर हुई बातचीत और लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
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