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सूखे की मार ने छीन ली किसान की जिंदगी, तीन बेटियों के सिर से उठा पिता का साया

फसल बर्बाद होने और कर्ज बढ़ने से परेशान लातूर के 41 वर्षीय किसान की आत्महत्या; मराठवाड़ा में जल भंडारण घटने से खेती और पेयजल संकट गहराने की आशंका।

राहुल गुप्ता

लातूर, 13 अक्टूबर। मराठवाड़ा में सूखे की मार किसानों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। लातूर जिले के निलंगा तालुका में 41 वर्षीय किसान अमोल मुगले की आत्महत्या ने खेती के संकट और किसानों को समय पर राहत मिलने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि फसल सूखने और बैंक व निजी साहूकारों का कर्ज बढ़ने से अमोल परेशान थे। परिवार और तीन बेटियों की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर थी। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

घटना के बाद पुलिस ने पंचनामा कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि सूखे से जूझ रहे किसानों को सरकारी सहायता कब मिलेगी। इससे पहले लातूर जिले की रेनापुर तहसील के पालशी गांव में 60 वर्षीय किसान जीवन गव्हाणे की आत्महत्या का मामला भी सामने आया था।

राज्य के करीब 80 फीसदी तालुका सूखे की चपेट में

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महाराष्ट्र के करीब 80 फीसदी तालुका में गंभीर सूखे की स्थिति बताई जा रही है। मराठवाड़ा में जल भंडारण की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। क्षेत्र की 78 लघु सिंचाई परियोजनाएं सूख चुकी हैं, जबकि 4 मध्यम आकार की परियोजनाओं में पानी पूरी तरह खत्म हो गया है। मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं में औसत जल भंडारण घटकर 19 प्रतिशत रह गया है।

लातूर और धाराशिव जिलों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। नांदेड़ जिले में बांधों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है, लेकिन वहां भी 3 बांध सूख चुके हैं। मराठवाड़ा के 215 बांधों में जल भंडारण 25 प्रतिशत से कम रह गया है।

15 से 20 गांवों में पानी की गंभीर कमी

आने वाले दिनों में ग्रामीण इलाकों में खेती के साथ पेयजल संकट भी गहराने की आशंका है। जालना जिले के अंबड तालुका में स्थित गलहाटी मध्यम सिंचाई परियोजना पूरी तरह सूख गई है। इसके कारण 15 से 20 गांवों में पानी की गंभीर कमी बताई जा रही है। पशुओं के लिए पानी जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

परियोजना में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने से जल संकट की गंभीरता सामने आ रही है। सूखे की मौजूदा स्थिति ने ग्रामीण इलाकों में खेती, पेयजल और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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