Follow

लातूर में सूखे से निपटने का 4 सूत्रीय प्लान, पहले सरकारी कुएं-बोरवेल तलाशेगा प्रशासन

राहुल गुप्ता

लातूर, 7 अक्टूबर। महाराष्ट्र का लातूर जिला सूखे की मार झेल रहा है। आने वाली गर्मी में जलसंकट और गंभीर होने की आशंका के बीच जिला प्रशासन ने इससे निपटने के लिए 4 सूत्रीय योजना तैयार की है। इसमें पेयजल, पशुओं के लिए चारा, ग्रामीण रोजगार और मौजूदा जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया गया है। कलेक्टर डॉ. भरत बस्तेवाड़ ने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है।

पहले सरकारी जलस्रोतों का होगा आकलन

प्रशासन के मुताबिक, हर गांव में सबसे पहले सरकारी कुओं और बोरवेल की उपलब्धता और स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार निजी जलस्रोतों की पहचान कर उनका अधिग्रहण किया जाएगा। इन स्रोतों से भी पानी की जरूरत पूरी नहीं होने पर अतिरिक्त कुएं और बोरवेल तलाशे जाएंगे। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जाएगी।

कलेक्टर बस्तेवाड़ ने मंगलवार को चाकुर तहसील के वडवल नागनाथ में पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। करीब 15,000 आबादी वाले इस क्षेत्र में ग्राम पंचायत की सीमा में लगभग 30 बोरवेल हैं, जिनमें से 11 चालू हालत में पाए गए। कई घरों में निजी बोरवेल भी मौजूद हैं।

5 से 6 जगहों पर लगेंगी पानी की टंकियां

वडवल नागनाथ में प्रशासन की ओर से 5 से 6 प्रमुख स्थानों पर पानी की टंकियां लगाने की योजना है। जरूरत के अनुसार वहां नल भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं के संचालन के लिए ग्राम पंचायत कर्मचारियों के साथ 4 लोगों को तैनात किया जाएगा। लोगों को 2-2 घंटे के स्लॉट में पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

Advertisement

चारे के साथ रोजगार पर भी जोर

प्रशासन की योजना में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना भी शामिल है। गांववार मौजूदा चारा भंडार का डेटा जुटाकर यह आकलन किया जाएगा कि उपलब्ध चारा कितने समय तक चल सकता है। जिन ग्रामीणों के पास सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध है, उन्हें चारा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

प्रशासन केवल चारा शिविरों पर निर्भर रहने के बजाय चारा डिपो बनाने पर भी विचार कर रहा है। इससे जरूरत के समय पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर चारा उपलब्ध कराया जा सकेगा।

मनरेगा से कुएं और तालाब होंगे पुनर्जीवित

चौथे मोर्चे पर ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके तहत तालाबों और नालों से गाद निकालने, पुराने कुओं को पुनर्जीवित करने और बोरवेल को रिचार्ज करने जैसे काम कराए जाएंगे।

प्रशासन का लक्ष्य केवल तत्काल जलसंकट से निपटना नहीं, बल्कि मौजूदा जलस्रोतों को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखना भी है। इससे गांवों की टैंकरों पर निर्भरता कम करने और भविष्य के जलसंकट से निपटने में मदद मिल सकती है।

महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को बारिश की कमी के बीच राज्य की 358 में से 265 तहसीलों यानी करीब 74% तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए फसल ऋण के पुनर्गठन, भू-राजस्व में रियायत और बिजली बिल में सब्सिडी समेत कई राहत उपायों की घोषणा की है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद

आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।

Advertisement
↑
Tap to Refresh