राहुल गुप्ता
ठाणे, 6 अक्टूबर। शिवसेना (यूबीटी) विभाग प्रमुख प्रदीप पूर्णेकर हत्याकांड की जांच को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब मुख्य आरोपी के वकील ने भी पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। वकील ने अदालत में मृतक के बेटे राम पूर्णेकर के पूरक बयान का हवाला देते हुए पूछा कि उसमें जिन राजनीतिक लोगों का उल्लेख है, उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं की जा रही है।
शिवसेना (यूबीटी) पहले से ही ठाणे की पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे की भूमिका की जांच की मांग करती रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या आरोप की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पप्या शिंदे 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में
मामले के मुख्य आरोपी पप्या शिंदे को सोमवार को ठाणे की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस ने अदालत में दावा किया कि हत्या से करीब 10 दिन पहले पप्या शिंदे और अन्य आरोपियों के बीच मोबाइल फोन पर करीब 150 बार बातचीत हुई थी। पुलिस के मुताबिक, यह जानकारी कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में सामने आई है। अब जांच एजेंसियां इन कॉल्स के समय, अवधि और आरोपियों के बीच हुई बातचीत के संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं।
राजनीतिक लोगों की भूमिका पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने राम पूर्णेकर के पूरक बयान का हवाला देते हुए कहा कि उसमें कुछ राजनीतिक व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है। वकील ने सवाल किया कि जब बयान में इन लोगों का जिक्र है तो उनकी भूमिका की दिशा में जांच क्यों नहीं की जा रही है।
शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पहले भी पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे की भूमिका की जांच की मांग की जा चुकी है। पुलिस की जांच में इन आरोपों की पुष्टि हुई है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
भास्कर जाधव ने सरकार पर साधा निशाना
मानपाड़ा में प्रदीप पूर्णेकर की शोक सभा के दौरान शिवसेना (यूबीटी) विधायक भास्कर जाधव ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हत्या और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं के बाद सरकार की ओर से घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा।
जाधव ने महाराष्ट्र पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस की अलग साख थी, लेकिन अब लोगों में पुलिस का डर कम हुआ है। उन्होंने सीआईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में नागरिकों को व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठानी पड़ेगी।
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