पुलिस ने आईआईटी बॉम्बे के निदेशक श्रीश केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के बयान दर्ज किए, अब फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 3 अक्टूबर। आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के मामले में मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को संस्थान के निदेशक श्रीश केदारे से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की और उनका बयान दर्ज किया। पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का बयान भी दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दोनों ने छात्र पर जातिगत टिप्पणी किए जाने के आरोपों से इनकार किया और कहा कि संस्थान के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
20 वर्षीय साहिल वाकोड़े की 18 सितंबर को आत्महत्या से मौत हो गई थी। आरोप है कि मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान उसके पास मोबाइल फोन मिला था। प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने कथित परीक्षा में नकल का मामला पकड़ा था।
40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज
पुलिस अधिकारी ने बताया कि श्रीश केदारे को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। करीब 9 से 10 घंटे तक उनका बयान दर्ज करने के बाद उन्हें जाने दिया गया। इस मामले में पुलिस अब तक 40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है।
पुलिस फिलहाल साहिल के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इन उपकरणों को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि प्रोफेसर के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है या अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है। वहीं, यदि कोई सबूत नहीं मिलता है तो पुलिस क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल कर सकती है।
पवई पुलिस ने प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
माता-पिता ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप
साहिल के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि कैंपस में उनके बेटे को जातिगत भेदभाव और दबाव का सामना करना पड़ा था। वे प्रोफेसर दूल्ला की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आजाद मैदान में प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच के साथ छात्र कल्याण और अनुशासन से जुड़ी व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार की मांग की है।
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