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रेड बुल के ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल पर हाईकोर्ट का फैसला, एफएसएसएआई के आदेश को किया रद्द

राहुल गुप्ता
नई दिल्ली, 30 सितंबर। दिल्ली हाईकोर्ट ने रेड बुल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कैफीनयुक्त पेय पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ लिखने से रोकने वाले भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि कंपनी को आदेश जारी करने से पहले अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया था।

सुनवाई का मौका नहीं देने पर सवाल

जस्टिस अमित महाजन ने सोमवार और मंगलवार को मामले की सुनवाई के बाद कहा कि 30 जून को जारी आदेश में रेड बुल को अपने उत्पाद पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल न करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने दर्ज किया कि इस आदेश से पहले कंपनी को जवाब दाखिल करने या अपना पक्ष स्पष्ट करने का कोई अवसर नहीं दिया गया।

एफएसएसएआई ने लेबल बदलने की बात कही

सुनवाई के दौरान एफएसएसएआई की ओर से कहा गया कि 30 जून का पत्र आदेश नहीं बल्कि कारण बताओ नोटिस था और इसमें कंपनी से केवल लेबल में बदलाव करने का अनुरोध किया गया था। नियामक के वकील ने कहा कि समस्या उत्पाद से नहीं, बल्कि ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल से है।

एफएसएसएआई की ओर से यह भी बताया गया कि 24 जुलाई को एक बैठक हुई थी, जिसमें रेड बुल के प्रतिनिधि शामिल हुए थे और संबंधित बदलाव 60 दिनों के भीतर करने पर सहमति बनी थी।

हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस महाजन ने पूछा कि जब एफएसएसएआई सरकारी नियामक है तो वह किसी कंपनी से केवल अनुरोध कैसे कर सकता है और कंपनी को स्पष्टीकरण देने के लिए कौन सा नोटिस जारी किया गया था।

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नए सिरे से फैसला लेने की छूट

रेड बुल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने भी अदालत के सामने कहा कि एफएसएसएआई का आदेश कंपनी के 24 जुलाई के पक्ष रखने के बाद आया था, जिसमें संबंधित बदलावों पर सहमति की बात कही गई थी।

हाईकोर्ट ने एफएसएसएआई को उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए मामले पर नए सिरे से फैसला लेने की छूट दी है। इसके लिए कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करने और अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस मामले में यह तय नहीं किया है कि रेड बुल के उत्पाद एफएसएसएआई अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन करते हैं या नहीं। साथ ही, एफएसएसएआई के पास इस तरह के आदेश जारी करने की शक्ति के मुद्दे पर भी अदालत ने कोई अंतिम राय नहीं दी है।

2002 से ‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम का इस्तेमाल

रेड बुल के अनुसार, भारत में वह वर्ष 2002 से अपने पेय उत्पादों के लिए ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल कर रही है। कंपनी का कहना है कि एफएसएसएआई पहले संबंधित कैफीनयुक्त पेय श्रेणी के लिए इस नाम के इस्तेमाल को मान्यता दे चुका है।

कंपनी ने यह भी दलील दी कि नियामक के मौजूदा रुख में उसके पहले के रुख से बदलाव आया है। इसके समर्थन में रेड बुल ने मार्च 2024 की एफएसएसएआई एडवाइजरी का हवाला दिया, जिसमें संबंधित खाद्य श्रेणियों में आने वाले उत्पादों के लिए ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी।

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