निश्छल भटनागर की कलम से….
उड़न दस्ते के इंस्पेक्टर की उड़ान क्रैश !
यूं तो खून करना…. किसी का क़त्ल करना….वैसे भी अक्षम्य अपराध है। भारतीय न्याय संहिता में इसके लिए…. समुचित धाराओं में मामला मुकदमा दर्ज़ होता है। अपराधी को माननीय अदालत द्वारा….कड़ी सज़ा भी दी जाती है। फिर वो उम्र कैद की सज़ा हो या…. सज़ा ए मौत की। लेकिन ज़रा सोचिए…. की इंसान के क़त्ल पर तो ऐसी मिसालि सज़ा…. और अगर कोई कर दे भरोसे का खून तो….। वो भी जानते बूझते हुए…. तो क्या कहेंगे आप। कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है…. गुज़रे काफी लंबे समय से। अभी तक कानून के कई रखवाले…. चांदी के चंद टुकड़ों की रौशनी में अपनी आंखें चौंधियाकर…. विवेक शून्य होकर…. ज्ञान चक्षु मींचकर….किस्म किस्म के कारनामों में फंसकर….ज़मीर का सौदा कर कर …. भ्रष्टाचार की दलदल में धंसकर…. ईमान के पक्के दिलवालों के हाथों…. धरे – पकडे – जकड़े…. जा चुके हैं, लेकिन अबकी बार हुआ है जो…. नहीं हुआ काफी समय से वो, कि…. CM फ्लाइंग स्कवायड का एक इंस्पेक्टर…. दबोच लिया गया। वो भी रंगे हाथों। बस चल पड़ी चर्चा, वो भी ये कि…. क्या कुछ सोचकर हरियाणा के दो बार के…. मुख्यमंत्री एवं वर्तमान समय में केंद्रीय मंत्री…. मनोहर लाल खट्टर ने अपने पहले ही कार्यकाल में किया था…. CM फ्लाइंग स्कवायड का गठन। तब उन्होंने किया था तय कि …. ये विशेष दस्ता CID यानी क्रिमिनल इनवेस्टिगेटिव डिपार्टमेंट के अधीन करेगा काम…. और सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO को अपनी रिपोर्ट सौंपता है। यकीनन, हरियाणे के लाल…. केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पुलिस-चोर- पुलिस….सुनकर दुःख पहुंचा होगा कि….सोचा था क्या, और क्या हो गया।
ताज़ा पकड़ धकड़ के बाद आला प्रशासनिक अफसरों के एक समूह में छिड़ गई चर्चा…. एक साहब बोले, आखिर ज़रुरत ही क्या है CM फ्लाइंग स्कवायड की। क्या CM साहब से पूछ कर जाते हैं किसी मिशन पर…. या अपने आप ही फ्लाई कर जाते हैं। दूसरे साहब कह उठे…. इन चुनिंदा लोगों को क्या CM ने चुना है, वो भी ईमानदारी के बूते…. या फिर चुने जाने का आधार कुछ और ही है। और अगर ईमानदारी पर ही चुना गया…. स्कवायड से जोड़ा गया है तो पकड़ा कैसे जा रहा है। सारे महकमों की कुंडली कभी भी खोल देने का…. हुनर और हैसियत रखने वाले…. इन निहायत ही अनुशासित और इंसाफ पसंद….स्कवायड मेंबर्स का धर्म ईमान…. कोई जांचता भी है या…. ये काम सिर्फ एंटी करप्शन ब्यूरो के ही है जिम्मे। क्या वहां भी अपना पराया। साथ काम कर चुका या सिफारिशी। जूनियर या सीनियर अफसर का करीबी होना ही है…. CM फ्लाइंग स्कवायड में योग्यता का आधार। अफसरों के समूह में अब तक मौन धारण किए…. तीसरे साहब ख़फ़ा से हो गए। बोले, बड़ा नाम खराब हो रहा है। CM फ्लाइंग स्कवायड के इंस्पेक्टर भी रंगे हाथों पकड़े जाएंगे तो…. क्या होगा फिर। ये तो वही बात हुई कि…. पुलिस ही पुलिस के पीछे पड़ गई। और पड़े भी तो क्यों न पड़े भला….जब कर्म ही हों ऐसे। अफसरों के बीच से निकली चर्चा आज…. कई महकमों में उड़ती पायी जा रही है। कर्मचारी चटखारे ले रहे हैं…. अब तो CM फ्लाइंग स्कवायड की ही….उड़ान क्रैश होने लग गई तो…. बाकियों का क्या होगा। चर्चा ये भी कि जब साडी संस्थाएं सरकार के मुखिया ने…. आपने ही हैं बनाई तो इसे…. CM फ्लाइंग स्क्वायड का नाम क्यों दिया गया। इसमें कौन कौन लोग हैं। उनकी पुख्ता जानकारी…. ईमानदारी का पैमाना…. घर द्वार कारोबार से आता नज़राना…. हरकतें शरीफ़ाना हैं या बचकाना…. या फिर शातिराना, कब कौन जाता है मयखाना…. सब है देखना पड़ना…. पड़ेगा खंगालना।
पूरे CM उड़न दस्ते की नाक से….खिलवाड़ कर चुके इंस्पेक्टर साहब तो चढ़ गए ACB के हत्थे…. मग़र पीछे अपने छोड़ गए तमाम अनुत्तरित से…. सुलगते हुए सवाल। कि डंडा टेकने से ही मिल जाता हो माल…. तो कोई क्यों न करे ये गोलमाल। खनन सामग्री ले जाने वाले ट्रकों – वाहनों को सिर्फ लेकर नज़राना…. छोड़ देने का हक़ और हुनर …. पहुंचा गया CM फ्लाइंग स्कवायड के…. CID इंस्पेक्टर को सींखचों के भीतर। ACB की मानें तो, वाहनों को बिना रोक-टोक चलाने की एवज में…. ₹5 लाख रिश्वत लेते CID इंस्पेक्टर हुए…. रंगे हाथ गिरफ्तार। आरोप ये कि करीब 70 वाहनों से प्रति वाहन…. ₹7,000 मासिक रिश्वत की मांग की। और पूरे मामले में नंबर कमा गई….राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कुरुक्षेत्र यूनिट की टीम। चर्चा तो ये है कि …. डंडा टेकने के इस बाकमाल धंधे में बहुत से …. छोटे बड़े अफसरों ने। कई तो बहुत ही बड़े वाले हैं। ऐसे अफसरों ने कर रखी है PhD…. अब यूनिवर्सिटी का नाम मत पूछ लेना भाई लोग…. क्योंकि वक़्त और हालात आदमी को निकम्मा भी बना देते हैं ….और बिना पढ़ाई समझदारी के जरायम के इस पेशे में…. PhD की डिग्री भी दिला देते हैं। डर का सौदा है भाई…. जो डर गया, समझो सामने वाले को बहुत कुछ दे गया। सूझ बूझ वाला तो फिर भी कुछ पा गया…. और रहा अगर वो नादां तो…. ACB की पकड़ में जकड़कर गच्चा खा गया।
स्टेट विजिलेंस एन्ड एंटी करप्शन ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल…. डॉक्टर अरशिंदर सिंह चावला की मानें तो….वर्ष 2026 में अब तक 138 सफल ट्रैप कार्रवाई की जा चुकी हैं। इनमे सरकारी अधिकारियों – कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए…. रंगे हाथ पकड़ा गया है। यह कार्रवाई संकेत है कि आमजन अब भ्रष्टाचार के खिलाफ…. शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रहा है। ACB की कार्रवाई व्यवस्था पर…. उसका विश्वास मजबूत हुआ है। अगर सरकारी अवकाशों को अलग कर देखा जाए तो…. औसतन लगभग हर दूसरे दिन एक सरकारी अधिकारी या कर्मचारी…. रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। डॉक्टर चावला बताते हैं…. 1 जनवरी 2026 से अब तक 21 मामलों में 23 अधिकारियों – कर्मचारियों को…. सुनाई गई है विभिन्न न्यायालयों द्वारा कठोर सजा।
संदिग्ध फेम…. 190 की लिस्ट में किसका नेम ?
जाल बिछाकर…. मछली पकड़ने में तो माहिर होता है….मछुआरा। मग़र ये जनाब हैं वो…. जो पकड़ते हैं भ्रष्टाचार के तालाब में डुबकी लगाने वाली…. इंसान रुपी मछलियों को। जो जिस तालाब में रहती हैं, उसको गंदा बना देती हैं। ऐसे तालाब के पानी को साफ करने और ….साफ निर्मल बनाने, स्वच्छ नहर की धारा से जोड़ने की कवायद में जुटे…. स्टेट विजिलेंस एन्ड एंटी करप्शन ब्यूरो के डीजी…. डॉ अरशिंदर सिंह चावला के एक ऐलान ने…. उड़ा डाली है सैंकड़ों सरकारी अधिकारियों – कर्मचारियों की रातों की नींद…. और दिन का चैन सुकून। हुआ ये कि डॉक्टर चावला ने कहा है कि…. ACB द्वारा प्रदेश में ऐसे 190 अधिकारियों कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है….जिनके संबंध में लगातार भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें….अथवा इनपुट सामने आए हैं। उन सभी के संबंध में उपलब्ध सूचनाओं का….किया जा रहा है विश्लेषण। और की जा रही है तैयारी…. उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई की।
चर्चा है कि SV & ACB चीफ डॉ चावला के बोल…. हरियाणा सरकार के बहुत से अधिकारियों और कर्मियों को….हलकान किए हुए है। हरियाणा सिविल सचिवालय हो, न्यू सेक्रेटरिएट हो…. या चंडीगढ़ समेत प्रदेश और दिल्ली में तैनात…. राज्य सरकार का कोई भी अफसर या कर्मचारी। खुल्लम खुल्ला माल समेटने वाले भी…. मन में खौफ पालने लगे हैं। और यही तो चाहिए था…. भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ चुके ईमान के पक्के…. ACB के मुलाजिमों को, कि उनकी मौजूदगी का डर…. रहना चाहिए धंधेबाज़ों को। डॉ चावला की अगली बात ने…. ज्यादा डर पैदा किया हुआ है। ACB विभिन्न विभागों से प्राप्त शिकायतों का लगातार …. कर रही है विश्लेषण। उद्देश्य ये पता लगाना है कि किन विभागों….कार्यालयों और क्षेत्रों से…. भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें अधिक मिल रही हैं। और कौन से क्षेत्र भ्रष्टाचार के हॉटस्पॉट…. रूप में सामने आ रहे हैं। काबिले गौर है कि…. हरियाणा में ACB के 7 पुलिस स्टेशन हैं। इनमे आई सूचनाओं – शिकायतों का विश्लेषण कर….उन समस्याओं की होती है पहचान, जिनका सामना….आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में है करना पड़ता। ACB चीफ चावला हैं बताते, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में केवल कार्रवाई करना ही….पर्याप्त नहीं है, बल्कि आमजन का विश्वास जीतना….और उसे बनाए रखना भी है….उतना ही महत्वपूर्ण। जब नागरिकों को होता है ये भरोसा और विश्वास…. कि उनकी शिकायत पर होगी निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई। और शिकायत करने के कारण उनका काम प्रभावित नहीं होगा…. तभी वे भ्रष्टाचार के खिलाफ सामने आने का… करते हैं साहस। ACB में आई हर शिकायत ली जाती है….गंभीरता से। शिकायत पर कार्रवाई बाद भी करते हैं…. उसका फॉलोअप, ताकि शिकायतकर्ता का वैध कार्य….अनावश्यक रूप से न रहे लंबित। और उसे न करना पड़े…. किसी प्रकार की परेशानी का सामना। ख़ास बात ये कि अब कर दी गई है…. रिवॉल्विंग फण्ड की व्यवस्था, जिससे शिकायतकर्ता पर …. नहीं पड़ता कोई आर्थिक बोझ…. जिससे बिना किसी अतिरिक्त चिंता के कोई भी कर सकेगा…. भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत।
चावला की मानें तो भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने वाले….व्यक्ति की पहचान की सुरक्षा को दी जाती है विशेष प्राथमिकता। जो व्यक्ति अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता….उसकी पहचान गोपनीय रखते हुए भी….उसे सम्मानित करने तथा कैश रिवार्ड दिया जाता है। तभी लोग अब भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने आगे आने से नहीं हैं कतराते। हम भी ऐसे शिकायतकर्ताओं को हैं प्रोत्साहित करते…. जिससे अन्य लोग भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने को….प्रेरित होते। और अब तो एक मोबाइल ऐप हो गया है विकसित। कई बार लोगों को…. ACB हेल्पलाइन नंबर याद नहीं रहता। ऐसे में मोबाइल ऐप में होगी सुविधा ऐसी…. कि नागरिक एक टच के ज़रिए….सीधे हेल्पलाइन से जुड़ सकेंगे। शिकायतकर्ता की पहचान सुरक्षित रखने को…. OTP आधारित सुविधाओं सहित अन्य सुरक्षा फीचर्स भी …. किए जा रहे हैं शामिल। चर्चा है कि ACB चीफ ने ये भी है कहा कि…. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई है….एक निरंतर प्रक्रिया। ऐसे में आमजन से है अपील कि….अगर मांगे कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत…. तो बिना भय के दें ACB को सूचना और ….करें खुलकर उसकी शिकायत। हम हैं बैठे बनाने के लिए…. उसकी हजामत।
ACR का खेला
सरकार कोई भी फैसला करती है…. या निर्णय लेती है तो…. बड़ा सोच समझ कर लेती है। दूरदर्शिता दिखलाती है। कई मर्तबा बताती या जताती नहीं, मग़र…. कर डालती है, जिसका पता अक्सर…. बहुत बाद में चलता है। जब से हरियाणा में IDFC बैंक में हुए घोटाले…. के मामले की आंच ने ब्यूरोक्रेसी को तपिश का अहसास कराया है…. तब से बहुत कुछ बदल सा गया है। कलमकारों में चर्चा है कि…. कुछ अफसर किसी से मिल नहीं रहे। कुछ अफसर मुख्यमंत्री य मुख्य सचिव की मीटिंग्स में…. हरदम घिरे रहने का बहाना बनाकर…. पीछा छुड़ाने की कोशिश करते हैं। पिक एंड चूज रवैया अपनाते हैं। किससे मिलना है, कहां मिलना है, तय करके ही गाड़ी की शोभा बढ़ाते हैं। तो कुछ खुद को आउट ऑफ़ स्टशन…. बता कर पल्ला झाड़ लेते हैं। कुछ ही बहादुर अफसर ऐसे भी हैं…. जो कर नहीं तो…. डर कैसा, की फीलिंग रखते हैं। यानी कोई लाग लपेट नहीं। बेधड़क मिलते हैं। साफ बात करते हैं। टालमटोल नहीं। स्पष्ट रहते हैं, झूठ का सहारा तो बिलकुल नहीं लेते। वो कहते हैं ना, मीठी गोली नहीं देते। खुद को बड़ा ”भोला” तो…. कतई नहीं बताते। खैर, हालिया घटनाक्रम के बाद…. कई फैसलों की अंदरखाते समीक्षा…. हो रही है। किस्म किस्म के दावे और…. तर्क दिए – जताये जा रहे हैं। चूंकि मसला प्रशासनिक अधिकारियों की असीमित भूमिका…. से जुड़ा देखा जा रहा है, ऐसे में…. कयास लगाए जा रहे हैं कि ये होता तो…. वैसा होता। वो होता तो…. कुछ और ही होता, वगैरह वगैरह। बहरहाल, चर्चा चल रही है…. ACR से जुड़े विषय पर।
आला अफसरों के एक ग्रुप में बात आई…. जो हर किसी के दिमाग़ में घर कर गई। चर्चा चली कि, अगर कोई सीनियर कभी…. किसी लेवल या मुकाम पर अच्छा नहीं रहा। उसके अपने जूनियर से आपसी सम्बन्ध…. उतने मधुर नहीं रहे। तो क्या होगा। वह क्या लिखेंगे अपने जूनियर के बारे में। क्योंकि ACR तो अत्यंत गोपनीय और…. अफसर का मूल्यांकन करने वाली रिपोर्ट होती है। वो भी सत्यनिष्ठा के साथ। ऐसी स्थिति में उन सीनियर अफसर से…. किस प्रकार का और कितना सही…. रिमार्क मिलेगा जूनियर को। क्या वो भविष्य के लिए लाभकारी होगा या…. बड़ा नुकसान पहुंचाने वाला होगा। ब्यूरोक्रेट्स का तर्क था कि…. शायद अंग्रेजों के ज़माने से यही परंपरा है कि…. सीनियर ही जूनियर की ACR लिख रहे हैं, जबकि ये बात ईमानदारी की है। अगर किसी फाइल पर जूनियर ने सीनियर कि बात न मानी। उनसे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखा। उनका साथ नहीं दिया तो…..। ज्वलंत मुद्दा और गरमागरम चर्चा ये चली कि….अगर कोई सीनियर अफसर कभी भ्रष्टाचार के मामले में फंसा हुआ हो…. उसकी करनी में जूनियर ने साथ न दिया हो तो…. उसके ACR लिखने का क्या मतलब। क्या उसके लिखने का कोई फायदा जूनियर को मिलेगा। ऐसे में क्या हो…. आवाज उठी कि ऐसे सीनियर अफसर को ACR लिखने से…. क्या DEBAR किया जा सकता है। ऐसे सीनियर को जूनियर की ACR लिखने से वंचित किया जाए। रोका जाए या…. योग्य न माना जाए। अन्यथा वह किसी जूनियर के बारे में क्या ही लिखेगा। बात चूंकि किसी अफसर की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट ( Annual Confidential Report)…. से जुडी हुई है। इसलिए ये अत्यंत महत्वपूर्ण और…. दीर्घकालिक निर्णय बन सकता है, जिसकी मिसाल…. बरसों बरस तक दी जाती रहेगी। इससे जहां प्रत्येक अफसर को अपना आचरण…. पानी की तरह पारदर्शी साफ और निर्मल रखना….अनिवार्य हो जाएगा। बल्कि अपने से जूनियर अफसर के सामने…. उचित व्यवहार और निर्णयों के जरिए…. आदर्श स्थापित करना और बेहतर समन्वय बनाए रखना…. लाज़िमी हो जाएगा।
मिली कैसे….आउटस्टैंडिंग ACR !
बात ACR की चल ही रही है तो…. सुनाते हैं एक और घटनाक्रम। एक बड़े अधिकारी के दफ्तर में बैठे थे हम…. साथ में उन साहब का एक जूनियर IAS अफसर। साहब बताने लगे किस्सा…. ACR का। वो यूं कि GST ट्रिब्यूनल के लिए….चल रहा था इंटरव्यू का दौर। कई दावेदार आए थे। सभी एक से बढ़कर एक। सामने बैठे थे न्यायपालिका की शान। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस साहिबान। राज्य के चीफ सेक्रेटरी और अन्य चुनिंदा आला अफसरान। एक साहब कमरे में पेश हुए। चहकते हुए…. खींसे निपोरते हुए। चर्चा चली विषय को लेकर…. दावा पेश करने आए साहब बगलें झाँकने लगे। कुछ भी पूछो…. बताने से इंकार करने लगे। GST को लेकर उनका अल्प ज्ञान…. और इंटरव्यू में बनकर आए पहलवान। बोल उठे, हमारे समय में था ही नहीं….. जज साहब ने कड़क अंदाज़ में कुछ और पूछा तो…. दावेदार साहब बोले, मैं इंटरव्यू की तैयारी करके नहीं आया। ये सुन लगभग ख़फ़ा से होने वाले अंदाज़ में….जज साहिबान का पारा शूट कर गया और वो…. बोल पड़े चीफ सेक्रेटरी साहब से। आप पूछ लो, मुझे कुछ नहीं पूछना अब। बारी राज्य के मुखिया की थी।
ब्यूरोक्रेसी की आन बान शान समझे जाने वाले अफसर साहिबान की थी। चीफ सेक्रेटरी साहब ने दावेदार से…. GST से जुडी एक बेहद कॉमन बात पूछ डाली। ठेठ अंदाज़ में बोल पड़े वो सज्जन…. आप तो मेरे बॉस रहे हो, आपके सामने क्या बोलना। मैं तो बोल ही नहीं सकता। मुंह खोल ही नहीं सकता। कोई और पूछे तो शायद फिर भी…. कुछ बता सकूं। इतना सुनते ही बड़ी सहजता से उन्हें दिखाया गया…. बहार जाने का रास्ता। इसके फ़ौरन बाद…. बोलने की बारी थी, न्यायपालिका की शान की। बोले जज साहिबान, ये कैसे आए इंटरव्यू में। पता लगा कि…. उन सज्जन की ACR लिखी गई थी…. आउटस्टैंडिंग। अब हैरान होने की बारी….इंटरव्यू बोर्ड की थी। सब के सब हैरान। कैसे मिली ऐसे अफसर को…. आउटस्टैंडिंग ACR….। जो विभाग से जुड़ा रहा, लेकिन GST जैसे विषय पर…. अबोध बना रहा। कैसे कैसे लोग होते हैं। चर्चा ये भी चली कि…. ऐसे कौन सीनियर रहे होंगे, जिन्होंने ACR में लिखी….आउटस्टैंडिंग, वाली बात। क्या पैमाना रहा। किन परिस्थितियों में लिखा गया, आउटस्टैंडिंग। बताते हैं कि, वो सज्जन…. अपनी सर्विस में रहते हुए कई दाग़ दामन पर समेटे रहे। एक बार ससपेंड हुए। बड़ी मुश्किल से कोर्ट में पैरवी करके…. बहाल हुए, फिर सर्विस में आए। और दिलचस्प ये रहा कि…. GST ट्रिब्यूनल में इंटरव्यू देने आने से चंद रोज़ पहले ही…. एक अन्य मामले में…. छूट कर बाहर आए। और लगे इंटरव्यू देने। चर्चा सुना रहे वरिष्ठ अधिकारी महोदय…. खिलखिला उठे कि कैसे कैसे लोग पा जाते हैं…. आउट स्टैंडिंग ACR…. ऐसे में कौन कितनी सत्यनिष्ठा से लिखता है। कौन अपना फ़र्ज़…. पूरी पाकीज़गी से निबाहता/ निभाता है। कब किसके दबाव में आ जाता है…. या फिर, किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित हो जाता है…. ये कहा नहीं जा सकता। इसी मुद्दे पर जब चली कहीं और चर्चा तो…. मानते दिखे कई आला अफसरान कि…. होना चाहिए समय रहते एक अहम बदलाव…. वो ये कि, जिस तरह से सीनियर अपने साथ काम कर चुके जूनियर की लिखता है ACR…. उसी तर्ज़ पर, जूनियर को भी अपने सीनियर की ACR में…. अपने अनुभव के रिमार्क्स लिखने का मिले अधिकार। इससे न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि…. बैलेंस बना रहेगा।
एक कलम से ₹50 करोड़ से ज्यादा माफ़ !
अमूमन फाइनेंस डिपार्टमेंट सरकार के दूसरे महकमों की नज़र में…. विलेन की भूमिका में दिखता है। किसी काम का कोई प्रस्ताव भेजो…. फाइनेंस की पारखी नज़रें…. फाइल पर ऐसा गज़ब का ऑब्जेक्शन लगाती हैं कि…. उनका काटा हुआ पानी नहीं मांगता। कई पैरामीटर्स को पर करने के बाद ही…. प्रपोजल होता है एक्सेप्ट…. यानी स्वीकार, मंज़ूर। कहीं बैठे हुए चल पड़ी एक और चर्चा कि…. साहब न होते तो लग गया था काम। वो तो इनकी पारखी नज़रें थीं कि…. समय रहते बात पकड़ में आ गई, वरना…. लेने के देने पड़ जाते और सरकार की हो जाती थू थू…..। बताते हैं कि एक विभाग के नामालूम आला अफसर ने…. पूरी कैबिनेट की पावर्स को खुद ही इस्तेमाल कर डाला। बात पहुंचाई जा सकती थी ऊपर…. मग़र रहे वो मौन। फाइनेंस से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो…. मामले में हो रहे नुक्सान को रोकने के लिए…. हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक भी…. मुद्दा पहुँचाया जा सकता था, लेकिन…. ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन साहब ने ऐसा कुछ नहीं किया और…. अपनी एक कलम से करीब ₹50 करोड़ माफ़ कर दिए। आखिर किसको फायदा पहुंचाने के लिए। कोई नहीं जानता।
चर्चा तो है कि…. ये हरकत किसी और ने की होती तो…. शायद बर्दाश्त न की जाती। कतई बक्शा….न जाता। सरकार की छवि धूमिल करने…. सरकारी खजाने को मोटा नुकसान पहुंचाने…. मनमानी का भरपूर खामियाज़ा भुगतना…. पड़ जाता। मग़र ये क्या, ये तो अपने…. फलां साहब हैं। इसलिए कुछ नहीं हुआ। सब चुप। चर्चा ही तब चली जब लगा पता कि…. हद ही कर दी, जब…. इन साहब ने पूरी कैबिनेट की पावर को खुद ही…. एक्सरसाइज कर डाला। यानी अकेले ही पूरी कैबिनेट की ताकत का…. इस्तेमाल कर डाला और….अपनी कलम से बिना झिझक….या किसी से पूछे विचारे बिना…. माफ़ कर डाले करीब ₹50 करोड़। इन साहब को रोकने के लिए….फाइनेंस डिपार्टमेंट के दो आला अफसर…. खड़े हो गए बिना डर या….बगैर घबराए एकदम डटकर। बोल पड़े खुलकर, तब थमी फाइल की रफ्तार। वर्ना वो तो थी महकमे को झटका दे रहे….व्यक्ति के हाथों में जा सिमटने को बेकरार। ऐसा नहीं कि किसी को पता नहीं चला। अरे साहब, खूब शोर हुआ, हो हल्ला मचा। विरोधियों ने सरकार को जमकर घेरा, मग़र…. कुछ नहीं हुआ, कुछ नहीं हुआ….कहकर बचाव का रास्ता अपना लिया गया। चर्चा है कि साहब के लिए बड़े साहब के दिल में है…. बड़ी जगह। या एक जैसी सोच वाले अफसर…. बैठे हैं एक जगह। उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि दूसरों के लिए तो हैं कई नियम…. लेकिन इनका नाम आए तो….सब शिकायतें हो जातीं हैं बेअसर।
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